{"_id":"5e45ab838ebc3ee6140f1957","slug":"employee-name-someone-else-allahabad-news-ald2684309144","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीएफः कई कंपनियां कर्मचारियों के साथ कर रहीं अन्याय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीएफः कई कंपनियां कर्मचारियों के साथ कर रहीं अन्याय
Fri, 14 Feb 2020 01:33 AM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 14 Feb 2020 01:33 AM IST
विज्ञापन
PF
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कंपनियों तथा संस्थानाें के गोलमाल ने कर्मचारियों को पीएफ ही नहीं अन्य सुविधाओं से भी वंचित कर दिया है। हजारों ऐसे कर्मचारी हैं जो वर्षों से नौकरी कर रहे हैं लेकिन उनकी जगह किसी और का पीएफ कट रहा है।
इस तरह की शिकायतें निजी शिक्षण संस्थानों, सुरक्षा एजेंसियों, आउट सोर्सिंग पर कर्मचारियों की नियुक्ति करने वाली संस्थाओं में अधिक है। इससे कर्मचारियों को दोहरी मार पड़ रही है। मुश्किल यह कि कर्मचारियों को इसकी जानकारी नहीं है और है तो शिकायत के लिए उनके सामने कोई उचित फोरम नहीं है।
नियमों में खामियों का उठाया फायदा
उद्योग शुरू करने या अन्य संस्थान खोलने के लिए संबंधित विभाग के अलावा ईपीएफओ, श्रम आदि विभागों में भी पंजीकरण कराना होता है लेकिन बड़ी संख्या में कंपनियों ने कर्मचारियों का डिटेल नहीं दिया। सिर्फ कार्यरत कर्मचारियों की संख्या दिखाई है। इसके अलावा ईपीएफओ तथा अन्य विभागों तक कर्मचारियों की सीधी पहुंच नहीं है। कंपनियों के प्रतिनिधि ही इन विभागों के संपर्क में होते हैं। ऐसे में कंपनियों की ओर से अपने लोगों की सूची विभागों में भी भेज दी गई, जबकि कार्यरत कोई और है।
विज्ञापन
जहां नियमित नौकरी नहीं वहां बड़ा खेल
कई संस्थाओं ने कर्मचारियों का पुल तैयार कर रखा है। वह दूसरे विभागों में आउट सोर्सिंग पर कर्मचारियों की नियुक्ति करती हैं। कंपनियों ने ऐसे कर्मचारियों की सूची भी पंजीकृत करा रखी है लेकिन उन्हें नियमित तौर पर तैनाती नहीं दी गई। बीच-बीच में नौकरी ब्रेक हो जाती है। इसके अलावा कार्य स्थल भी बदलते रहे। इसलिए बड़ी संख्या में कर्मचारियों को इससे अनभिज्ञ हैं कि उनका पीएफ कट रहा है या नहीं। इसका फायदा उठाकर संस्थाएं पीएफ कटौती में खेल कर रही है। काम कोई कर रहा है लेकिन पीएफ कटौती किसी और की हो रही है।
विज्ञापन
इस तरह की शिकायतें निजी शिक्षण संस्थानों, सुरक्षा एजेंसियों, आउट सोर्सिंग पर कर्मचारियों की नियुक्ति करने वाली संस्थाओं में अधिक है। इससे कर्मचारियों को दोहरी मार पड़ रही है। मुश्किल यह कि कर्मचारियों को इसकी जानकारी नहीं है और है तो शिकायत के लिए उनके सामने कोई उचित फोरम नहीं है।
विज्ञापन
नियमों में खामियों का उठाया फायदा
उद्योग शुरू करने या अन्य संस्थान खोलने के लिए संबंधित विभाग के अलावा ईपीएफओ, श्रम आदि विभागों में भी पंजीकरण कराना होता है लेकिन बड़ी संख्या में कंपनियों ने कर्मचारियों का डिटेल नहीं दिया। सिर्फ कार्यरत कर्मचारियों की संख्या दिखाई है। इसके अलावा ईपीएफओ तथा अन्य विभागों तक कर्मचारियों की सीधी पहुंच नहीं है। कंपनियों के प्रतिनिधि ही इन विभागों के संपर्क में होते हैं। ऐसे में कंपनियों की ओर से अपने लोगों की सूची विभागों में भी भेज दी गई, जबकि कार्यरत कोई और है।
विज्ञापन
जहां नियमित नौकरी नहीं वहां बड़ा खेल
कई संस्थाओं ने कर्मचारियों का पुल तैयार कर रखा है। वह दूसरे विभागों में आउट सोर्सिंग पर कर्मचारियों की नियुक्ति करती हैं। कंपनियों ने ऐसे कर्मचारियों की सूची भी पंजीकृत करा रखी है लेकिन उन्हें नियमित तौर पर तैनाती नहीं दी गई। बीच-बीच में नौकरी ब्रेक हो जाती है। इसके अलावा कार्य स्थल भी बदलते रहे। इसलिए बड़ी संख्या में कर्मचारियों को इससे अनभिज्ञ हैं कि उनका पीएफ कट रहा है या नहीं। इसका फायदा उठाकर संस्थाएं पीएफ कटौती में खेल कर रही है। काम कोई कर रहा है लेकिन पीएफ कटौती किसी और की हो रही है।