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चुनिंदा कॉपियों में ही घटाए और बढ़ाए नंबर
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 16 Apr 2018 01:35 AM IST
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं की जांच कर रही सीबीआई इस नतीजे पर पहुंच चुकी है कि मॉडरेशन की आड़ में कुछ चुनिंदा कॉपियों के नंबर ही घटाए और बढ़ाए गए। मॉडरेशन तो सभी कॉपियों का होना चाहिए था लेकिन पीसीएस परीक्षा-2015 में ऐसा नहीं हुआ। यूपीपीएससी ने ऐसा क्यों किया, यह जानने के लिए सीबीआई की टीम गोविंदपुर स्थित कैंप कार्यालय में सोमवार से पूछताछ शुरू करने जा रही है और इसके लिए सीबीआई ने पीसीएस-2015 के 25 चयनित अभ्यर्थियों को कैंप कार्यालय तलब किया है। इसके साथ ही आयोग के कुछ कर्मचारियों से भी पूछताछ किए जाने की तैयारी है।
सूत्रों का कहना है कि सीबीआई ने पीसीएस मुख्य परीक्षा की कॉपियां की जांच-पड़ताल की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में यह बात सामने आई कि केवल दस फीसदी कॉपियों का ही मूल्यांकन किया गया। समान अंक पाने वाले दो अभ्यर्थियों में एक के अंक बढ़ाए गए और दूसरे के अंक घटा दिए गए। उदाहरण के तौर पर दो अभ्यर्थियों को 91 अंक मिला है तो एक अभ्यर्थी के अंक बढ़ाकर 116 कर दिए गए और दूसरे के अंक घटाकर 80 कर दिए गए। जिसके अंक बढ़े उसे तो फायदा मिला और जिसके अंक घटाए उसे नुकसान हुआ। सीबीआई को यह सुराग भी मिला है कि जिन अभ्यर्थी के अंक बढ़ाए गए, उनमें से ज्यादातर अभ्यर्थी आयोग के किसी कर्मचारी, अफसर या सदस्य के करीबी रहे हैं। कुछ अभ्यर्थी का संपर्क उन दलालों के साथ मिला है, जिन्हें सीबीआई पहले ही चिह्नित कर चुकी है। कॉपियों की जांच में यह बात साफ हो चुकी है कि कुछ चुनिंदा अभ्यर्थियों को मॉडरेशन के तहत फायदा पहुंचाया गया है।
पीसीएस 2015 में प्रदेश स्तर के एक पूर्व अफसर के बेटे का चयन भी सीबीआई संदिग्ध मानकर चल रही है। सूत्रों का कहना है कि पूर्व अफसर के बेटे को भी मॉडरेशन के तहत फायदा पहुंचाया गया है। सीबीआई उसकी फाइल अलग से खोलने की तैयारी कर रही है। हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है कि इस चयनित अभ्यर्थियों का नाम उन संदिग्ध 25 चयनितों में है या नहीं, जिन्हें सीबीआई ने सोमवार को पूछताछ के लिए कैंप कार्यालय बुलाया है।
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सूत्रों का कहना है कि सीबीआई ने पीसीएस मुख्य परीक्षा की कॉपियां की जांच-पड़ताल की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में यह बात सामने आई कि केवल दस फीसदी कॉपियों का ही मूल्यांकन किया गया। समान अंक पाने वाले दो अभ्यर्थियों में एक के अंक बढ़ाए गए और दूसरे के अंक घटा दिए गए। उदाहरण के तौर पर दो अभ्यर्थियों को 91 अंक मिला है तो एक अभ्यर्थी के अंक बढ़ाकर 116 कर दिए गए और दूसरे के अंक घटाकर 80 कर दिए गए। जिसके अंक बढ़े उसे तो फायदा मिला और जिसके अंक घटाए उसे नुकसान हुआ। सीबीआई को यह सुराग भी मिला है कि जिन अभ्यर्थी के अंक बढ़ाए गए, उनमें से ज्यादातर अभ्यर्थी आयोग के किसी कर्मचारी, अफसर या सदस्य के करीबी रहे हैं। कुछ अभ्यर्थी का संपर्क उन दलालों के साथ मिला है, जिन्हें सीबीआई पहले ही चिह्नित कर चुकी है। कॉपियों की जांच में यह बात साफ हो चुकी है कि कुछ चुनिंदा अभ्यर्थियों को मॉडरेशन के तहत फायदा पहुंचाया गया है।
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पीसीएस 2015 में प्रदेश स्तर के एक पूर्व अफसर के बेटे का चयन भी सीबीआई संदिग्ध मानकर चल रही है। सूत्रों का कहना है कि पूर्व अफसर के बेटे को भी मॉडरेशन के तहत फायदा पहुंचाया गया है। सीबीआई उसकी फाइल अलग से खोलने की तैयारी कर रही है। हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है कि इस चयनित अभ्यर्थियों का नाम उन संदिग्ध 25 चयनितों में है या नहीं, जिन्हें सीबीआई ने सोमवार को पूछताछ के लिए कैंप कार्यालय बुलाया है।
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