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केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार के खिलाफ चुनाव याचिका खारिज
Wed, 19 Feb 2020 08:09 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 19 Feb 2020 08:09 PM IST
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संतोष गंगवार
- फोटो : PTI
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्रीय राज्य मंत्री(स्वतंत्र प्रभार) श्रम एवं रोजगार व बरेली के भाजपा सांसद संतोष गंगवार के खिलाफ चुनाव याचिका खारिज कर दी है। बरेली से लोकसभा चुनाव 2019 में निर्दलीय उम्मीदवार राकेश अग्रवाल ने गंगवार पर चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए उनके निर्वाचन को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि याचिका में कोई ऐसा तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया है जिससे यह साबित होता हो कि संतोष गंगवार ने चुनाव जीतने के लिए अनुचित साधनों का प्रयोग किया था। याचिका तथ्यहीन होने के आधार पर खारिज कर दी गई ।
याचिका पर न्यायमूर्ति नाहिद आरा मुनीस ने सुनवाई की। याचिका पर प्रारंभिक आपत्ति करते हुए अधिवक्ता सुबोध कुमार और उदित चंद्रा ने कहा कि चुनाव याचिका में लगाए गए आरोप स्पष्ट होने चाहिए तथा याचिका दोष रहित होनी चाहिए।
चुनाव याचिका की सुनवाई वैधनिक प्रक्रिया के तहत की जाती है, यह सामान्य नियमों और समानता के आधार पर नहीं सुनी जा सकती है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि संतोष गंगवार ने चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस के प्रत्याशी को एक करोड़ रुपए रिश्वत दी । तथा अन्य मुस्लिम उम्मीदवारों को भी भारी धनराशि दी गई । उन्होंने वोटरों को प्रभावित करने के लिए भी अनुचित साधनों का प्रयोग किया। वोटरों को खाना और शराब जैसी चीजें परोसी गई ।
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कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि याची द्वारा लगाए गए आरोपों में कोई तथ्यात्मक बल नहीं है। इसमें विशेष रूप से स्पष्ट नहीं किया जा सका है कि उन्होंने किससे और कैसे रिश्वत दी, इसी प्रकार से अनुचित साधनों के मामले में भी कोई स्पष्ट साक्ष्य नहीं दिया जा सका। कोर्ट ने कहा कि आरोपों को साबित करने का भार याची पर होता है।
वह ऐसे नहीं कर सका। याची ने नियमानुसार चुनाव याचिका में दाखिल की जाने वाली प्रतिभूति की धनराशि भी जमा नहीं की है। याचिका तथ्यहीन होने की आरंभिक आपत्ति को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। लोक सभा चुनाव 18 से 23 मई 2019 को हुआ था। जिसमें बरेली लोक सभा सीट से संतोष गंगवार ने चुनाव जीता था।
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याचिका पर न्यायमूर्ति नाहिद आरा मुनीस ने सुनवाई की। याचिका पर प्रारंभिक आपत्ति करते हुए अधिवक्ता सुबोध कुमार और उदित चंद्रा ने कहा कि चुनाव याचिका में लगाए गए आरोप स्पष्ट होने चाहिए तथा याचिका दोष रहित होनी चाहिए।
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चुनाव याचिका की सुनवाई वैधनिक प्रक्रिया के तहत की जाती है, यह सामान्य नियमों और समानता के आधार पर नहीं सुनी जा सकती है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि संतोष गंगवार ने चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस के प्रत्याशी को एक करोड़ रुपए रिश्वत दी । तथा अन्य मुस्लिम उम्मीदवारों को भी भारी धनराशि दी गई । उन्होंने वोटरों को प्रभावित करने के लिए भी अनुचित साधनों का प्रयोग किया। वोटरों को खाना और शराब जैसी चीजें परोसी गई ।
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कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि याची द्वारा लगाए गए आरोपों में कोई तथ्यात्मक बल नहीं है। इसमें विशेष रूप से स्पष्ट नहीं किया जा सका है कि उन्होंने किससे और कैसे रिश्वत दी, इसी प्रकार से अनुचित साधनों के मामले में भी कोई स्पष्ट साक्ष्य नहीं दिया जा सका। कोर्ट ने कहा कि आरोपों को साबित करने का भार याची पर होता है।
वह ऐसे नहीं कर सका। याची ने नियमानुसार चुनाव याचिका में दाखिल की जाने वाली प्रतिभूति की धनराशि भी जमा नहीं की है। याचिका तथ्यहीन होने की आरंभिक आपत्ति को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। लोक सभा चुनाव 18 से 23 मई 2019 को हुआ था। जिसमें बरेली लोक सभा सीट से संतोष गंगवार ने चुनाव जीता था।