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हाईकोर्ट : अल्प शिक्षित कर्मचारी की ओर से अपील दाखिल करने में हुई देरी नजरअंदाज करने योग्य

Fri, 02 Oct 2026 07:16 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 02 Oct 2026 07:16 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अल्प शिक्षित कर्मचारी की ओर से अपील दाखिल करने में हुई देरी व लापरवाही को नजरअंदाज किया जा सकता है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की एकल पीठ ने शाहजहांपुर निवासी राज कुमार की याचिका स्वीकार कर ली।

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Delay in filing appeal by minimally educated employee condonable.
कोर्ट का आदेश। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अल्प शिक्षित कर्मचारी की ओर से अपील दाखिल करने में हुई देरी व लापरवाही को नजरअंदाज किया जा सकता है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की एकल पीठ ने शाहजहांपुर निवासी राज कुमार की याचिका स्वीकार कर ली। कोर्ट ने दंड के खिलाफ उसकी अपील को देरी के आधार पर खारिज करने वाले 26 जुलाई 2023 के आदेश को निरस्त कर दिया। साथ ही अपीलीय प्राधिकारी को मामले में नए सिरे से आदेश पारित करने का आदेश दिया है।

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मामले के अनुसार, याची के खिलाफ विभागीय जांच में तीन आरोप लगाए गए थे। जांच में दो आरोप साबित नहीं हुए। एक आरोप गांव कुआबोझ में नियमित सफाई नहीं करने से जुड़ा था। इसका खंडन करते हुए याची ने दावा किया था कि वह नियमित रूप से सफाई करता था। गांव के लोगों और ग्राम प्रधान ने भी उसके पक्ष में बयान दिया था। जांच अधिकारी की रिपोर्ट में भी इस आरोप के साबित होने की कोई स्पष्ट निष्कर्ष दर्ज नहीं था। इसके बावजूद 16 मई 2011 को याची की एक वेतनवृद्धि स्थायी रूप से रोकने और निंदा प्रविष्टि दर्ज करने का दंड दिया गया।
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कोर्ट ने पाया कि याची ने करीब 12 साल दो महीने बाद नौ जुलाई 2023 को अपील दाखिल की। जिसे अपीलीय प्राधिकारी ने देरी और लापरवाही के आधार पर खारिज कर दिया था। समान मामले में मुन्नी देवी को हाईकोर्ट से राहत मिली थी। मुन्नी देवी ने भी करीब 12 साल आठ महीने बाद अपील की थी। कोर्ट ने अपीलीय प्राधिकारी को देरी को नजरअंदाज कर अपील का गुण-दोष के आधार पर फैसला करने का निर्देश दिया था। इसके बाद उनकी रोकी गई वेतनवृद्धि बहाल कर दी गई थी।
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लिहाजा, कोर्ट ने कहा कि वर्तमान मामले में भी जांच रिपोर्ट के अनुसार आरोप साबित नहीं हुए थे। साथ ही याची चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (सफाईकर्मी) है। पर्याप्त शिक्षित नहीं है। इन परिस्थितियों को देखते हुए अपील दाखिल करने में हुई देरी और लापरवाही को माफ किया जाना उचित है।

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