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घाटों के साथ डंप बालू का भी होगा सर्वे
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Dumm Silica Survey.
- फोटो : AU
घाटों के साथ डंप बालू का भी होगा सर्वे
जिला प्रशासन ने अवैध खनन की निगरानी के साथ डंप बालू का सर्वे कराने का भी निर्णय लिया है। बालू डंप होने की पुलिस रिपोर्ट तथा लगातार शिकायतों के बाद प्रशासन जागा। इसके लिए टीम बना दी गई है।
करेली क्षेत्र के अंतर्गत शहरी क्षेत्र में यमुना नदी के आधा दर्जन से अधिक घाटों पर अवैध खनन की शिकायत है। घाटों के किनारे अरबों रुपये की बालू डंप है। खास यह कि निरीक्षण में इस पर कोई हक जताने वाला भी सामने नहीं आया। पुलिस की ओर से यह रिपोर्ट डीएम को भेज दी गई है। इसके अलावा करछना के कंजासा, घूरपुर में एक दर्जन से अधिक घाटों पर अवैध खनन की शिकायत है। प्रशासन की नजर से बचाने के लिए बालू माफिया ने घाटों से पांच से 10 किलोमीटर की दूरी तक बालू डंप कर रखी है। इसकी शिकायत भी प्रशासन के पास पहुंची है। ऐसे में घाटों के साथ डंप बालू का भी सर्वे कराया जाएगा। इसके लिए प्रशासन, पुलिस, आरटीओ, खनन विभाग की संयुक्त टीम बनाई गई है। प्रभारी खान अधिकारी डॉ.विजय कुमार मौर्य का कहना है कि खनन के साथ अवैध तरीके से बालू डंप होने की भी शिकायत है, इसलिए हर स्तर पर सर्वे कराने की योजना बनाई गई है।
खनन पर रोक, डंप बालू पर निर्भर होगा कारोबार
अफसरों की कार्रवाई तथा एनजीटी की सख्ती के बाद जिले में खनन पर रोक लगा दी गई है। हालांकि, नियमानुसार एक जुलाई से खनन बंद हो जाना चाहिए। बारिश में अवैध खनन भी काफी हद तक रुक जाएगा। ऐसे में डंप बालू पर ही कारोबार निर्भर होगा, इसलिए रोक के बाद खनन माफिया उल्टे और सक्रिय हो गए हैं। अवैध खनन के साथ बालू डंप की जा रही है। बालू महंगी भी होगी।
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...लेकिन नहीं शुरू हो सका सर्वे
बालू माफिया ने यमुना, टोंस आदि नदियों में अवैध खनन के लिए अपने स्तर पर कई घाट विकसित कर रखे हैं। इसके अलावा कई घाटों के पट्टों को लेकर विवाद खड़ा है। खनन विभाग की ओर से घाटों के सर्वे का निर्णय लिया गया है। यह काम बारिश से पहले हो जाना है। अन्यथा, घाट डूब जाएंगे। इसके विपरीत अभी सर्वे शुरू भी नहीं हुआ है। इसके पीछे खनन माफिया के दबाव को कारण बताया जा रहा है। हालांकि, प्रभारी खान अधिकारी का कहना है कि एक-दो दिनों में सर्वे शुरू हो जाएगा।
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जिला प्रशासन ने अवैध खनन की निगरानी के साथ डंप बालू का सर्वे कराने का भी निर्णय लिया है। बालू डंप होने की पुलिस रिपोर्ट तथा लगातार शिकायतों के बाद प्रशासन जागा। इसके लिए टीम बना दी गई है।
करेली क्षेत्र के अंतर्गत शहरी क्षेत्र में यमुना नदी के आधा दर्जन से अधिक घाटों पर अवैध खनन की शिकायत है। घाटों के किनारे अरबों रुपये की बालू डंप है। खास यह कि निरीक्षण में इस पर कोई हक जताने वाला भी सामने नहीं आया। पुलिस की ओर से यह रिपोर्ट डीएम को भेज दी गई है। इसके अलावा करछना के कंजासा, घूरपुर में एक दर्जन से अधिक घाटों पर अवैध खनन की शिकायत है। प्रशासन की नजर से बचाने के लिए बालू माफिया ने घाटों से पांच से 10 किलोमीटर की दूरी तक बालू डंप कर रखी है। इसकी शिकायत भी प्रशासन के पास पहुंची है। ऐसे में घाटों के साथ डंप बालू का भी सर्वे कराया जाएगा। इसके लिए प्रशासन, पुलिस, आरटीओ, खनन विभाग की संयुक्त टीम बनाई गई है। प्रभारी खान अधिकारी डॉ.विजय कुमार मौर्य का कहना है कि खनन के साथ अवैध तरीके से बालू डंप होने की भी शिकायत है, इसलिए हर स्तर पर सर्वे कराने की योजना बनाई गई है।
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खनन पर रोक, डंप बालू पर निर्भर होगा कारोबार
अफसरों की कार्रवाई तथा एनजीटी की सख्ती के बाद जिले में खनन पर रोक लगा दी गई है। हालांकि, नियमानुसार एक जुलाई से खनन बंद हो जाना चाहिए। बारिश में अवैध खनन भी काफी हद तक रुक जाएगा। ऐसे में डंप बालू पर ही कारोबार निर्भर होगा, इसलिए रोक के बाद खनन माफिया उल्टे और सक्रिय हो गए हैं। अवैध खनन के साथ बालू डंप की जा रही है। बालू महंगी भी होगी।
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...लेकिन नहीं शुरू हो सका सर्वे
बालू माफिया ने यमुना, टोंस आदि नदियों में अवैध खनन के लिए अपने स्तर पर कई घाट विकसित कर रखे हैं। इसके अलावा कई घाटों के पट्टों को लेकर विवाद खड़ा है। खनन विभाग की ओर से घाटों के सर्वे का निर्णय लिया गया है। यह काम बारिश से पहले हो जाना है। अन्यथा, घाट डूब जाएंगे। इसके विपरीत अभी सर्वे शुरू भी नहीं हुआ है। इसके पीछे खनन माफिया के दबाव को कारण बताया जा रहा है। हालांकि, प्रभारी खान अधिकारी का कहना है कि एक-दो दिनों में सर्वे शुरू हो जाएगा।