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डॉ. बंसल हत्याकांड के आरोपी की जमानत खारज
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डॉ. एके बंसल हत्याकांड में दिलीप मिश्रा की जमानत खारिज
प्रयागराज। जिला न्यायालय ने डॉ. एके बंसल हत्याकांड में आरोपी दिलीप मिश्रा की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। यह आदेश जिला जज नलिन कुमार श्रीवास्तव ने डीजीसी गुलाब चंद्र अग्रहरि और बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं को सुन कर दिया है।
घटना 12 जनवरी 2017 की कीडगंज थाने की है। वादी प्रवीण कुमार बंसल ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनके छोटे भाई अश्विनी कुमार बंसल (एके बंसल) रोज की तरह ओपीडी में मरीज देख रहे थे। तभी अज्ञात व्यक्ति ने आकर डॉ. बंसल की कनपटी पर गोली मार दी थी। अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी।
इस प्रकरण में अभियुक्त बनाए गए पूर्व ब्लाक प्रमुख दिलीप मिश्रा की ओर से प्रस्तुत जमानत अर्जी पर कोर्ट में सुनवाई की गई। बचाव पक्ष की ओर से तर्क दिया गया कि प्रथम सूचना रिपोर्ट में अभियुक्त नामजद नहीं है। अभियुक्त का नाम दौरान विवेचना सहअभियुक्त के बयान के आधार पर प्रकाश में आया है। अन्य कोई साक्ष्य नहीं है। घटना में उसकी कोई भूमिका नहीं है। वह राजनीतिक व्यक्ति है और राजनीतिक रंजिश के कारण उसे झूठा फंसाया गया है। जमानत प्रार्थना पत्र का विरोध करते हुए अभियोजन द्वारा कहा गया कि अभियुक्त के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल हो चुका है। शहर के मशहूर डॉक्टर बंसल की हत्या में अभियुक्त की भूमिका है और उसके खिलाफ 45 मुकदमों का पूर्व आपराधिक इतिहास है। अपराध की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
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प्रयागराज। जिला न्यायालय ने डॉ. एके बंसल हत्याकांड में आरोपी दिलीप मिश्रा की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। यह आदेश जिला जज नलिन कुमार श्रीवास्तव ने डीजीसी गुलाब चंद्र अग्रहरि और बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं को सुन कर दिया है।
घटना 12 जनवरी 2017 की कीडगंज थाने की है। वादी प्रवीण कुमार बंसल ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनके छोटे भाई अश्विनी कुमार बंसल (एके बंसल) रोज की तरह ओपीडी में मरीज देख रहे थे। तभी अज्ञात व्यक्ति ने आकर डॉ. बंसल की कनपटी पर गोली मार दी थी। अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी।
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इस प्रकरण में अभियुक्त बनाए गए पूर्व ब्लाक प्रमुख दिलीप मिश्रा की ओर से प्रस्तुत जमानत अर्जी पर कोर्ट में सुनवाई की गई। बचाव पक्ष की ओर से तर्क दिया गया कि प्रथम सूचना रिपोर्ट में अभियुक्त नामजद नहीं है। अभियुक्त का नाम दौरान विवेचना सहअभियुक्त के बयान के आधार पर प्रकाश में आया है। अन्य कोई साक्ष्य नहीं है। घटना में उसकी कोई भूमिका नहीं है। वह राजनीतिक व्यक्ति है और राजनीतिक रंजिश के कारण उसे झूठा फंसाया गया है। जमानत प्रार्थना पत्र का विरोध करते हुए अभियोजन द्वारा कहा गया कि अभियुक्त के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल हो चुका है। शहर के मशहूर डॉक्टर बंसल की हत्या में अभियुक्त की भूमिका है और उसके खिलाफ 45 मुकदमों का पूर्व आपराधिक इतिहास है। अपराध की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
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