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Prayagraj : निजीकरण के विरोध में बिजली विभाग के कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन, सरकार के खिलाफ जमकर निकाली भड़ास
Thu, 29 May 2025 07:00 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 29 May 2025 07:00 PM IST
सार
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि यह चर्चा है कि निजीकरण के लिए नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन को झूठा शपथ पत्र देने के बावजूद निदशक वित्त ने उसे क्लीन चिट दे दी है।
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निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन करते बिजली विभाग के कर्मचारी।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स के आह्वान पर बृहस्पतिवार को देश के सभी प्रांतों के बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं ने उत्तर प्रदेश में 42 जनपदों के किए जा रहे बिजली के निजीकरण के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने सरकार के निर्णय के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया।
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विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि यह चर्चा है कि निजीकरण के लिए नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन को झूठा शपथ पत्र देने के बावजूद निदशक वित्त ने उसे क्लीन चिट दे दी है। इंजीनियर ऑफ कांट्रैक्ट ने झूठा शपथ पत्र देने के मामले में ग्रांट थॉर्टन का नियुक्ति आदेश रद्द करने की सिफारिश की थी। इसे न मान कर अब अवैध ढंग से नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन को क्लीन चिट देकर निजीकरण की प्रक्रिया तेज की जा रही है। संघर्ष समिति ने कहा कि इस घटना से ऐसा प्रतीत होता है कि प्रबंधन की निजी घरानों से मिली भगत है। इसीलिए तीसरी बार श्री निधि नारंग को सेवा विस्तार दिया गया है।
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उत्तर प्रदेश में किए जा रहे बिजली के निजीकरण के विरोध में आज देशभर में 27 लाख बिजली कर्मचारियों ने सभी जनपदों और परियोजनाओं पर भोजन अवकाश के दौरान सड़क पर उतरकर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया और उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों के साथ अपनी एकजुटता दिखाई। बिजली कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों का कोई भी उत्पीड़न करने की कोशिश की गई तो देश के तमाम 27 लाख बिजली कर्मी मूक दर्शन नहीं रहेंगे और सड़क पर उतर कर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। जिसकी सारी जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश सरकार की होगी।
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