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डेंगू का डंक: बचाव को उपचार से ज्यादा जागरूकता है जरूरी
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Dengue disease
- फोटो : CITY DESK
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एमएलएन मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में कार्यशाला
चिकित्सकों को दिया गया प्रशिक्षण, इलाज की दी जानकारी
प्रयागराज। बदले मौसम में डेंगू महामारी का रूप न ले, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। शनिवार को मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम के तहत चिकित्सकों बचाव और सही जानकारी देने के लिए प्रशिक्षित किया गया। विशेषज्ञों ने कहा, डेंगू से बचाव के लिए उपचार से ज्यादा जागरूकता जरूरी है।
मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग और विश फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित सीएमई का उद्घाटन प्राचार्य मेडिकल कॉलेज डॉ. एसपी सिंह ने किया। उन्होंने कॉलेज के एसआरएन अस्पताल में डेंगू उपचार की सुविधाओं और बचाव के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि डेंगू से डरने की नहीं बचने की जरूरत है।
एसआरएन के एसआईसी डॉ. एके श्रीवास्तव ने बताया कि जरूरी नहीं कि हर तरह के डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स चढ़ाए जाएं। केवल हेमरेजिक और शॉक सिंड्रोम डेंगू में प्लेटलेट्स कि जरूरत होती है। डेंगू से बचाव को लोगों का जागरूक होना जरूरी है, इसलिए बुखार बना रहे तो तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।
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सीएमई की प्रमुख और कार्यक्रम संयोजक माइक्रोबायोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. मोनिका ने एडीस मच्छर डेंगू का वाहक होता है, संक्रमण फैलाने का काम डेंगू परजीवी करते हैं। डॉ. खुर्शीद परवीन ने डेंगू के कारण एवं बचाव की जानकारी दी। डॉ. कचनार वर्मा ने प्लेटलेट्स ट्रांसफ्यूजन की आवश्यकता के विषय में बताया। उन्होंने कहाकि डेंगू मरीज के प्लेटलेट्स काउंट यदि 10 हजार से अधिक हैं और शरीर से रक्तस्राव नहीं हो रहा हो तो प्लेटलेट्स ट्रांसफ्यूजन की जरूरत नहीं होती। डॉ. अनुभा श्रीवास्तव ने डेंगू पीड़ित बच्चों के उपचार के विषय में जानकारी दी।
विश फाउंडेशन के परियोजना निदेशक डा. गुलफाम अहमद ने परियोजनाओं के बारे में बताया। इसके तहत प्रदेश के वाराणसी, प्रयागराज, मिर्जापुर, गोरखपुर एवं अयोध्या के चिकित्सकों को डेंगू के परीक्षण, निगरानी, प्रयोगशाला परीक्षण एवं रोकथाम से जानकारी दी जा रही है।
संचालन डॉ. अरिंदम चौधरी ने किया। कार्यक्रम में एसीएमओ डॉ. आशु पाडेय, अंजुम गुलवेज, मेडिकल कॉलेज के सभी विभागाध्यक्ष और चिकित्सक मौजूद रहे।
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चिकित्सकों को दिया गया प्रशिक्षण, इलाज की दी जानकारी
प्रयागराज। बदले मौसम में डेंगू महामारी का रूप न ले, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। शनिवार को मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम के तहत चिकित्सकों बचाव और सही जानकारी देने के लिए प्रशिक्षित किया गया। विशेषज्ञों ने कहा, डेंगू से बचाव के लिए उपचार से ज्यादा जागरूकता जरूरी है।
मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग और विश फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित सीएमई का उद्घाटन प्राचार्य मेडिकल कॉलेज डॉ. एसपी सिंह ने किया। उन्होंने कॉलेज के एसआरएन अस्पताल में डेंगू उपचार की सुविधाओं और बचाव के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि डेंगू से डरने की नहीं बचने की जरूरत है।
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एसआरएन के एसआईसी डॉ. एके श्रीवास्तव ने बताया कि जरूरी नहीं कि हर तरह के डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स चढ़ाए जाएं। केवल हेमरेजिक और शॉक सिंड्रोम डेंगू में प्लेटलेट्स कि जरूरत होती है। डेंगू से बचाव को लोगों का जागरूक होना जरूरी है, इसलिए बुखार बना रहे तो तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।
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सीएमई की प्रमुख और कार्यक्रम संयोजक माइक्रोबायोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. मोनिका ने एडीस मच्छर डेंगू का वाहक होता है, संक्रमण फैलाने का काम डेंगू परजीवी करते हैं। डॉ. खुर्शीद परवीन ने डेंगू के कारण एवं बचाव की जानकारी दी। डॉ. कचनार वर्मा ने प्लेटलेट्स ट्रांसफ्यूजन की आवश्यकता के विषय में बताया। उन्होंने कहाकि डेंगू मरीज के प्लेटलेट्स काउंट यदि 10 हजार से अधिक हैं और शरीर से रक्तस्राव नहीं हो रहा हो तो प्लेटलेट्स ट्रांसफ्यूजन की जरूरत नहीं होती। डॉ. अनुभा श्रीवास्तव ने डेंगू पीड़ित बच्चों के उपचार के विषय में जानकारी दी।
विश फाउंडेशन के परियोजना निदेशक डा. गुलफाम अहमद ने परियोजनाओं के बारे में बताया। इसके तहत प्रदेश के वाराणसी, प्रयागराज, मिर्जापुर, गोरखपुर एवं अयोध्या के चिकित्सकों को डेंगू के परीक्षण, निगरानी, प्रयोगशाला परीक्षण एवं रोकथाम से जानकारी दी जा रही है।
संचालन डॉ. अरिंदम चौधरी ने किया। कार्यक्रम में एसीएमओ डॉ. आशु पाडेय, अंजुम गुलवेज, मेडिकल कॉलेज के सभी विभागाध्यक्ष और चिकित्सक मौजूद रहे।