डेंगू का प्रकोप : रोज 1000 यूनिट प्लेटलेट्स की मांग, आपूर्ति सिर्फ 350 यूनिट
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डेंगू के बढ़ते प्रकोप के बीच प्लेटलेट्स की भारी किल्लत हो गई है। शहर के पांच प्रमुख ब्लड बैंकों में रोज एक हजार से अधिक यूनिट प्लेटलेट्स की मांग है। इसके विपरीत ब्लड बैंकों से अधिकतम 350 यूनिट प्लेटलेट्स की आपूर्ति की जा रही है। प्लेटलेट्स न मिलने से डेंगू संक्रमितों के तीमारदार ब्लड बैंकों के चक्कर काट रहे हैं। शहर के सरकारी और निजी क्षेत्र के ब्लड बैंकों में प्लेटलेट्स के लिए मारामारी मची है। डेंगू संक्रमितों को छह यूनिट प्लेटलेट्स की मांग पर फिलहाल दो से चार यूनिट प्लेटलेट्स ही दी जा रही हैं। मरीजों के परिवारीजन, तीमारदार प्लेटलेट्स के लिए एक से दूसरे बल्ड बैंकों तक भटक रहे हैं।
एसआरएन, एएमए, एएनएचए ब्लड बैंकों से सर्वाधिक प्लेटलेट्स की आपूर्ति की जा रही है। एसआएन ब्लड बैंक से प्रतिदिन औसतन 70, एएमए ब्लड बैंक से 200 तथा नर्सिंग होम एसोसिएशन (एएनएचए) ब्लड बैंक से 45 यूनिट प्लेटलेट्स की आपूर्ति की जा रही है। वहीं कॉल्विन से दस यूनिट तथा बेली ब्लड बैंक से वर्तमान में रोज 30 यूनिट प्लेटलेट्स की आपूर्ति की जा रही है।
एएनएचए ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. निकुंज अग्रवाल के मुताबिक रक्तदान के बाद प्लेटलेट्स बनते ही आपूर्ति लेने को मरीज के तीमारदार खड़े रहते हैं। प्लेटलेट्स का स्टाक निल बना है। लोगों को नंबर दिए जा रहे हैं, ताकी नियत समय पर उन्हें प्लेटलेट्स उपलब्ध कराई जा सकें।
चिंता छोड़ दिखानी होगी हिम्मत
मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. वत्सला मिश्रा के मुताबिक डेंगू संक्रमित या उनके तीमारदार संक्रमण के दौरान कम हो रही प्लेटलेट्स काउंट की रिपोर्ट देखकर पैनिक न हों। अस्पताल में भर्ती डेंगू संक्रमितों के प्लेटलेट्स काउंट जब 20 हजार से नीचे आए तो चिकित्सक की सलाह पर प्लेटलेट्स की व्यवस्था करनी चाहिए। वैसे प्लेटलेट्स चढ़ाना तब जरूरी हो जाता है जब संक्रमित के नाक से ब्लीडिंग हो या फिर शरीर पर चकत्ते पड़ जाएं। चिंता नहीं हौसले और भरोसे से इलाज कराने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि लोग डेंगू पॉजिटिव रिपोर्ट आते ही प्लेटलेट्स के लिए परेशान होने लगते हैं। मरीज, तीमारदार धैर्य रखें, अधिकतर मरीज चार से छह दिन में संक्रमणमुक्त भी हो रहे हैं।