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हाईकोर्ट ने कहा : डीजीपी सुनिश्चित करें कि पुलिस अधिकारी रंगीन कपड़ों में नहीं, वर्दी में न्यायालय आएं

Sat, 21 Jun 2025 03:29 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 21 Jun 2025 03:29 PM IST
सार

कोर्ट ने रजिस्ट्रार अनुपालन को निर्देश दिया कि आदेश की कॉपी डीजीपी व प्रमुख सचिव (विधि), उत्तर प्रदेश सरकार को भेजी जाए, ताकि इस पर गंभीरता से अमल हो सके। यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह की एकलपीठ ने शकील अहमद की जमानत अर्जी पर दिया।

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DGP should ensure that police officers come to the court in uniform and not in colorful clothes
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सुनिश्चित करें कि पुलिस अधिकारी न्यायालय में पेश हों तो निर्धारित वर्दी में आएं, रंगीन कपड़ों में नहीं। कोर्ट ने कहा कि अदालती कार्यवाही में किसी भी पुलिस अधिकारी का सिविल कपड़े पहन कर उपस्थित होना न्यायालय की मर्यादा का उल्लंघन है। कोर्ट ने रजिस्ट्रार अनुपालन को निर्देश दिया कि आदेश की कॉपी डीजीपी व प्रमुख सचिव (विधि), उत्तर प्रदेश सरकार को भेजी जाए, ताकि इस पर गंभीरता से अमल हो सके। यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह की एकलपीठ ने शकील अहमद की जमानत अर्जी पर दिया।

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मिर्जापुर में याची को भ्रष्टाचार निरोधक संगठन की टीम ने पांच हजार रुपये घूस लेते हुए पकड़ लिया था। आरोप था कि याची एक मामले में जांच अधिकारी है और उसने अज्ञात में दर्ज मुकदमे में परिवादी प्रमोद कुमार का नाम शामिल न करने के लिए रुपये मांगे थे। याची 22 फरवरी 2025 से जेल में है। उसने जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की। 
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अधिवक्ता ने दलील दी कि उक्त मामले में याची जांच अधिकारी नहीं था। ऐसे में याची की ओर से रुपये मांगने का कोई कारण नहीं था। मामले में कोर्ट ने जांच अधिकारी कृष्ण मोहन राय निरीक्षक भ्रष्टाचार निवारण संगठन मिर्जापुर को केस डायरी के साथ तलब किया था। केस डायरी से कोर्ट ने पाया कि कभी याची को जांच नहीं सौंपी गई थी। इन तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने याची की सशर्त जमानत अर्जी स्वीकार कर ली।
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वहीं जांच अधिकारी कृष्ण मोहन राय निरीक्षक भ्रष्टाचार निवारण संगठन मिर्जापुर रंगीन शर्ट और पैंट पहन कर न्यायालय में हाजिर हुए। अपर शासकीय अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि जब उन्होंने जांच अधिकारी को उचित वर्दी में न आने के लिए टोका, तो वह नाराज हो गए। कोर्ट ने इसकी निंदा की और भविष्य में ऐसा नहीं करने की हिदायत दी।

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