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Prayagraj News: महफिले समां में झूमे अकीदतमंद, चढ़ाए गए अकीदत के फूल
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लालगोपालगंज के बडूपुर स्थित मजार पर चादरपोशी करते अकीदतमंद।
हजरत समी उल्ला शाह रहमतुल्लाह अलैह का दो दिवसीय सालाना उर्स शनिवार को फातेहा ख्वानी के साथ आरंभ हो गया। महफिले समां (कव्वाली) में पढ़े गए। कलाम को सुन अकीदतमंद झूम उठे। दरगाह शरीफ पर चादरपोशी कर देश और समाज की खुशहाली के लिए दुआएं मांगी गईं। विभिन्न प्रांतों से आए जायरीनों ने दरगाह पर गुलपोशी कर अपनी मुरादें पेश कीं।
बड़ूपुर में उर्स के पहले दिन से दरगाह परिसर में अकीदतमंदों का तांता लगा रहा। दूरदराज से आए जायरीनों ने बड़ी संख्या में दरगाह पर हाजिरी लगाई और मन्नतें मांगीं। उर्स के मुख्य आकर्षणों में से एक महफिले समां का आयोजन था। इसमें कव्वालों ने सूफियाना कलाम पेश कर समां बांध दिया। कव्वालों के मधुर और सुफियाना कलाम पर झूमते हुए अकीदतमंदों ने अपनी भावनाओं का खुलकर प्रदर्शन किया।
इस दौरान दरगाह शरीफ पर सैकड़ों की संख्या में चादरें चढ़ाई गईं। मौलाना शाबान ने उर्स के सभी रीति-रिवाजों को पूरी विधि-विधान के साथ अदा कराया। उनकी देखरेख में फातेहा ख्वानी, दरूद शरीफ और अन्य धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हुए। देश के विभिन्न प्रांतों से आए जायरीनों ने दरगाह पर पहुंचकर गुलपोशी की और अमन-चैन व भाईचारे की दुआएं मांगी। सज्जादानशीन अनीस अहमद फारुकी व शहंशाह हुसैन ने आए हुए सभी मेहमानों और जायरीनों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
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बताया कि यह उर्स आपसी सौहार्द और भाईचारे का संदेश देता है और हर साल बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल होने के लिए आते हैं। यहां मो. आजम फारुकी, परवेज उर्फ बब्लू, मो. उबैद शब्बीर, मो. आरिफ फारुकी, इब्ने पीर, मो. इदरीस, मो. शफीक, मो. दानिश, मो. सलीम कुरैशी आदि लोग उपस्थित रहे। उर्स में अकीदतमंदों द्वारा सामूहिक लंगर का आयोजन भी किया गया। दो दिवसीय सालाना उर्स रविवार को संपन्न होगा।
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बड़ूपुर में उर्स के पहले दिन से दरगाह परिसर में अकीदतमंदों का तांता लगा रहा। दूरदराज से आए जायरीनों ने बड़ी संख्या में दरगाह पर हाजिरी लगाई और मन्नतें मांगीं। उर्स के मुख्य आकर्षणों में से एक महफिले समां का आयोजन था। इसमें कव्वालों ने सूफियाना कलाम पेश कर समां बांध दिया। कव्वालों के मधुर और सुफियाना कलाम पर झूमते हुए अकीदतमंदों ने अपनी भावनाओं का खुलकर प्रदर्शन किया।
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इस दौरान दरगाह शरीफ पर सैकड़ों की संख्या में चादरें चढ़ाई गईं। मौलाना शाबान ने उर्स के सभी रीति-रिवाजों को पूरी विधि-विधान के साथ अदा कराया। उनकी देखरेख में फातेहा ख्वानी, दरूद शरीफ और अन्य धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हुए। देश के विभिन्न प्रांतों से आए जायरीनों ने दरगाह पर पहुंचकर गुलपोशी की और अमन-चैन व भाईचारे की दुआएं मांगी। सज्जादानशीन अनीस अहमद फारुकी व शहंशाह हुसैन ने आए हुए सभी मेहमानों और जायरीनों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
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बताया कि यह उर्स आपसी सौहार्द और भाईचारे का संदेश देता है और हर साल बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल होने के लिए आते हैं। यहां मो. आजम फारुकी, परवेज उर्फ बब्लू, मो. उबैद शब्बीर, मो. आरिफ फारुकी, इब्ने पीर, मो. इदरीस, मो. शफीक, मो. दानिश, मो. सलीम कुरैशी आदि लोग उपस्थित रहे। उर्स में अकीदतमंदों द्वारा सामूहिक लंगर का आयोजन भी किया गया। दो दिवसीय सालाना उर्स रविवार को संपन्न होगा।