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दोबारा मिली आंखों की रोशनी से दीपावली का त्योहार हुआ खास

Sat, 14 Nov 2020 01:21 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 14 Nov 2020 01:21 AM IST
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Deepawali festival becomes special again due to eyesight
eye - फोटो : insatgram
किसी की आंखों की रोशनी अगर लौट आए तो दीपावली पर इससे बड़ा उपहार उसके लिए क्या हो सकता है। 15 वर्षों बाद कुंडा के बसंत लाल की आंखों की रोशनी मिली तो जैसे दोबारा जीवन का रंग लौट आया। एमडीआई अस्पताल के आंकड़े बताते हैं कि बसंत लाल की तरह इस वर्ष अब तक 27 लोगों का कार्निया ट्रांसप्लांट कर आंखों को रोशनी दी गई है। इनमें प्रयागराज के अलावा प्रतापगढ़, कौशांबी, जौनपुर, भदोही के अलावा दूसरे प्रदेशों के लोग भी शामिल हैं। ऐसे में यह दीपावली उनके लिए खास है। 
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कुंडा नवाबगंज के बसंत लाल कहते हैं कि 35 साल की अवस्था में उनकी आंखों की रोशनी चली गई थी। कोयले का धुआं आंखों में जाने से आंखों से दिखना बंद हो गया था। ऐसे में न केवल उन पर उनकी पत्नी और छह बच्चों पर जीवन यापन का संकट खड़ा हो गया था। उन्होंने कई बार मनोहर दास नेत्र चिकित्सालय जाकर डॉक्टरों को अपनी आंख दिखाई। लेकिन, राहत न मिली। इस साल फरवरी में उनकी दाईं आंख का कार्निया ट्रांसप्लांट हुआ तो जैसे नया जीवन मिल गया। अब वे सबकुछ देख रहे हैं और समझ रहे हैं। उनके लिए इस बार की दीपावली चकाचौंध और रोशनी से भरपूर है। उनके साथ उनके परिवार का भी जीवन लौट आया है। 
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इसी तरह कोरांव के पास के डीहा गांव की 67 साल की सुखरिया शुक्ला कहती हैं कि इस बार की दीपावली उनके लिए किसी उपहार से कम नहीं है। कीडगंज के 70 वर्षीय भारतभूषण कहते हैं कि फरवरी में कार्निया ट्रांसप्लांट के बाद उनकी आंखों की रोशनी लौट आई है। अब वे भी झालरों के बीच सजे घर, आंगन में बनी रंगोलियां, पटाखों की रंगबिरंगी आतिशबाजी और मनमोहक सजावटों का आनंद उठा रहे हैं।
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पिछले सात सालों से उनकी आंखों में परेशानी थी और दिखाई देना बंद हो गया था। मनोहर लाल नेत्र चिकित्सालय के डायरेक्टर और मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह कहते हैं कि कोरोना काल के बावजूद इस साल पिछली दीपावली से अब तक 27 लोगों के आंखों की कार्निया का ट्रांसप्लांट किया गया। इसमें अधिकतर लोग 40 वर्ष से 50 वर्ष की उम्र के हैं। एक दर्जन लोगों की उम्र 50 साल से अधिक है। कार्निया ट्रांसप्लांट के बाद इन सभी लोगों के जीवन की दीपावली इंद्रधुनषी हो गई।
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