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विवादित अधिग्रहीत भूमि का नहीं दिया जा सकता मुआवजा

Wed, 24 Jul 2019 08:27 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 24 Jul 2019 08:27 PM IST
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disputed acquired land's compensation can't be given
विवादित अधिग्रहीत भूमि का नहीं दिया जा सकता मुआवजा
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प्रयागराज। हाईकोर्ट ने कहा है कि अधिगृहीत भूमि के स्वामित्व और कब्जे को लेकर यदि विवाद है तो मुआवजे का भुगतान विवाद तय होने तक नहीं किया जा सकता। भुगतान का आदेश देने के बजाए जिलाधिकारी को विवाद की जानकारी होने पर प्रकरण अदालत में भेजना चाहिए। इसी के साथ कोर्ट ने मुआवजे के भुगतान का अपर जिलाधिकारी गाजियाबाद 13 जून 18 का आदेश रद्द कर दिया है। कोर्ट ने और दोनों पक्षों को सुनकर छह सप्ताह में आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने निर्णय होने तक किसी भी पक्ष को मुआवजे के भुगतान पर रोक लगा दी है और कहा है कि धनराशि किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में जमा कर दी जाए।

यह आदेश न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल तथा न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने गाजियाबाद के भूर गढ़ी (डासना)की लज्जावती और तीन अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। याचिका पर अधिवक्ता कमल सिंह यादव ने बहस की। याची का कहना था कि सड़क चौड़ीकरण के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के लिए जमीन अधिगृहीत की गई। याचीगण प्लॉट संख्या 3088 एम, 0.3800 हेक्टेयर के भूमिधर और मालिक हैं। राजस्व अभिलेखों में उनका नाम दर्ज है। खतौनी के आधार पर याचीगण ने आपत्ति की थी मगर अपर जिलाधिकारी ने सह खातेदार को मुआवजे के भुगतान का आदेश दे दिया । इस आदेश को याचिका में चुनौती दी गई है। याचीगण का कहना है कि भूमि का बंटवारा नहीं हुआ है। और वह भूमि पर काबिज हैं। ऐसे में मुआवजा देने के बजाय राष्ट्रिय राजमार्ग अधिनियम की धारा 3 एच (4) के तहत जिला जज को संदर्भित करना चाहिए।
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