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diwali 2021 : दीपावली पर पूजे जाएंगे इंद्र-कुबेर,लक्ष्मी-गणेश, जानें घर और प्रतिष्ठान में पूजन का शुभ मुहुर्त
Wed, 03 Nov 2021 10:30 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 03 Nov 2021 10:30 PM IST
सार
शुभ मुहूर्त
गृहस्थों के लिए: प्रदोष काल में शाम 5.52 से रात 7.49 बजे तक पूजन सर्वश्रेष्ठ और तांत्रिकों के लिए महानिशीथ काल: मध्यरात्रि स्थिर लग्न 12.20 से 2.36 बजे के बीच सर्वोत्तम है।
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Prayagraj News : बुधवार को फुलझड़ी जलाकर छोटी दिवाली मनाता परिवार।
- फोटो : प्रयागराज
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विस्तार
कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या पर बृहस्पतिवार को लक्ष्मी-गणेश और इंद्र-कुबेर की पूजा-आराधना की जाएगी। जहां गृहस्थ तथा कारोबारी मुहूर्त और राशि के अनुसार दीपपर्व मनाएंगे, वहीं तांत्रिक विधि-विधान से साधना करेंगे। अमावस्या तिथि चार नवंबर की भोर में 5.31 बजे से आरंभ होकर रात में 03.32 बजे तक रहेगी। अमावस्या पर प्रदोष काल में अतिउत्तम योग मिल रहा है। सुबह 8.12 बजे तक चित्रा नक्षत्र, जबकि रात तक स्वाति नक्षत्र रहेगा। वहीं दिन में 12.42 बजे तक प्रीति योग, फिर आयुष्मान योग रहेगा।
ज्योतिर्विद दिवाकर त्रिपाठी ‘पूर्वांचली’ के मुताबिक दीपावली प्रदोष काल एवं महानिशीथ काल व्यापिनी अमावस्या में मनेगी। प्रदोष काल का महत्व गृहस्थों एवं व्यापारियों और महानिशीथ काल का महत्व तांत्रिकों के लिए उपयुक्त है। लक्ष्मी पूजन को ‘श्रीं’ या ‘ऊं श्री महालक्ष्म्यै नम:’ मंत्र का जाप फलदायी रहेगा। पूरी रात लक्ष्मी के दोनों ओर एक-एक दीप जलाकर उसे अन्य दीये से ऐसे ढंकें ताकि काजल उतर आए। यही काजल सुबह लगाना चाहिए।
औद्योगिक प्रतिष्ठानों के लिए
स्थिर कुंभ लग्न में चौघड़िया के साथ पूजन में दिन में 1.14 बजे से 2.46 बजे तक
प्रदोष काल स्थिर वृष लग्न में चौघड़िया संग पूजन शाम 5.52 बजे से 7.49 बजे तक
दूसरी स्थिर सिंह लग्न में चौघड़िया के साथ पूजन रात 11.49 से 1.30 बजे तक
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ज्योतिर्विद दिवाकर त्रिपाठी ‘पूर्वांचली’ के मुताबिक दीपावली प्रदोष काल एवं महानिशीथ काल व्यापिनी अमावस्या में मनेगी। प्रदोष काल का महत्व गृहस्थों एवं व्यापारियों और महानिशीथ काल का महत्व तांत्रिकों के लिए उपयुक्त है। लक्ष्मी पूजन को ‘श्रीं’ या ‘ऊं श्री महालक्ष्म्यै नम:’ मंत्र का जाप फलदायी रहेगा। पूरी रात लक्ष्मी के दोनों ओर एक-एक दीप जलाकर उसे अन्य दीये से ऐसे ढंकें ताकि काजल उतर आए। यही काजल सुबह लगाना चाहिए।
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औद्योगिक प्रतिष्ठानों के लिए
स्थिर कुंभ लग्न में चौघड़िया के साथ पूजन में दिन में 1.14 बजे से 2.46 बजे तक
प्रदोष काल स्थिर वृष लग्न में चौघड़िया संग पूजन शाम 5.52 बजे से 7.49 बजे तक
दूसरी स्थिर सिंह लग्न में चौघड़िया के साथ पूजन रात 11.49 से 1.30 बजे तक
नरक चतुर्दशी पर जले दीप, बहुरे घूरे के दिन
पंचदीपपर्व के दूसरे दिन बुधवार को नरक चतुर्दशी पर छोटी दीपावली मनाई गई। अंजनिपुत्र हनुमान की पूजा-आराधना के अतिरिक्त वंश वृद्धि,आयुष्य तथा मंगलकामना के लिए भीष्म के निमित्त तर्पण भी किया गया। मंत्रों के बीच पूजा स्थल पर अक्षत, पुष्प आदि अर्पित करते हुए लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाओं को आसन दिया जाएगा।
वहीं परंपरा के मुताबिक नरक चतुर्दशी पर भी यम की प्रसन्नता के लिए अन्न के ढेर पर दीप जलाए गए। साथ ही घूरे के भी दिन बहुरे। शहरों में जहां घर की नाली, वहीं गांवों में नाली और घूर पर भी दीप जलाए गए।
अन्नकूट पर मुंशी राम प्रसाद की बगिया में भोग
अन्नकूट पर पांच नवंबर को मुट्ठीगंज में मुंशीराम की बगिया स्थित श्री राधा कृष्णा मंदिर में अन्नकूट का भोग लगेगा। संयोजक कुमार नारायण के मुताबिक पूजन के बाद भोग का भंडारा भी आयोजित किया जाएगा।
पंचदीपपर्व के दूसरे दिन बुधवार को नरक चतुर्दशी पर छोटी दीपावली मनाई गई। अंजनिपुत्र हनुमान की पूजा-आराधना के अतिरिक्त वंश वृद्धि,आयुष्य तथा मंगलकामना के लिए भीष्म के निमित्त तर्पण भी किया गया। मंत्रों के बीच पूजा स्थल पर अक्षत, पुष्प आदि अर्पित करते हुए लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाओं को आसन दिया जाएगा।
वहीं परंपरा के मुताबिक नरक चतुर्दशी पर भी यम की प्रसन्नता के लिए अन्न के ढेर पर दीप जलाए गए। साथ ही घूरे के भी दिन बहुरे। शहरों में जहां घर की नाली, वहीं गांवों में नाली और घूर पर भी दीप जलाए गए।
अन्नकूट पर मुंशी राम प्रसाद की बगिया में भोग
अन्नकूट पर पांच नवंबर को मुट्ठीगंज में मुंशीराम की बगिया स्थित श्री राधा कृष्णा मंदिर में अन्नकूट का भोग लगेगा। संयोजक कुमार नारायण के मुताबिक पूजन के बाद भोग का भंडारा भी आयोजित किया जाएगा।