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Prayagraj : डाक्टरों को देना होगा ब्याज के साथ इलाज खर्च और पांच लाख जुर्माना, उपभोक्ता आयोग ने सुनाया फैसला

Wed, 06 Aug 2025 04:17 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 06 Aug 2025 04:17 PM IST
सार

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने मंगलवार को गलत इलाज व लापरवाही पूर्वक इलाज को सेवा में कमी मानते हुए दो डॉक्टरों पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

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Doctors will have to pay treatment expenses with interest and a fine of Rs 5 lakh
अदालत - फोटो : ANI

विस्तार

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने मंगलवार को गलत इलाज व लापरवाही पूर्वक इलाज को सेवा में कमी मानते हुए दो डॉक्टरों पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके साथ प्रतिवादी के बेटी के इलाज में खर्च एक लाख 21 हजार 70 रुपये आठ फीसदी ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश दिया है। साथ ही वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये देने को कहा है। यह आदेश आयोग के अध्यक्ष मोहम्मद इब्राहिम व सदस्य प्रकाश चंद्र पांडेय ने राजापुर निवासी राजेंद्र कुमार पांडेय की अर्जी पर दिया है।

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परिवादी राजेंद्र ने जिला उपभोक्ता आयोग में 30 जनवरी 2008 को वाद दाखिल किया था। आरोप लगाया था कि 6/8 एल्गिन रोड, सिविल लाइंस स्थित अस्पताल के निदेशक और राजापुर में प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर की लापरवाही से उनकी 15 वर्षीय बेटी दिव्यांग हो गई। राजेंद्र ने बताया कि अचानक एक दिन बेटी के पैर में तेज दर्द शुरू हो गया। इसके बाद वे राजापुर में एक डॉक्टर के क्लीनिक पर ले गए। 

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जांच के बाद डॉक्टर ने कहा कि पैर में पस आ गया है और आपरेशन करना होगा। डॉक्टर की सलाह पर बेटी को सिविल लाइंस, एल्गिन रोड स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया। वहां दो डॉक्टरों ने मिलकर बेटी का ऑपरेशन किया। इसके बाद भी बेटी को आराम नहीं मिला। दुबारा डॉक्टर को दिखाया तो बताया गया कि बेटी के पैर में बोन टीबी हो गई है। दवा खिलाते रहिए ठीक हो जाएगी। यह कहते हुए डिस्चार्ज कर दिया। इलाज में लगभग एक लाख 21 हजार 70 रुपये खर्च हो गए। इसके बाद भी बेटी की हालत बिगड़ती चली गई।
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इसके बाद दूसरे अस्पताल में दिखाया तो पता चला कि आपरेशन में लापरवाही के चलते पैर की हड्डियां गल गईं हैं। हड्डी गलने की वजह से बेटी के बाएं पैर में छोटापन आ गया। बेटी स्थायी रूप से 50 प्रतिशत दिव्यांग हो गई। आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद प्रतिवादी के पुत्री के इलाज में खर्च एक लाख 21 हजार 70 रुपये आठ प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश दिया और पांच लाख रुपये जुर्माना भी लगाया।



 

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