{"_id":"5b81b74942c79246300f636f","slug":"dr-anand-shankar-singh-new-registrar-of-eviwi","type":"story","status":"publish","title_hn":"डॉ. आनंद शंकर सिंह इविवि के नए रजिस्ट्रार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डॉ. आनंद शंकर सिंह इविवि के नए रजिस्ट्रार
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 26 Aug 2018 01:46 AM IST
विज्ञापन
इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आनंद शंकर सिंह इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के नए रजिस्ट्रार होंगे। उनका इस पद पर पांच साल के लिए चयन हुआ है। शनिवार को इविवि की कार्यपरिषद की बैठक में रजिस्ट्रार के साथ परीक्षा नियंत्रक और वित्त अधिकारी (एफओ) पद पर हुई भर्ती का लिफाफा खोला गया। एफओ के पद पर सीएमपी डिग्री कॉलेज के कॉमर्स विभाग के शिक्षक डॉ. सुनील कांत मिश्र और परीक्षा नियंत्रक के पद पर अब तक कार्यवाहक एफओ रहे प्रो. एनके शुक्ला का चयन हुआ।
इन तीनों पदों के लिए इविवि में शनिवार को ही इंटरव्यू हुए और इसमें कुल 26 अभ्यर्थियों ने भागीदारी की। हालांकि, इंटरव्यू से पहले ही विवाद शुरू हो गया था। शासन में शिकायत की गई थी कि इंटरव्यू में शामिल हो रहे दो अभ्यर्थियों का चयन पहले से तय है और इंटरव्यू सिर्फ दिखावे के लिए है। शासन के निर्देश पर एसटीएफ ने जांच भी शुरू कर दी। डॉ. आनंद शंकर सिंह ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज के प्राचार्य हैं और इंडियन कौंसिल एंड हिस्टोरिकल रिसर्च के सदस्य सचिव भी रह चुके हैं। वह प्राचीन इतिहास के शिक्षक हैं। डॉ. सुनीलकांत मिश्र सीएमपी डिग्री कॉलेज में कॉमर्स के शिक्षक के साथ ऑक्टा के अध्यक्ष भी हैं।
वहीं, प्रो. एनके श्ुाक्ला इविवि के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन विभाग में शिक्षक हैं। हालांकि, यूजीसी की टीम ने कार्यवाहक एफओ के पद पर इनकी नियुक्ति पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि इस पद पर कॉमर्स से जुड़े किसी शिक्षक को नियुक्त किया जाना चाहिए। कार्यवाहक एफओ से पहले वह कार्यवाहक रजिस्ट्रार के पद पर थे। शनिवार को भर्ती का लिफाफा खुलने के बाद यूजीसी टीम की आपत्ति से उठे विवाद पर तो विराम लग गया, लेकिन पहले से चयन तय होने के आरोपों को लेकर जो विवाद उत्पन्न हुआ था, वह थमता नजर नहीं आ रहा।
विज्ञापन
ज्वाइनिंग से पहले लेनी होगी छुट्टी
इविवि में रजिस्ट्रार, परीक्षा नियंत्रक और एफओ पद पर चयनित हुए शिक्षकों को ज्वाइनिंग से पहले अपने-अपने संस्थान से छुट्टी लेनी होगी। संस्थान से छुट्टी स्वीकृत होने के बाद ही तीनों शिक्षक नया पदभार ग्रहण करेंगे।
आर्यकन्या महिला महाविद्यालय में परास्नातक के कुछ पाठ्यक्रमों में सह शिक्षा प्रणाली के तहत दस छात्रों का प्रवेश लिया गया था। इनमें से छह छात्र कॉलेज छोड़कर दूसरे महाविद्यालयों में चले गए जबकि चार छात्र वहां पढ़ रहे हैं। कार्य परिषद की बैठक में तय हुआ कि आर्यकन्या में पीजी में केवल छात्राएं पढ़ेंगी। चारों छात्रों को ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज में प्रवेश दिया जाएगा और उनकी फीस ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज को ट्रांसफर कर दी जाएगी। आर्यकन्या में इस सत्र से बीकॉम में भी सह शिक्षा प्राणाली लागू की गई है लेकिन कॉलेज ने बीकॉम में किसी छात्र को प्रवेश नहीं दिया और इस पाठ्यक्रम में केवल छात्राएं पढ़ रही हैं। ऐसे में चार छात्रों के जाने के बाद कॉलेज में केवल छात्राएं रह जाएंगी।
