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ईसीसी के अल्पसंख्यक स्वायत्तता की होगी पुनर्समीक्षा
अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Wed, 22 Aug 2018 01:43 AM IST
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) प्रशासन इविंग क्रिश्चियन कॉलेज (ईसीसी) को मिले अल्पसंख्यक संस्थान के दर्जे और स्वायत्ता की पुनर्समीक्षा करेगा। यह निर्णय मंगलवार को हुई इविवि एकेडमिक कौंसिल की बैठक में लिया गया। बैठक के दौरान ईसीसी में उप प्राचार्य की नियुक्ति को अवैधानिक करार दिया गया। साथ ही कॉलेज में वित्तीय, प्रशासनिक एवं अकादमिक गतिविधियों की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है।
उप प्राचार्य की नियुक्ति को अवैधानिक करार दिए जाने के बाद कॉलेज के शिक्षकों के एवं कर्मचारियों को विवाद बने रहने तक वेतन मिल पाना अब मुश्किल है। कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू की अध्यक्षता में हुई बैठक में ईसीसी में चल रहे विवाद पर विस्तार से चर्चा की गई। सदस्यों ने बताया कि ईसीसी की स्वायत्ता वर्तमान में अवैधानिक है, क्योंकि इस बाबत न तो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से स्वीकृति मिली है और न ही विश्वविद्यालय ने इसके लिए उपलब्ध प्रावधानों एवं नियमों के तहत कोई प्रस्ताव अग्रसारित किया है। बैठक के दौरान तय हुआ कि केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों के तहत ईसीसी के अल्पसंख्यक दर्जे एवं स्वायत्तता की पुनर्समीक्षा की जाएगी।
बैठक में सदस्यों ने कहा कि कॉलेज में लगातार दो माह से विभिन्न नकारात्मक एवं असंवैधानिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। डॉ. एम. मैसी जबरन प्राचार्य पद पर कब्जा जमाए हुए हैं। कॉलेज में नियमों की अवहेलना करते हुए उप प्राचार्य की नियुक्ति कर दी गई जबकि विश्वविद्यालय के अध्यादेश में इसका कोई प्रावधान नहीं है। इसी वजह से कॉलेज के शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल रहा और उनका उत्पीड़न हो रहा है। सदस्यों ने कॉलेज की वित्तीय, प्रशासनिक एवं अकादमिक गतिविधियों की उच्च स्तरीय समिति से जांच कराने का प्रस्ताव रखा, जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।
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ईसीसी में कक्षाओं का संचालन ठप
इलाहाबाद। वेतन न मिलने से नाराज ईसीसी के शिक्षकों ने मंगलवार से कक्षाओं का बहिष्कार शुरू कर दिया। शिक्षकों ने बेमियादी कार्य बहिष्कार करने और वेतन मिलने तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया है। शिक्षकों के इस निणर्य से मंगलवार को सभी कक्षाओं का संचालन ठप हो गए। शिक्षक शाम पांच बजे तक कॉलेज में मौजूद रहे लेकिन कक्षाओं का बहिष्कार किया।
इस दौरा कॉलेज के सांख्यिकी विभाग में हुई शिक्षकों की बैठक में अगली रणनीति पर चर्चा की गई। शिक्षकों ने कहा कि जब तक विश्वविद्यालय यहां के कार्यवाहक प्राचार्य के हस्ताक्षर को अनुमोदित नहीं करता है, तब तक महाविद्यालय के सभी कार्य और वेतन रुके रहेंगे। शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. रणधीर सिंह ने कहा कि यह बहिष्कार अनिश्चितकाल के लिए है। अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि डॉ. एम. मैसी नवनियुक्त शिक्षकों को धमकी दे रहे हैं कि वे शिक्षक संघ की बैठक में शामिल न हों, वरना उनका प्रोबेशन पीडियड बढ़ा दिया जाएगा और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह यह आपत्तिजनक हैं, क्योंकि शिक्षक शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं। ऑक्टा महासचिव डॉ. उमेश प्रताप सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय की ओर से महाविद्यालय के खिलाफ कोई कार्रवाई की जाती है तो इसके लिए केवल डॉ. एम. मैसी जिम्मेदार होंगे। बैठक में डॉ. पीयूष खरे, डॉ. शीतला प्रसाद, डॉ. थॉमस अब्राहम, डॉ. जस्टिन मसी, डॉ. एस. सहाय, डॉ. सोनाली चतुर्वेदी, डॉ. अनिल तिवारी आदि मौजूद रहे।
