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Prayagraj News: डिस्पेंसरी पर जेनरिक की जगह ब्रांडेड दवा के बिल बनाने का आरोप
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सीजीएचएस की प्रीतमनगर स्थित केंद्रांचल डिस्पेंसरी द्वारा जेनरिक की जगह बिल में ब्रांडेड दवाओं की कीमत को शामिल करने का मामला डेढ़ माह बाद भी शांत होता नहीं दिख रहा है। डिस्पेंसरी पर दवा की आपूर्ति में भारी अनियमितता का आरोप हाईकोर्ट के अधिवक्ता ओम प्रकाश सिंह ने लगाया है। उन्होंने इस पूरी मामले की शिकायत सीजीएचएस के अतिरिक्त सचिव और नई दिल्ली के महानिदेशक के साथ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से पत्र के माध्यम से की है।
वहीं, दूसरी तरफ सीजीएचएस की उपनिदेशक ऋतु अग्रवाल ने सभी आरोपों को गलत बताया है। अधिवक्ता ओम प्रकाश सिंह ने स्वास्थ्य मंत्री से की गई शिकायत में खुद के द्वारा इकट्ठा किए गए साक्ष्य भी प्रस्तुत किए हैं। इसमें दिखाया गया है कि किस प्रकार जेनरिक दवाओं की बिलिंग ब्रांडेड दवाओं की कीमत पर की जा रही है। उनका आरोप है कि जो दवाएं डिस्पेंसरी पर दी जाती हैं। वह जेनेरिक व सस्ते मूल्य की होती हैं, जबकि अधिकारी सरकार से ब्रांडेड दवाओं की दर से भुगतान करा रहे हैं।
उनका यह भी आरोप है कि इस मामले में जब उन्होंने सीजीएचएस की उपनिदेशक से बात करनी चाही तो वह टाल-मटोल करने लगीं। वहीं, दूसरी तरफ सीजीएचएस की उपनिदेशक ऋतु अग्रवाल का कहना है कि सरकार द्वारा जारी किए गए अधिकृत पोर्टल से जुड़ीं मान्यता प्राप्त कंपनियों से दवाएं ली जाती हैं। दवा की बिलिंग गलती से हो गई थी, जिसे तुरंत सुधार लिया गया था। इसके अलावा जो बिल गलती से तैयार हो गया था, उसे सरकार को भेजने से पहले ही ठीक कर लिया गया था।
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वहीं, दूसरी तरफ सीजीएचएस की उपनिदेशक ऋतु अग्रवाल ने सभी आरोपों को गलत बताया है। अधिवक्ता ओम प्रकाश सिंह ने स्वास्थ्य मंत्री से की गई शिकायत में खुद के द्वारा इकट्ठा किए गए साक्ष्य भी प्रस्तुत किए हैं। इसमें दिखाया गया है कि किस प्रकार जेनरिक दवाओं की बिलिंग ब्रांडेड दवाओं की कीमत पर की जा रही है। उनका आरोप है कि जो दवाएं डिस्पेंसरी पर दी जाती हैं। वह जेनेरिक व सस्ते मूल्य की होती हैं, जबकि अधिकारी सरकार से ब्रांडेड दवाओं की दर से भुगतान करा रहे हैं।
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उनका यह भी आरोप है कि इस मामले में जब उन्होंने सीजीएचएस की उपनिदेशक से बात करनी चाही तो वह टाल-मटोल करने लगीं। वहीं, दूसरी तरफ सीजीएचएस की उपनिदेशक ऋतु अग्रवाल का कहना है कि सरकार द्वारा जारी किए गए अधिकृत पोर्टल से जुड़ीं मान्यता प्राप्त कंपनियों से दवाएं ली जाती हैं। दवा की बिलिंग गलती से हो गई थी, जिसे तुरंत सुधार लिया गया था। इसके अलावा जो बिल गलती से तैयार हो गया था, उसे सरकार को भेजने से पहले ही ठीक कर लिया गया था।
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