उपलब्धि : वैज्ञानिक मिशन पर अंटार्कटिका निकलीं इलाहाबाद विवि की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. देवसमृद्धि
डॉ. अरोरा इस वैज्ञानिक मिशन के दौरान अंटार्कटिका में मौजूद पहाड़ियों के पत्थरों पर अध्ययन करेंगी, ताकि पता लगाया जा सके कि इन पत्थरों का निर्माण किन परिस्थितियों और कितने तापमान में हुआ। डॉ. अरोरा वहां से पत्थर लेकर आएंगी और इसके बाद एनसीईएमपी में इस पर शोध किया जाएगा।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के सेंटर ऑफ एक्सपेरिमेंटल मिनेरोलॉजी एंड पेट्रोललॉजी (एनसीईएमपी) की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. देवसमृद्धि अरोरा को अंटार्कटिका में वैज्ञानिक मिशन के लिए चुना गया है। पहली बार इविवि से किसी शिक्षक को इस मिशन के लिए चुना गया है। भारत सरकार ने अंटार्कटिका में वैज्ञानिक मिशन के लिए देश भर के वैज्ञानिकों से प्रोजेक्ट मांगे थे। डॉ. अरोरा ने भी अपना प्रोजेक्ट तैयार कर भेजा था। एनसीईएमपी के निदेशक प्रो. जेेके पति ने बताया कि कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा दिया और वैज्ञानिक मिशन के लिए इस प्रोजेक्ट को चुन लिया गया।
डॉ. अरोरा इस वैज्ञानिक मिशन के दौरान अंटार्कटिका में मौजूद पहाड़ियों के पत्थरों पर अध्ययन करेंगी, ताकि पता लगाया जा सके कि इन पत्थरों का निर्माण किन परिस्थितियों और कितने तापमान में हुआ। डॉ. अरोरा वहां से पत्थर लेकर आएंगी और इसके बाद एनसीईएमपी में इस पर शोध किया जाएगा। प्रो. जेके पति ने बताया कि इविवि के किसी वैज्ञानिक का इस मिशन पर जाना विश्वविद्यालय के लिए बड़ी उपलब्धि है।
डॉ. अरोरा सात साल पहले भी अंटार्कटिका गईं थी। तब वह दिल्ली विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहीं थी। डॉ. अरोरा शनिवार को गोवा के लिए रवाना हो गईं। डॉ. आरोरा दो दिन बाद गोवा से केपटाउन (साउथ अफ्रीका) जाएंगी और वहां से पानी के जहाज से अंटार्कटिका के लिए निकेलंगी। अंटार्कटिका में हेलीकॉप्टर से उस जगह पहुंचेंगी, जहां इस मौसम में बर्फ नहीं गिरती, ताकि पहाड़ियों से पत्थरों को निकाला जा सके।