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घृणास्पद नहीं है डॉ. कफील खान का भाषण: इलाहाबाद हाईकोर्ट

Wed, 02 Sep 2020 10:10 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 02 Sep 2020 10:10 PM IST
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Dr. Kafeel Khan's speech is not abominable: Allahabad High Court
जेल से रिहा हुए डॉक्टर कफील खान - फोटो : अमर उजाला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वीकार किया गया है कि डा. कफील खान पर उनके जिस भाषण को आधार बनाकर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की गई उस भाषण में ऐसा कुछ नहीं है जिसे घृणास्पद माना जा सके। या उससे ऐसा कुछ प्रतीत नहीं होता कि भाषण में लोक शांति को भंग करने वाली बात कही गई है।
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मंगलवार को डा. कफील खान पर रासुका रद्द करने का आदेश सुनाते हुए मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति एसडी सिंह की पीठ ने साफ किया कि वास्तव में पूरा भाषण पढ़ने के बाद इसमें घृणा या हिंसा फैलाने वाली कोई बात सामने नहीं आई है। सरकार ने इसी भाषण के आधार पर कफील पर रासुका लगाई थी।
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Dr. Kafeel Khan's speech is not abominable: Allahabad High Court
डॉ कफील खान (फाइल) - फोटो : अमर उजाला

जिलाधिकारी अलीगढ़ के आदेश में कफील के भाषण को दो समुदायों के बीच घृणा फैलाने और लोक शांति को भंग करने वाला माना गया है। कोर्ट का कहना था कि इसमें संदेह नहीं है कि भाषण के जिन अंशों पर कार्रवाई की गई है वह डा. कफील के भाषण का हिस्सा थी। मगर वह अलग संदर्भ में हैं। निश्चित रूप से वक्ता ने सरकार की नीतियों का विरोध किया है और ऐसा करते समय उन्होंने कुछ उदाहरण भी दिए हैं। मगर इससे ऐसा कुछ जाहिर नहीं होता जिससे उनकी निरुद्धि की आवश्यकता हो। 

Dr. Kafeel Khan's speech is not abominable: Allahabad High Court
जेल से रिहा हुए डॉक्टर कफील खान - फोटो : अमर उजाला

कोर्ट ने कहा कि पूरा भाषण से प्रथम दृष्टया यह नहीं पता चलता कि भाषण घृणा या हिंसा फैलाने के लिए दिया गया था। इसमें कही भी अलीगढ़ शहर की शांति भंग करने वाली बात है। भाषण में राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए नागरिकों का अह़वान किया गया है। कोर्ट ने कहा ऐसा लगता है डीएम अलीगढ़ ने भाषण के कुछ हिस्सों को पढ़ा और उन्हीं को आधार बनाकर कार्रवाई की है।

उन्होंने पूरे वक्तव्य की मूल भावना को नजरअंदाज किया है। कोर्ट ने कहा कि पूरा भाषण मुकदमे के ट्रायल का विषय है जो कफील खान के विरुद्ध लंबित है इसलिए हमारा इस पर अधिक टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। हमारी नाराजगी सिर्फ इतनी है कि क्या एक वास्तविक व्यक्ति को इस प्रकार से निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए जिस पर प्रकार से डीएम अलीगढ़ पहुंचे हैं। 

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Dr. Kafeel Khan's speech is not abominable: Allahabad High Court
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

भाषण के दो माह बाद क्यों लगाई रासुका

फैसले में कोर्ट ने सवाल किया है कि कफील खान ने 12 दिसंबर 2019 को भाषण दिया था। उस वक्त अलीगढ़ प्रशासन को यह  क्यों यह क्यों नहीं लगा कि यह भाषण उनकी निरुद्धि के लिए पर्याप्त है। डीएम के आदेश में इस बारे में कुछ नहीं कहा गया कि 12 दिसंबर 2019 से लेकर 12 फरवरी 2020 के बीच कफील खान द्वारा लोक शांति को भंग करने वाला एक भी प्रयास किया गया। सिर्फ सीजेएम अलीगढ़ द्वारा उनकी जमानत मंजूर करने के बाद अलीगढ़ प्रशासन को रासुका लगाने का ध्यान आया।
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