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उप प्राचार्य की नियुक्ति को अवैधानिक करार दिए जाने के बाद कॉलेज के शिक्षकों के एवं कर्मचारियों को विवाद बने रहने तक वेतन मिल पाना अब मुश्किल है। कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू की अध्यक्षता में हुई बैठक में ईसीसी में चल रहे विवाद पर विस्तार से चर्चा की गई। सदस्यों ने बताया कि ईसीसी की स्वायत्ता वर्तमान में अवैधानिक है, क्योंकि इस बाबत न तो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से स्वीकृति मिली है और न ही विश्वविद्यालय ने इसके लिए उपलब्ध प्रावधानों एवं नियमों के तहत कोई प्रस्ताव अग्रसारित किया है। बैठक के दौरान तय हुआ कि केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों के तहत ईसीसी के अल्पसंख्यक दर्जे एवं स्वायत्तता की पुनर्समीक्षा की जाएगी।
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बैठक में सदस्यों ने कहा कि कॉलेज में लगातार दो माह से विभिन्न नकारात्मक एवं असंवैधानिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। डॉ. एम. मैसी जबरन प्राचार्य पद पर कब्जा जमाए हुए हैं। कॉलेज में नियमों की अवहेलना करते हुए उप प्राचार्य की नियुक्ति कर दी गई जबकि विश्वविद्यालय के अध्यादेश में इसका कोई प्रावधान नहीं है। इसी वजह से कॉलेज के शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल रहा और उनका उत्पीड़न हो रहा है। सदस्यों ने कॉलेज की वित्तीय, प्रशासनिक एवं अकादमिक गतिविधियों की उच्च स्तरीय समिति से जांच कराने का प्रस्ताव रखा, जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।
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ईसीसी में कक्षाओं का संचालन ठप
इलाहाबाद। वेतन न मिलने से नाराज ईसीसी के शिक्षकों ने मंगलवार से कक्षाओं का बहिष्कार शुरू कर दिया। शिक्षकों ने बेमियादी कार्य बहिष्कार करने और वेतन मिलने तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया है। शिक्षकों के इस निणर्य से मंगलवार को सभी कक्षाओं का संचालन ठप हो गए। शिक्षक शाम पांच बजे तक कॉलेज में मौजूद रहे लेकिन कक्षाओं का बहिष्कार किया।
इस दौरा कॉलेज के सांख्यिकी विभाग में हुई शिक्षकों की बैठक में अगली रणनीति पर चर्चा की गई। शिक्षकों ने कहा कि जब तक विश्वविद्यालय यहां के कार्यवाहक प्राचार्य के हस्ताक्षर को अनुमोदित नहीं करता है, तब तक महाविद्यालय के सभी कार्य और वेतन रुके रहेंगे। शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. रणधीर सिंह ने कहा कि यह बहिष्कार अनिश्चितकाल के लिए है। अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि डॉ. एम. मैसी नवनियुक्त शिक्षकों को धमकी दे रहे हैं कि वे शिक्षक संघ की बैठक में शामिल न हों, वरना उनका प्रोबेशन पीडियड बढ़ा दिया जाएगा और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह यह आपत्तिजनक हैं, क्योंकि शिक्षक शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं। ऑक्टा महासचिव डॉ. उमेश प्रताप सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय की ओर से महाविद्यालय के खिलाफ कोई कार्रवाई की जाती है तो इसके लिए केवल डॉ. एम. मैसी जिम्मेदार होंगे। बैठक में डॉ. पीयूष खरे, डॉ. शीतला प्रसाद, डॉ. थॉमस अब्राहम, डॉ. जस्टिन मसी, डॉ. एस. सहाय, डॉ. सोनाली चतुर्वेदी, डॉ. अनिल तिवारी आदि मौजूद रहे।