{"_id":"57d9ab6d4f1c1bb53dd48e3c","slug":"differences-in-the-top-leadership-of-the-local-sp-leaders-dither","type":"story","status":"publish","title_hn":"सपा के शीर्ष नेतृत्व में मतभेद से स्थानीय नेताओं में बेचैनी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सपा के शीर्ष नेतृत्व में मतभेद से स्थानीय नेताओं में बेचैनी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 15 Sep 2016 01:41 AM IST
विज्ञापन
समाजवादी पार्टी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इलाहाबाद। समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में मतभेद सार्वजनिक होने के बाद जिले के कार्यकर्ता भी असमंजस में हैं। उनकी समझ में नहीं आ रहा है कि ऐसे वक्त पर किस धड़े से जुड़ना चाहिए। पार्टी में इस उठापटक से बेचैन स्थानीय नेता और कार्यकर्ता बुधवार को लखनऊ से दिल्ली तक पल-पल की खबरों पर नजरें गड़ाए रहे। झगड़ा परिवार में होने के कारण पार्टी का कोई भी स्थानीय नेता कुछ बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। हालांकि उन्हें विश्वास है कि पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव सब संभाल लेंगे।
जिले की 12 विधानसभा सीटों में से आठ पर सपा का कब्जा है। इसमें से प्रतापपुर की विधायक विजमा यादव, जिलाध्यक्ष कृष्ण मूर्ति सिंह यादव, महानगर अध्यक्ष सैयद इफ्तेखार हुसैन, पूर्व जिलाध्यक्ष पंधारी यादव, युवजन सभा के जिलाध्यक्ष संदीप यादव, अभिषेक यादव से मुख्यमंत्री की नजदीकी मानी जाती है। सांसद कुंवर रेवती रमण सिंह और एमएलसी वासुदेव यादव के सीएम अखिलेश, पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव और शिवपाल सिंह यादव से मधुर संबंध हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, सीएमपी डिग्री कॉलेज, एडीसी, श्यामा प्रसाद मुखर्जी डिग्री कॉलेजों में काफी छात्रों के साथ कई छात्रनेता सीएम को पसंद करते है। कई मौकों पर अखिलेश के इलाहाबाद आगमन पर छात्रों के उत्साह से यह बात सामने भी आ चुकी है।
ऐसे में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में मतभेद ने स्थानीय विधायकों, नेताओं और कार्यकर्ताओं की बेचैनी बढ़ा दी है। बुधवार को जार्जटाउन एवं चौक स्थित पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं का जमावड़ा रहा तो इविवि समेत डिग्री कॉलेजों में पार्टी से जुड़े छात्रों और छात्रनेताओं में इस घटना को लेकर बेचैनी रही। बड़े स्थानीय नेता लखनऊ में पार्टी से जुड़े परिचितों से पल-पल की खबर लेने में जुटे रहे।
विज्ञापन
व्हाट्सएप पर खलनायक बने अमर सिंह
इलाहाबाद। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाने और उसके बाद सीएम द्वारा मंत्री शिवपाल सिंह यादव से महत्वपूर्ण पद वापस लेने के बाद सपा के स्थानीय व्हाट्सएप ग्रुप में भी खलबली मची हुई है। ग्रुप में जुड़े यूजर एक-दूसरे को मैसेज भेजकर यादव परिवार में फूट के लिए अमर सिंह को जिम्मेदार मान रहे हैं। मैसेज में कहा जा रहा है कि अमर सिंह ने पार्टी और परिवार में फूट डाली, क्योंकि अखिलेश उन्हें भाव नहीं दे रहे। इसकी वजह से अमर सिंह की दुकानदारी रफ्तार नहीं पकड़ रही है। ऐसे में उन्होंने अखिलेश और शिवपाल के बीच मतभेद पैदाकर सियासी संकट पैदा कर दिया है।
विज्ञापन
जिले की 12 विधानसभा सीटों में से आठ पर सपा का कब्जा है। इसमें से प्रतापपुर की विधायक विजमा यादव, जिलाध्यक्ष कृष्ण मूर्ति सिंह यादव, महानगर अध्यक्ष सैयद इफ्तेखार हुसैन, पूर्व जिलाध्यक्ष पंधारी यादव, युवजन सभा के जिलाध्यक्ष संदीप यादव, अभिषेक यादव से मुख्यमंत्री की नजदीकी मानी जाती है। सांसद कुंवर रेवती रमण सिंह और एमएलसी वासुदेव यादव के सीएम अखिलेश, पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव और शिवपाल सिंह यादव से मधुर संबंध हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, सीएमपी डिग्री कॉलेज, एडीसी, श्यामा प्रसाद मुखर्जी डिग्री कॉलेजों में काफी छात्रों के साथ कई छात्रनेता सीएम को पसंद करते है। कई मौकों पर अखिलेश के इलाहाबाद आगमन पर छात्रों के उत्साह से यह बात सामने भी आ चुकी है।
विज्ञापन
ऐसे में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में मतभेद ने स्थानीय विधायकों, नेताओं और कार्यकर्ताओं की बेचैनी बढ़ा दी है। बुधवार को जार्जटाउन एवं चौक स्थित पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं का जमावड़ा रहा तो इविवि समेत डिग्री कॉलेजों में पार्टी से जुड़े छात्रों और छात्रनेताओं में इस घटना को लेकर बेचैनी रही। बड़े स्थानीय नेता लखनऊ में पार्टी से जुड़े परिचितों से पल-पल की खबर लेने में जुटे रहे।
विज्ञापन
व्हाट्सएप पर खलनायक बने अमर सिंह
इलाहाबाद। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाने और उसके बाद सीएम द्वारा मंत्री शिवपाल सिंह यादव से महत्वपूर्ण पद वापस लेने के बाद सपा के स्थानीय व्हाट्सएप ग्रुप में भी खलबली मची हुई है। ग्रुप में जुड़े यूजर एक-दूसरे को मैसेज भेजकर यादव परिवार में फूट के लिए अमर सिंह को जिम्मेदार मान रहे हैं। मैसेज में कहा जा रहा है कि अमर सिंह ने पार्टी और परिवार में फूट डाली, क्योंकि अखिलेश उन्हें भाव नहीं दे रहे। इसकी वजह से अमर सिंह की दुकानदारी रफ्तार नहीं पकड़ रही है। ऐसे में उन्होंने अखिलेश और शिवपाल के बीच मतभेद पैदाकर सियासी संकट पैदा कर दिया है।