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Prayagraj News: धूल में दफन स्वच्छता का सपना
Mon, 03 Nov 2025 01:08 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Mon, 03 Nov 2025 01:08 AM IST
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मीरगंज। आदर्श नगर पंचायत मीरगंज का एमआरएफ (मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी) सेंटर खुद कूड़ा होता जा रहा है। वर्ष 2019 में 33 लाख 67 हजार रुपये की लागत से तैयार केंद्र में रखीं मशीनें धूल फांक रही हैं। दूसरी ओर कस्बे में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं।
विभिन्न स्रोतों से इकट्ठा किए गए कचरे को अलग-अलग करने और उसमें से पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को छांटने के मकसद से इस सेंटर का निर्माण कराया गया। केंद्र की क्षमता पांच टन कूड़ा प्रतिदिन निस्तारित करने की है। उद्घाटन के बाद से अब तक यहां एक टन कूड़ा भी प्रोसेस नहीं हुआ है।
कन्वेयर बेल्ट, क्रशर व कंपेक्टर सहित अन्य उपकरण पर धूल की परत जमा है। कई में जंग भी लगने लगी है। चिंताजनक बात यह है कि केंद्र के अंदर और बाहर इकठ्ठा कचरे के ढेर में आग लगाई जा रही है।
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एमआरएफ केंद्र संचालित न होने का असर पूरे कस्बे में दिखता है। बलुपुरा रोड पर कचरे के ऊंचे-ऊंचे ढेर हैं। यहां बदबू की वजह से लोगों को नाक और मुंह ढककर गुजरना होता है। छुट्टा पशुओं के जमावड़े की वजह से हादसे का भी खतरा रहता है। नगर पंचायत को कचरे से निकलने वाले लोहे, प्लास्टिक और अन्य पुनर्चक्रण योग्य वस्तुओं की बिक्री से हर माह हजारों रुपये की आय होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक एक रुपये का राजस्व भी कोष में जमा नहीं हुआ।
स्थानीय नागरिक यशपाल सिंह, मुकेश कुमार, सुनील, मोहित ने बताया कि नगर पंचायत की उदासीनता के कारण यह परियोजना भ्रष्टाचार और अकर्मण्यता का प्रतीक बन गई है। इस मामले में ईओ प्रियंका से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।
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विभिन्न स्रोतों से इकट्ठा किए गए कचरे को अलग-अलग करने और उसमें से पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को छांटने के मकसद से इस सेंटर का निर्माण कराया गया। केंद्र की क्षमता पांच टन कूड़ा प्रतिदिन निस्तारित करने की है। उद्घाटन के बाद से अब तक यहां एक टन कूड़ा भी प्रोसेस नहीं हुआ है।
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कन्वेयर बेल्ट, क्रशर व कंपेक्टर सहित अन्य उपकरण पर धूल की परत जमा है। कई में जंग भी लगने लगी है। चिंताजनक बात यह है कि केंद्र के अंदर और बाहर इकठ्ठा कचरे के ढेर में आग लगाई जा रही है।
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एमआरएफ केंद्र संचालित न होने का असर पूरे कस्बे में दिखता है। बलुपुरा रोड पर कचरे के ऊंचे-ऊंचे ढेर हैं। यहां बदबू की वजह से लोगों को नाक और मुंह ढककर गुजरना होता है। छुट्टा पशुओं के जमावड़े की वजह से हादसे का भी खतरा रहता है। नगर पंचायत को कचरे से निकलने वाले लोहे, प्लास्टिक और अन्य पुनर्चक्रण योग्य वस्तुओं की बिक्री से हर माह हजारों रुपये की आय होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक एक रुपये का राजस्व भी कोष में जमा नहीं हुआ।
स्थानीय नागरिक यशपाल सिंह, मुकेश कुमार, सुनील, मोहित ने बताया कि नगर पंचायत की उदासीनता के कारण यह परियोजना भ्रष्टाचार और अकर्मण्यता का प्रतीक बन गई है। इस मामले में ईओ प्रियंका से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।