अखाड़े का दंगल: रवींद्र पुरी के हस्तक्षेप के बावजूद अमर गिरि को नहीं मिली हनुमान मंदिर की जिम्मेदारी
महंत नरेंद्र गिरि की मौत का केस वापस लेने के हलफनामे पर बाघंबरी गद्दी मठ में शिष्यों के बीच विवाद दूर कराने की कोशिशों पर पानी फिरता नजर आने लगा है। स्वामी अमर गिरि और मठ के महंत बलवीर गिरि के बीच बढ़ती दूरियों की वजहें भी साफ हैं।
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अपने गुरु महंत नरेंद्र गिरि की मौत का केस वापस लेने का हलफनामा हाईकोर्ट में दाखिल करने के बाद हनुमान मंदिर के व्यवस्थापक पद से हटाए गए स्वामी अमर गिरि फिलहाल आश्वास की घुट्टी के सहारे रह गए हैं। उनको बड़े हनुमान मंदिर के व्यवस्थापक की जिम्मेदारी वापस दिलाने का आश्वासन अखाड़ा परिषद अध्यक्ष की ओर से भले ही मिला, लेकिन तीन दिन बाद भी अभी तक उनको गद्दी नहीं मिल सकी है।
महंत नरेंद्र गिरि की मौत का केस वापस लेने के हलफनामे पर बाघंबरी गद्दी मठ में शिष्यों के बीच विवाद दूर कराने की कोशिशों पर पानी फिरता नजर आने लगा है। स्वामी अमर गिरि और मठ के महंत बलवीर गिरि के बीच बढ़ती दूरियों की वजहें भी साफ हैं। महंत बलवीर गिरि नहीं चाहते कि बड़े महाराज की मौत का केस वापस लिया जाए।
उनका मानना है कि इससे दोषियों को सजा नहीं मिल पाएगी। जबकि, इसके विपरीत महंत नरेंद्र गिरि के शिष्य स्वामी अमर गिरि का कहना है कि जब उन्होंने इस घटना की लिखित तहरीर तक नहीं दी और किसी के खिलाफ एफआईआर नहीं दर्ज कराई तो वह मुकदमा लड़कर परेशान नहीं होना चाहते। इसी वजह से नाराज होकर महंत बलवीर गिरि ने हनुमान मंदिर की व्यवस्था की जिम्मेदारियां अमर गिरि से छीन ली हैं।
इस विवाद को दूर कराने आए अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रवींद्र पुरी ने अमर गिरि को बड़े हनुमान मंदिर मंदिर की व्यवस्था अमर गिरि को वापस करने का आश्वासन दिया और बलवीर गिरि से भी हामी भरवाई, लेकिन नतीजा अब तक सिफर ही रहा है। हालांकि ताजा हालात पर अमर गिरि ने कुछ दिन और इंतजार कर लेने और धीरे-धीरे सब ठीक हो जाने की जहां बात कही, वहीं महंत बलवीर गिरि ने प्रकरण पर संपर्क करने के बाद भी किसी तरह की टिप्पणी नहीं दी।