फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Durga puja 2021: Eco friendly Mother Durga to be worshipped at Pandals in Prayagraj this time

Durga puja 2021 : संगमनगरी के पंडालों में विराजेंगी इको फ्रेंडली दुर्गा प्रतिमाएं

Sat, 09 Oct 2021 10:39 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 09 Oct 2021 10:39 PM IST
विज्ञापन
Durga puja 2021: Eco friendly Mother Durga to be worshipped at Pandals in Prayagraj this time
durga puja - फोटो : पीटीआई
शारदीय नवरात्रि में दुर्गा पूजा महोत्सव की शुरुआत सोमवार से होगी। संगमनगरी में दुर्गा पूजा को लेकर तैयारियां जोरशोर से चल रही है। पंडालों की तैयारी से लेकर मूर्तिकार मां महिषासुर मर्दिनी की प्रतिमाओं को अंतिम रूप दे चुके हैं। इस बार तीन से लेकर छह फिट तक की प्रतिमाएं पंडालों में विराजेंगी। संगमनगरी में इस बार पंडालों में इको फ्रेंडली दुर्गा प्रतिमाओं की प्रतिष्ठापना होगी। 
विज्ञापन


प्रदूषण से बचने से लिए प्रतिमाओं से निर्माण से लेकर सजावट तक रासायनिक रंगों का इस्तेमाल नहीं किया गया है। गंगा की मिट्टी से तैयार इन प्रतिमाओं पर हल्दी-चंदन के अलावा फूलों के रस से तैयार रंग शोभायमान होंगे। प्रतिमाओं को जहां अंतिम रूप दे दिया गया है, वहीं पंडाल भी आकर ले चुके हैं। सोमवार को सविधि मंत्रोच्चार के साथ पंडालों में मां महिषासुर मर्दिनी की प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा के साथ ही महोत्सव आरंभ हो जाएगा। 
विज्ञापन


कोलकाता से आए कारीगरों ने अस बार एक से बढ़कर एक प्रतिमाएं तैयार की हैं। कहीं कमलदल पर तो कहीं डोली पर सवार मां दुर्गा के दर्शन होंगे। कोलकाता से आए मूर्तिकार गौतम पॉल ने इस बार दो सौ से अधिक छोटी-बड़ी प्रतिमाएं गढ़ी हैं। खास बात यह है कि इस बार की प्रतिमाएं इको फ्रेंडली होंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


शारदीय नवरात्रि महोत्सव के लिए बनाई गईं प्रतिमाओं में रासायनिक रंगों का इस्तेमाल नहीं किया गया है। गंगा की मिट्टी के तैयार यह प्रतिमाएं प्रदूषण से रहित हैं। इससे पर्यावरण पर किसी भी तरह का प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। गौतम बताते हैं कि प्रतिमाओं को रंगने के लिए फूलों के अलावा हल्दी,चंदन, गेरू, खड़िया, पीली मिट्टी, चावल के अलावा आरारोट का इस्तेमाल किया गया है। कर्नलगंज के मूर्तिकार तापस पॉल ने भी इस बार सौ से अधिक दुर्गा प्रतिमाओं को तैयार किया है।

तापस बताते हैं कि दो वर्ष से कोरोना संकट की वजह से प्रतिमाओं पर आश्रित सैकड़ों परिवारों की जीविका पर खतरे के बादल मंडरा रहे थे। इस बार थोड़ी राहत मिली है। बावजूद इसके सीमित आर्डर ही लिए गए हैं। उधर, पंडालों को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है। लूकरगंज पार्क के अलावा मुट्ठीगंज, करेली, अतरसुइया, कटघर में भी दुर्गा पूजा महोत्सव के लिए पंडाल बनकर तैयार हो गए हैं।


अतरसुइया और झूंसी के पंडालों में पहुंची प्रतिमाएं
शनिवार की शाम को ही प्रतिमाएं पंडालों में पहुंचाई जाने लगीं। बैरहना और कर्नलगंज के मूर्तिकला केंद्रों से झूंसी, अतरसुइया, करेली के अलावा कई पूजा कमेटियों की ओर से प्रतिमाओं को ले जाया गया। वहां पूजा कमेटी के पदाधिकारी प्रतिमाओं का शृंगार करेंगे। मां के स्वरूपों को अस्त्र-शस्त्र धारण कराया जाएगा। ब्यूरो
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed