नकली इंजेक्शन : पेशेवर अपराधियों जैसा काम, व्हाट्सएप पर ऑर्डर... और तुरंत डिलीवरी
- पांच से छह घंटे के भीतर ग्राहक को उपलब्ध करा देते थे इंजेक्शन
विस्तार
कानपुर में गिरफ्तार किए गए शहर के रहने वाले पंकज अग्रवाल व मधुरम बाजपेयी वैसे तो मेडिकल स्टोर संचालक थे। लेकिन नकली दवाओं की तस्करी के गोरखधंधे के लिए वह बिल्कुल पेशेवर अपराधियों जैसा तरीका अपनाते थे। लाखों का खेल वह मिनटों में पूरी तरह से ऑनलाइन ही करते थे। इंजेक्शन के लिए वह व्हाट्सएप पर ऑर्डर लेते थे और पांच से छह घंटों में तुरंत डिलीवरी कर रुपये ले लेते थे।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, हिरासत में दोनों से पूछताछ में खुलासा हुआ कि नकली इंजेक्शन की तस्करी के खेल के लिए व्हाट्सएप का सहारा लिया जाता था। कानपुर में पकड़ा गया ज्ञानेश शर्मा मेडिकल रिप्रजेंटेटिव था और वह न सिर्फ कानपुर बल्कि वाराणसी, प्रयागराज समेत कई शहरों में अस्पतालों, डॉक्टरों व दवा की दुकानों के संपर्क में था। शहर में रहने वाला मधुरम उसका दोस्त था और उसके ही जरिये ज्ञानेश नैनी निवासी पंकज के संपर्क में आया। पंकज की नैनी में मिर्जापुर हाईवे पर कई साल पुरानी दवा की दुकान है जिससे कि उसके कई बड़े थोक विक्रेताओं से संबंध थे।
ब्लैक फंगस के केस बढने पर एम्फोनेक्स इंजेक्शन की मांग बढ़ी तो तीनों ने मौके का फायदा उठाने की सोची। इसके बाद ही तीनों नकली इंजेक्शन की तस्करी में जुट गए और ज्ञानेश ने इस काम में अपने साथी प्रकाश को भी शामिल कर लिया। सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ में दोनों मेडिकल स्टोर संचालकों ने बताया कि वह व्हाट्सएप ग्रुप पर दवाएं, इंजेक्शन उपलब्ध कराने संबंधी मैसेज डालते थे। जैसे ही कोई जरूरतमंद संपर्क करता, तो उसे जल्द इंजेक्शन, दवाएं उपलब्ध कराने की बात कहते थे। इसके लिए कुछ रुपये एडवांस में ऑनलाइन पेमेंट के जरिये भी ले लेते थे। शेष रकम डिलीवरी के बाद देने की बात तय होती थी। इसके बाद पांच से छह घंटे में इंजेक्शन, दवाएं उपलब्ध कराकर रुपये ले लेते थे।
डिलीवरी से लेकर डीलिंग तक, सबका तय था काम
नकली इंजेक्शन की तस्करी करने वाले गिरोह में डिलीवरी से लेकर डीलिंग तक सबका अलग-अलग काम तय था। जरूरतमंद से डील पंकज तय करता था और रेट के लिए वह व्हाट्सएप कॉलिंग का सहारा लेता था। इसके बाद लखनऊ से इंजेक्शन लेकर बताई गई जगह तक पहुंचाने का काम भी वही करवाता था। डिलीवरी का काम ज्ञानेश व प्रकाश करते थे। इसके बाद इंजेक्शन के लिए वसूले गए रुपये ज्ञानेश से लेकर पंकज तक पहुंचाने का काम मधुरम के जिम्मे था।
मधुरम के खिलाफ कालाबाजारी की भी हुई थी शिकायत
कालिंदीपुरम निवासी मधुरम हिम्मतगंज में बाजपेई मेडिकल स्टोर चलाता है और उसके खिलाफ पहले भी दवाओं की कालाबाजारी की शिकायत हुई थी। सूत्रों का कहना है कि अप्रैल में पुलिस अफसरों को ट्विटर पर शिकायत मिली थी कि मधुरम के मेडिकल स्टोर से दवाओं-इंजेक्शन की कालाबाजारी चल रही है। इस पर खुल्दाबाद पुलिस के साथ ही एसडीएम भी मौके पर जांच को पहुंचे थे। लेकिन पुख्ता सबूत न मिलने के कारण कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। हालांकि कोविड गाइडलाइन के उल्लंघन मेें उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया था। उसके पिता प्रयागराज विकास प्राधिकरण में नियुक्त हैं।