इविवि के संघटक महाविद्यालयों में सेल्फ फाइनेंस कोर्स को लेकर मनमानी की जा रही है। हर जगह एक ही पाठ्यक्रम के लिए अलग-अलग फीस निर्धारित है। नियमित शिक्षकों से सेल्फ फाइनेंस के पाठ्यक्रम पढ़वाए जाते हैं और अतिरिक्त भुगतान नहीं किया जाता। सेल्फ फाइनेंस कोर्स के लिए अलग से नियुक्त शिक्षकों का वेतन भी हर कॉलेज में अलग-अलग है। इसमें एकरूपता लाने के लिए पिछले दिनों हुई एकेडमिक कौंसिल की बैठक में कमेटी के गठन का निर्णय लिया गया था। कार्य परिषद की बैठक में इस पर अंतिम मुहर लगा दी गई। कमेटी सभी कॉलेजों में सेल्फ फाइनेंस के पाठ्यक्रमों की फीस और शिक्षकों का वेतन निर्धारित करेगी। साथ ही जांच करेगी कि अतिरिक्त भुगतान के रूप में कॉलेजों ने जो धनराशि बचा ली, उसका किस मद में उपयोग किया गया।
विज्ञापन
इन तीनों पदों के लिए इविवि में शनिवार को ही इंटरव्यू हुए और इसमें कुल 26 अभ्यर्थियों ने भागीदारी की। हालांकि, इंटरव्यू से पहले ही विवाद शुरू हो गया था। शासन में शिकायत की गई थी कि इंटरव्यू में शामिल हो रहे दो अभ्यर्थियों का चयन पहले से तय है और इंटरव्यू सिर्फ दिखावे के लिए है। शासन के निर्देश पर एसटीएफ ने जांच भी शुरू कर दी। डॉ. आनंद शंकर सिंह ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज के प्राचार्य हैं और इंडियन कौंसिल एंड हिस्टोरिकल रिसर्च के सदस्य सचिव भी रह चुके हैं। वह प्राचीन इतिहास के शिक्षक हैं। डॉ. सुनीलकांत मिश्र सीएमपी डिग्री कॉलेज में कॉमर्स के शिक्षक के साथ ऑक्टा के अध्यक्ष भी हैं।
विज्ञापन
वहीं, प्रो. एनके श्ुाक्ला इविवि के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन विभाग में शिक्षक हैं। हालांकि, यूजीसी की टीम ने कार्यवाहक एफओ के पद पर इनकी नियुक्ति पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि इस पद पर कॉमर्स से जुड़े किसी शिक्षक को नियुक्त किया जाना चाहिए। कार्यवाहक एफओ से पहले वह कार्यवाहक रजिस्ट्रार के पद पर थे। शनिवार को भर्ती का लिफाफा खुलने के बाद यूजीसी टीम की आपत्ति से उठे विवाद पर तो विराम लग गया, लेकिन पहले से चयन तय होने के आरोपों को लेकर जो विवाद उत्पन्न हुआ था, वह थमता नजर नहीं आ रहा।
विज्ञापन
ज्वाइनिंग से पहले लेनी होगी छुट्टी
इविवि में रजिस्ट्रार, परीक्षा नियंत्रक और एफओ पद पर चयनित हुए शिक्षकों को ज्वाइनिंग से पहले अपने-अपने संस्थान से छुट्टी लेनी होगी। संस्थान से छुट्टी स्वीकृत होने के बाद ही तीनों शिक्षक नया पदभार ग्रहण करेंगे।
आर्यकन्या महिला महाविद्यालय में परास्नातक के कुछ पाठ्यक्रमों में सह शिक्षा प्रणाली के तहत दस छात्रों का प्रवेश लिया गया था। इनमें से छह छात्र कॉलेज छोड़कर दूसरे महाविद्यालयों में चले गए जबकि चार छात्र वहां पढ़ रहे हैं। कार्य परिषद की बैठक में तय हुआ कि आर्यकन्या में पीजी में केवल छात्राएं पढ़ेंगी। चारों छात्रों को ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज में प्रवेश दिया जाएगा और उनकी फीस ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज को ट्रांसफर कर दी जाएगी। आर्यकन्या में इस सत्र से बीकॉम में भी सह शिक्षा प्राणाली लागू की गई है लेकिन कॉलेज ने बीकॉम में किसी छात्र को प्रवेश नहीं दिया और इस पाठ्यक्रम में केवल छात्राएं पढ़ रही हैं। ऐसे में चार छात्रों के जाने के बाद कॉलेज में केवल छात्राएं रह जाएंगी।
इविवि के संघटक महाविद्यालयों में सेल्फ फाइनेंस कोर्स को लेकर मनमानी की जा रही है। हर जगह एक ही पाठ्यक्रम के लिए अलग-अलग फीस निर्धारित है। नियमित शिक्षकों से सेल्फ फाइनेंस के पाठ्यक्रम पढ़वाए जाते हैं और अतिरिक्त भुगतान नहीं किया जाता। सेल्फ फाइनेंस कोर्स के लिए अलग से नियुक्त शिक्षकों का वेतन भी हर कॉलेज में अलग-अलग है। इसमें एकरूपता लाने के लिए पिछले दिनों हुई एकेडमिक कौंसिल की बैठक में कमेटी के गठन का निर्णय लिया गया था। कार्य परिषद की बैठक में इस पर अंतिम मुहर लगा दी गई। कमेटी सभी कॉलेजों में सेल्फ फाइनेंस के पाठ्यक्रमों की फीस और शिक्षकों का वेतन निर्धारित करेगी। साथ ही जांच करेगी कि अतिरिक्त भुगतान के रूप में कॉलेजों ने जो धनराशि बचा ली, उसका किस मद में उपयोग किया गया।