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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Departmental inquiry and hearing are not required for the routine termination of an ad-hoc employee service;

प्रयागराज : तदर्थ कर्मचारी की सामान्य सेवा समाप्ति के लिए विभागीय जांच व सुनवाई जरूरी नहीं, याचिका खारिज

Mon, 26 Oct 2026 02:39 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 26 Oct 2026 02:39 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि तदर्थ या अस्थायी कर्मचारी की सेवा समाप्ति दंडात्मक प्रकृति की नहीं है तो इसके लिए विभागीय जांच और सुनवाई का अवसर देना जरूरी नहीं है।

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Departmental inquiry and hearing are not required for the routine termination of an ad-hoc employee service;
अदालत का आदेश - फोटो : istock

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि तदर्थ या अस्थायी कर्मचारी की सेवा समाप्ति दंडात्मक प्रकृति की नहीं है तो इसके लिए विभागीय जांच और सुनवाई का अवसर देना जरूरी नहीं है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने इटावा के राजकीय मूक-बधिर बालिका विद्यालय में कनिष्ठ लिपिक की सेवा समाप्ति के आदेश को वैध ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी।

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यह आदेश न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की एकल पीठ ने रविंद्र पाल सिंह की याचिका पर दिया। याची की नियुक्ति आठ मई 1991 को कनिष्ठ लिपिक के पद पर अस्थायी आधार पर हुई थी। नियुक्ति पत्र में स्पष्ट था कि उसकी सेवाएं अस्थायी हैं। 29 सितंबर 1995 को एक महीने का नोटिस देकर उसकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। इसके खिलाफ उसने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
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याची की ओर से दलील दी गई कि नियुक्ति स्थायी पद पर हुई थी और सेवा समाप्त करने से पहले उसे सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया। यह अनुच्छेद 311(2) का उल्लंघन है। इस पर राज्य सरकार ने कहा कि नियुक्ति नियमित चयन होने तक अस्थायी व्यवस्था के तहत की गई थी। उत्तर प्रदेश अस्थायी सरकारी सेवक (सेवा समाप्ति) नियमावली-1975 के तहत उसकी सेवा समाप्त करना वैध था।
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कोर्ट ने कहा कि नियुक्ति पत्र में याची की नियुक्ति तदर्थ और अस्थायी बताई गई थी। उसकी सेवा की पुष्टि का कोई आदेश भी नहीं था। ऐसे में उसे स्थायी कर्मचारी नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सेवा समाप्ति का आदेश दंडात्मक नहीं, 1975 के नियमों के तहत था। इसलिए मामले में अनुच्छेद 311(2) के प्रावधान लागू नहीं होते। कोर्ट ने 29 सितंबर 1995 से सेवा समाप्ति को वैध ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी। हालांकि, अंतरिम आदेश के तहत कर्मचारी को अब तक दिए गए वेतन की वसूली नहीं करने का आदेश दिया है।


तदर्थ कर्मचारी : उन कर्मचारियों को कहा जाता है, जिन्हें किसी विशेष कार्य, निश्चित अवधि या किसी तात्कालिक आवश्यकता को पूरा करने के लिए अस्थायी तौर पर नियुक्त किया जाता है।

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