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कोविड काल में बंदियों ने बना डाला करीब एक करोड़ का फर्नीचर

Mon, 01 Mar 2021 01:20 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 01 Mar 2021 01:20 AM IST
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During the Kovid period, prisoners made furniture worth about one crore.
फर्नीचर - फोटो : File Photo
कारागार सिर्फ सजा काटने की जगह ही नहीं है, बल्कि वहां से जिंदगी के नए रास्ते भी तलाशे जा सकते हैं। बंदियों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए नैनी सेंट्रल जेल में बंदियों को हुनरमंद बनाया जा रहा है। यहां के बंदियों ने कोरोना काल में एक करोड़ की कीमत का फर्नीचर तैयार किया है, जिसपर न्यायमूर्ति भी बैठ रहे हैं। 
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पुनर्वास योजना के तहत नैनी जेल की कार्यशाला में बंदियों को हुनरमंद बनाया जा रहा है। इसमें लकड़ी के सभी प्रकार के फर्नीचर के साथ ही लोहे के लॉकर बनाने का भी काम सिखाया जा रहा है। कोरोना संक्रमण के दौरान जहां पर पूरे देश में आर्थिक गतिविधियां बंद थीं, वहीं जेल की इस कार्यशाला में बंदियों ने कोविड गाइडलाइन का पालन करते हुए एक करोड़ से अधिक का फर्नीचर बना डाला।
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यह फर्नीचर हाईकोर्ट के अलावा प्रदेश के जिला जेलों में भेजा गया है। प्रभारी जेल डीआईजी इलाहाबाद मंडल पीएन पाण्डेय ने बताया कि बंदियों द्वारा बनाए गए फर्नीचर को बाजार में भी उतारा जाएगा। इसके लिए प्रदर्शनी या किसी तरह का आयोजन न करके वह सीधे व्यापारियों से संपर्क कर उन्हें आपूर्ति की जाएगी।
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बंदी बनाते है जजों के बैठने की गवर्नर चेयर

उच्च न्यायालय में न्यायमूर्तियों के बैठने के लिए गवर्नर चेयर का भी यहां पर निर्माण होता है। प्रशिक्षक दशरथ प्रसाद ने बताया कि पूरे प्रदेश की अदालतों व हाईकोर्ट के लिए गवर्नर चेयर का निर्माण यहां के बंदी  करते हैं। साथ ही जिला न्यायालय के फर्नीचर की आपूर्ति भी यहां से की जाती है।

 

बंदियों से आप भी बनवा सकते है फर्नीचर

यदि आप भी जेल में बंद बंदियों से अपने फर्नीचर बनवाना चाहते हैं तो जेल प्रशासन से संपर्क किया जा सकता है। इसके लिए आपको फर्नीचर निर्माण की रकम के साथ ही अपनी मनचाही लकड़ी देने की भी सुविधा दी गई है। बंदियों की आय को बढ़ाने के उद्देश्य से अब यह व्यवस्था आम जनों केलिए भी खोल दी गई है। 

 

नए बंदियों को भी बनाया जा रहा है हुनरमंद

जेल में कार्यशाला में नए बंदियों को भी यहां हो रहे कार्यों में हुनरमंद किया जा रहा है। कार्यशाला में सजायाफ्ता बंदियों से काम कराया जाता है, लेकिन जोे बंदी यह काम सीखना चाहते है. वह इस कार्यशाला में फर्नीचर निर्माण का कार्य सीखकर अपने आपको हुुनरमंद बना सकते है। इस कार्यशाला का उद्देश्य यह है कि जेल से रिहा होने के बाद बंदी न केवल स्वावलंबी हो सके, बल्कि वह समाज की मुख्य धारा से भी जुड़ कर सम्मानजनक जीवन जी सके।

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