खुलासा : ग्राम उजाला योजना के तहत कंपनी ने बांटे थे बल्ब, डिवाइस नहीं डाटा मीटर लगे थे होल्डर में
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जनपद व कौशाम्बी में सिम लगे होल्डर व बल्ब ग्राम उजाला योजना के तहत एक निजी कंपनी ने बांटे थे। बांटे गए होल्डर में कोई डिवाइस नहीं बल्कि डाटा मीटर लगा हुआ था। मीटर के जरिए स्टोर किए गए डाटा को सेंट्रल सर्वर तक पहुंचाने के लिए मोबाइल नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाता है और इसी वजह से इसमें सिम लगा था। यह खुलासा पुलिस की जांच में हुआ है। कंपनी के प्रतिनिधियों ने भी पुलिस को इस संबंध में जानकाीर दी है। जिसके बाद हिरासत में लिए गए बल्ब वितरण करने वाले पांचों युवकों को पुलिस ने छोड़ दिया है।
कौशाम्बी के भरवारी, करारी और जनपद के मेजा में बल्ब व सिम लगे होल्डर बांटे जाने की जानकारी सामने आने के बाद हड़कंप मच गया था। स्थानीय लोग सकते में थे और तो पुलिस अफसरों के भी कान खड़े हो गए थे। उधर जानकारी मिलते ही पुलिस व खुफिया एजेंसियों ने भी जांच शुरू कर दी थी। कौशाम्बी में एसटीएफ की भी टीम पहुंच गई थी। जिसके बाद पांच संदिग्ध युवकों को हिरासत में ले लिया था। लेकिन गहनता से की गई जांच पड़ताल में मामला कुछ और ही निकला।
पता चला कि बल्ब और होल्डर एक निजी कंपनी की ओर से ग्राम उजाला योजना के तहत बांटे गए थे। इस योजना के तहत बांटे गए बल्ब व होल्डर में डाटा मीटर लगे हैं जिनका उपयोग डाटा स्टोर करने के लिए किया जाता है। यह डाटा बिजली की खपत व बल्ब उपभोग की समयावधि से संबंधित होता है। इस डाटा को वायरलेस तकनीक से मोबाइल नेटवर्क के जरिए सेंट्रल सर्वर तक भेजा जाता है और इसीलिए इसमें 13 डिजिट वाला एम-टु-एम सिम लगाया जाता है।
यह जानकारी खुद कंपनी के प्रतिनिधियों की ओर से पुलिस को दी गई। जिसके बाद कौशाम्बी पुलिस ने हिरासत में लिए गए पांचों युवकों को छोड़ दिया। कौशाम्बी एसपी राधेश्याम विश्वकर्मा ने बताया कि कंपनी प्रतिनिधियों की ओर से जानकारी देने व संबंधित दस्तावेज दिखाने के बाद युवकों को छोड़ दिया गया है। लेकिन एहतियातन इस मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों के माध्यम से शासन को भेजी जाएगी।
उधर कंपनी प्रतिनिधियों का दावा है कि डाटा मीटर युक्त बल्ब व होल्डर 90 दिन की अवधि के लिए लगाए जाते हैं और फिर इन्हें हटा लिया जाता है। दावा यह भी है कि डाटा मीटर युक्त बल्ब व होल्डर लगाए जाने से पहले ग्राहकों की सहमति भी ली जाती है। ग्राम उजाला योजना ‘उजाला’ योजना का ही ग्रामीण क्षेत्रों में विस्तार है। जिसके तहत उपभोक्ताओं को तीन साल की वारंटी के साथ ही सात व 12 वाट के बल्ब उपलब्ध कराए जाते हैं।