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High Court : फाइनल रिपोर्ट के बाद दाखिल जमानत निरस्तीकरण याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने पुलिस आयुक्त को किया तलब

Sun, 06 Aug 2023 02:10 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 06 Aug 2023 02:10 PM IST
सार

महिपाल ने सोनू को मिली जमानत को निरस्त कराने का प्रार्थना पत्र हाईकोर्ट में दाखिल किया था। महिपाल ने जिस नई एफआईआर के आधार पर जमानत निरस्तीकरण की प्रार्थना की थी, उसमें पुलिस फाइनल रिपोर्ट लगा चुकी थी। जमानत निरस्तीकरण याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की एकल पीठ ने आरोपी सोनू के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया।

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Deputy Police Commissioner of Noida appeared in the High Court, court reprimanded for not following the order
court - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

जिस एफआईआर पर फाइनल रिपोर्ट लग चुकी है, उसके आधार पर जमानत निरस्त कराने की दाखिल याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।कोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर के पुलिस उपायुक्त को तलब कर नाराजगी भी जताई है। यह आदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमसेरी ने दिया। मामला गौतम बुद्ध नगर के जेवर थाना क्षेत्र का है। वर्ष 2021 सौबता गांव में रहने वाले महिपाल ने बेटी की आत्महत्या का दुष्प्रेरण करने के आरोपी सोनू समेत चार लोगो के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी। पुलिस ने सोनू को जेल भेज दिया था। 2022 में हाईकोर्ट ने सोनू को जमानत दे दी थी।

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महिपाल ने सोनू को मिली जमानत को निरस्त कराने का प्रार्थना पत्र हाईकोर्ट में दाखिल किया था। महिपाल ने जिस नई एफआईआर के आधार पर जमानत निरस्तीकरण की प्रार्थना की थी, उसमें पुलिस फाइनल रिपोर्ट लगा चुकी थी। जमानत निरस्तीकरण याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की एकल पीठ ने आरोपी सोनू के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया। वारंट का तमीला स्थानीय पुलिस समय से करने में नाकाम रही थी।
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इस बाबत आरोपी सोनू के वकील ने प्रार्थना पत्र के माध्यम कोर्ट को अवगत कराया था कि आरोपी को कोर्ट के गैर जमानती वारंट की जानकारी स्थानीय पुलिस ने देर से दी, जिसके कारण आरोपी कोर्ट में हाजिर नही हो सका। इस पर न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमसेरी ने गौतम बुद्ध नगर के पुलिस आयुक्त और संबंधित थाने के पुलिस अधिकारी को तलब कर लिया था।

कोर्ट को पुलिस उपायुक्त शाद मियां खान ने बताया की कोर्ट के आदेश की तामील कराने में लापरवाही करने वाले दरोगा को निलंबित कर दिया गया है, उसके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही भी अमल में लाई जाएगी। बहस के दौरान सरकारी वकील और आरोपी के अधिवक्ता संतोष दुबे ने बताया की जिस एफआईआर के आधार पर जमानत निरस्त करने की प्रार्थना की जा रही है, उसमे विवेचना के बाद पुलिस फाइनल रिपोर्ट लगा चुकी है। यह जानने के बाद कोर्ट ने जमानत निरस्तीकरण याचिका को खारिज कर दिया।

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