{"_id":"5f076e4b8ebc3e63be762352","slug":"electricity-corrouption-case-allahabad-news-ald280622918","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिजली बिल संशोधन घोटाले में फ्लूएंट ग्रिड पर लटकी तलवार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिजली बिल संशोधन घोटाले में फ्लूएंट ग्रिड पर लटकी तलवार
विज्ञापन
electricity corrouption case
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
-जेई,एसडीओ स्तर के कई अफसरों की भी फंस सकती है गर्दन
-एमडी के निर्देश पर गठित दो सदस्यीय समिति ने पूरी की घोटाले की जांच, आज सौंपी जाएगी रिपोर्ट
प्रयागराज। फर्जी आईडी के जरिए करोड़ों रुपये के बिजली बिल संशोधन में घोटाले की उच्चस्तरीय जांच पूरी कर ली गई है। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी केबालाजी के निर्देश पर गठित अधीक्षण अभियंता स्तरीय दो सदस्यीय समिति शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। इस घोटाले में जेई, एसडीओ से लेकर कई अफसरों का गला फंसने की आशंका है। बिलिंग के लिए आईडी जारी करने वाली हैदराबाद की साफ्टवेयर कंपनी फ्लूएंट पर भी गाज गिरने के संकेत मिले हैं।
निदेशक कामर्शियल ओपी दीक्षित की निगरानी में गठित दो सदस्यीय जांच टीम में मिर्जापुर के अधीक्षण अभियंता विनोद कुमार पांडेय और भदोही के अधीक्षण अभियंता निसार अहमद शामिल हैं। निदेशक ने बृहस्पतिवार को बिजली बिल संशोधन घोटाले की विभागीय जांच पूरी होने की पुष्टि की। जांच रिपोर्ट शुक्रवार को प्रस्तुत की जाएगी। इस घोटाले में विद्युत वितरण खंड फूलपुर और हंडिया में 2.64 करोड़ रुपये की बिलों से संबंधित गड़बड़ी पकड़ी जा चुकी है।
इस आधार पर जिले के सभी 20 डिवीजनों में फर्जी आईडी के जरिए बिल संशोधन के नाम पर बड़े पैमाने पर घोटाले की आशंका जताई गई है। बिल रिवाइज घोटाले में आंध्र प्रदेश की साफ्टवेयर कंपनी मेसर्स फ्लूएंट ग्रिड सिस्टम लिमिटेड पर गाज गिरने की आशंका है। कहा जा रहा है कि फ्लूएंट कंपनी के आपरेटरों ने ही जिले भर में एक अफसर के नाम पर चार-चार आईडी जारी की। कई अफसरों के नाम पर फर्जी आईडी संचालित किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
विज्ञापन
इसमें विद्युत वितरण उपखंड प्रथम रीवा रोड के एसडीओ संजीव कुमार श्रीवास्तव की आईडी वाले कंप्यूटर सिस्टम से कई बिजली बिलों को हटाने के मामले में बीते छह जून को फ्लूएंट कंपनी के कर्मचारी रंजीत कुमार निवासी पिंडरा सहायनपुर, कौशांबी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। बिलों को संशोधित कराने के नाम पर गड़बड़ी अप्रैल 2019 में पहली बार तब उजागर हुई थी, जब फूलपुर उपखंड के कार्यालय सहायक आशीष श्रीवास्तव की आईडी से सिकंदराबाद उपकेंद्र में तैनात प्राइवेट आपरेटर अरविंद कुमार विश्वकर्मा ने 11 बिलों को हटा दिया था।
विज्ञापन
-एमडी के निर्देश पर गठित दो सदस्यीय समिति ने पूरी की घोटाले की जांच, आज सौंपी जाएगी रिपोर्ट
प्रयागराज। फर्जी आईडी के जरिए करोड़ों रुपये के बिजली बिल संशोधन में घोटाले की उच्चस्तरीय जांच पूरी कर ली गई है। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी केबालाजी के निर्देश पर गठित अधीक्षण अभियंता स्तरीय दो सदस्यीय समिति शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। इस घोटाले में जेई, एसडीओ से लेकर कई अफसरों का गला फंसने की आशंका है। बिलिंग के लिए आईडी जारी करने वाली हैदराबाद की साफ्टवेयर कंपनी फ्लूएंट पर भी गाज गिरने के संकेत मिले हैं।
निदेशक कामर्शियल ओपी दीक्षित की निगरानी में गठित दो सदस्यीय जांच टीम में मिर्जापुर के अधीक्षण अभियंता विनोद कुमार पांडेय और भदोही के अधीक्षण अभियंता निसार अहमद शामिल हैं। निदेशक ने बृहस्पतिवार को बिजली बिल संशोधन घोटाले की विभागीय जांच पूरी होने की पुष्टि की। जांच रिपोर्ट शुक्रवार को प्रस्तुत की जाएगी। इस घोटाले में विद्युत वितरण खंड फूलपुर और हंडिया में 2.64 करोड़ रुपये की बिलों से संबंधित गड़बड़ी पकड़ी जा चुकी है।
विज्ञापन
इस आधार पर जिले के सभी 20 डिवीजनों में फर्जी आईडी के जरिए बिल संशोधन के नाम पर बड़े पैमाने पर घोटाले की आशंका जताई गई है। बिल रिवाइज घोटाले में आंध्र प्रदेश की साफ्टवेयर कंपनी मेसर्स फ्लूएंट ग्रिड सिस्टम लिमिटेड पर गाज गिरने की आशंका है। कहा जा रहा है कि फ्लूएंट कंपनी के आपरेटरों ने ही जिले भर में एक अफसर के नाम पर चार-चार आईडी जारी की। कई अफसरों के नाम पर फर्जी आईडी संचालित किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
विज्ञापन
इसमें विद्युत वितरण उपखंड प्रथम रीवा रोड के एसडीओ संजीव कुमार श्रीवास्तव की आईडी वाले कंप्यूटर सिस्टम से कई बिजली बिलों को हटाने के मामले में बीते छह जून को फ्लूएंट कंपनी के कर्मचारी रंजीत कुमार निवासी पिंडरा सहायनपुर, कौशांबी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। बिलों को संशोधित कराने के नाम पर गड़बड़ी अप्रैल 2019 में पहली बार तब उजागर हुई थी, जब फूलपुर उपखंड के कार्यालय सहायक आशीष श्रीवास्तव की आईडी से सिकंदराबाद उपकेंद्र में तैनात प्राइवेट आपरेटर अरविंद कुमार विश्वकर्मा ने 11 बिलों को हटा दिया था।