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जुझारू तेवर से डिप्टी सीएम बने केशव
राहुल शर्मा, अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 19 Mar 2017 01:46 AM IST
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केशव
- फोटो : अलीगढ़/ब्यूरो
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यूपी विधानसभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज करने के बाद पीएम मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने फूलपुर के सांसद और प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य को शानदार तोहफा दिया है। पार्टी नेताओं को उम्मीद थी कि केशव प्रसाद मौर्य को सीएम बनाया जाएगा, लेकिन डिप्टी सीएम का दायित्व सौंपना भी उनके समर्थक एक बड़ी उपलब्धि मान रहे है। पार्टी के जमीनी नेता मानते हैं कि केशव की सांगठनिक क्षमता और जुझारूपन के अतिरिक्त राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) से उनकी करीबी ने ही उन्हें उपमुख्यमंत्री की कुर्सी दिलाई। अब डिप्टी सीएम की कुर्सी मिलने के बाद उनके सामने वर्ष 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में वर्ष 2014 जैसी सफलता दिलाने की चुनौती रहेगी।
लोकसभा चुनाव में विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वर्गीय अशोक सिंहल की प्रबल संस्तुति पर भाजपा ने केशव प्रसाद मौर्य को फूलपुर से प्रत्याशी बनाया। दरअसल केशव मौर्य स्वर्गीय सिंहल के बेहद करीबी थे। उन्होंने इस चुनाव में पहली बार पूर्व पीएम जवाहर लाल नेहरू की संसदीय सीट से कमल खिलवा दिया। यहां से वे रिकार्ड 3.40 लाख मतों से जीते। इसके पूर्व 2012 में केशव प्रसाद ने सपा की लहर में भी सिराथू विधानसभा सीट भाजपा के खाते में डाली। इस बार उनके प्रदेश अध्यक्ष होते हुए उन्होंने पार्टी को यूपी में अभूतपूर्व सफलता पाई। यह पहला मौका था कि जब बीजेपी और उसके सहयोगी दलों ने प्रदेश में 325 सीटें जीती।
चुनाव जीतने के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि केशव को राष्ट्रीय नेतृत्व इनाम देगा। केशव की राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में भी खासी पैठ है। प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से वे लगातार संघ के प्रमुख नेताओं के संपर्क में रहे। विधानसभा चुनाव का रिजल्ट आने के बाद संघ का भी स्पष्ट संदेश था कि उन्हें सरकार में अहम जिम्मेदारी दी जाए। ऐसा हुआ भी। आरएसएस, विहिप, बजरंग दल और भाजपा के कई दायित्वों को सफलतापूर्वक निर्वहन करने के ट्रैक रिकार्ड ने भी उनकी दावेदारी पुख्ता करने में मदद की। उन्होंने राम जन्म भूमि और गो रक्षा के साथ हिंदू हित में किए गए गई आंदोलनों में शिरकत की। इसके लिए वे जेल भी गए। पार्टी को पिछड़े वर्ग से इस नेता से ढेरों उम्मीदें हैं।
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पिछले साल प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद केशव प्रसाद मौर्य ने इलाहाबाद में पहली बार पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक करवाई। बैठक संपन्न होने के बाद पीएम मोदी ने केशव की पीठ भी थपथपाई थी। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद केशव प्रसाद मौर्य इसके पूर्व विहिप, आरएसएस आदि में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। भाजपा काशी क्षेत्र के अध्यक्ष, भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश महामंत्री भी रह चुके हैं। आरएसएस के बाल स्वयं सेवक से शुरुआत के बाद उन्होंने विहिप के प्रांत संगठन मंत्री का दायित्व निभाया। वह भाजपा के राष्ट्रीय परिषद में भी रह चुके हैं।
केशव के नाम कई जिम्मेदारियां
0 सदस्य, राष्ट्रीय कार्यसमिति भाजपा।
0 सदस्य, नमामि गंगे राष्ट्रीय कार्य समिति।
0 सदस्य, कर सलाहकार समिति।
0 सदस्य, मानव संसाधन विकास मंत्रालय।
0 सदस्य, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान काउंसिल।
0 सदस्य, लोकसभा की सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति।
0 सदस्य, ग्रामीण विकास, पंचायती राज पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय।
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लोकसभा चुनाव में विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वर्गीय अशोक सिंहल की प्रबल संस्तुति पर भाजपा ने केशव प्रसाद मौर्य को फूलपुर से प्रत्याशी बनाया। दरअसल केशव मौर्य स्वर्गीय सिंहल के बेहद करीबी थे। उन्होंने इस चुनाव में पहली बार पूर्व पीएम जवाहर लाल नेहरू की संसदीय सीट से कमल खिलवा दिया। यहां से वे रिकार्ड 3.40 लाख मतों से जीते। इसके पूर्व 2012 में केशव प्रसाद ने सपा की लहर में भी सिराथू विधानसभा सीट भाजपा के खाते में डाली। इस बार उनके प्रदेश अध्यक्ष होते हुए उन्होंने पार्टी को यूपी में अभूतपूर्व सफलता पाई। यह पहला मौका था कि जब बीजेपी और उसके सहयोगी दलों ने प्रदेश में 325 सीटें जीती।
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चुनाव जीतने के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि केशव को राष्ट्रीय नेतृत्व इनाम देगा। केशव की राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में भी खासी पैठ है। प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से वे लगातार संघ के प्रमुख नेताओं के संपर्क में रहे। विधानसभा चुनाव का रिजल्ट आने के बाद संघ का भी स्पष्ट संदेश था कि उन्हें सरकार में अहम जिम्मेदारी दी जाए। ऐसा हुआ भी। आरएसएस, विहिप, बजरंग दल और भाजपा के कई दायित्वों को सफलतापूर्वक निर्वहन करने के ट्रैक रिकार्ड ने भी उनकी दावेदारी पुख्ता करने में मदद की। उन्होंने राम जन्म भूमि और गो रक्षा के साथ हिंदू हित में किए गए गई आंदोलनों में शिरकत की। इसके लिए वे जेल भी गए। पार्टी को पिछड़े वर्ग से इस नेता से ढेरों उम्मीदें हैं।
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पिछले साल प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद केशव प्रसाद मौर्य ने इलाहाबाद में पहली बार पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक करवाई। बैठक संपन्न होने के बाद पीएम मोदी ने केशव की पीठ भी थपथपाई थी। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद केशव प्रसाद मौर्य इसके पूर्व विहिप, आरएसएस आदि में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। भाजपा काशी क्षेत्र के अध्यक्ष, भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश महामंत्री भी रह चुके हैं। आरएसएस के बाल स्वयं सेवक से शुरुआत के बाद उन्होंने विहिप के प्रांत संगठन मंत्री का दायित्व निभाया। वह भाजपा के राष्ट्रीय परिषद में भी रह चुके हैं।
केशव के नाम कई जिम्मेदारियां
0 सदस्य, राष्ट्रीय कार्यसमिति भाजपा।
0 सदस्य, नमामि गंगे राष्ट्रीय कार्य समिति।
0 सदस्य, कर सलाहकार समिति।
0 सदस्य, मानव संसाधन विकास मंत्रालय।
0 सदस्य, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान काउंसिल।
0 सदस्य, लोकसभा की सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति।
0 सदस्य, ग्रामीण विकास, पंचायती राज पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय।