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संदिग्ध हालात में कर्ज में डूबे किसान की मौत
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Sat, 09 May 2015 02:20 AM IST
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करमा (इलाहाबाद)। यमुनापार के करछना तहसील के चिल्ली गांव मेें शुक्रवार दोपहर कर्ज में डूबे एक किसान की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी और घरवाले उसे लेकर एसआरएन अस्पताल भागे जहां इलाज के दौरान किसान ने दम तोड़ दिया। किसान की मौत से घरवाले रो-रोकर बेहाल हैं। उन्हें आशंका है कि किसान ने कोई जहरीला पदार्थ निगला था। इस आशंका के आधार पर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
करछना में चिल्ली गांव के किसान राजनारायण पटेल उर्फ नेहरू (58) के पास पांच बीघा खेत है। उसने गेहूं की बोआई की थी। बारिश से फसल ऐसी तबाह हुई कि पांच बीघा खेत में महज बीस बोरी गेहूं की पैदावार हुई। घरवालों के मुताबिक उसने साहूकारों से डेढ़ लाख रुपया कर्ज ले रखा था। इसके अलावा 70 हजार रुपये बिजली का बिल भी बकाया था। फसल की मड़ाई के बाद से राजनारायण को गहरा आघात लगा।
उसे उम्मीद थी कि गेहूं की इतनी पैदावार हो जाएगी कि फ सल बेचकर कर्ज चुका सकेगा लेकिन फसल बर्बाद हो गई और उम्मीदें टूट गईं। राजनारायण पर पत्नी विमला, दो बेटों रणधीर, महेंद्र और उनके परिवार के अन्य सदस्यों की जिम्मेदारी थी। दोनों बेटे खेती में पिता का सहयोग करते थे। राजनारायण की पत्नी विमला को दमा की बीमारी है। उसके इलाज में काफी रुपया खर्च हो जाता था।
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इन झंझावतों से परेशान राजनारायण गुमसुम सा रहने लगा था। शुक्रवार दोपहर में वह खाना खाने के बाद लेटा हुआ था। अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी तो घरवाले उसे लेकर एसआरएन अस्पताल भागे, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बडे़ बेटे रणधीर का कहना है कि वह दूर बैठा देख रहा था कि उसके पिता ने कुछ खाकर पानी से उसे निगल लिया और उसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। उसे संदेह है कि पिता ने कोई जहरीला पदार्थ निगला था। बड़े बेटे की इस आशंका पर किसान के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
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करछना में चिल्ली गांव के किसान राजनारायण पटेल उर्फ नेहरू (58) के पास पांच बीघा खेत है। उसने गेहूं की बोआई की थी। बारिश से फसल ऐसी तबाह हुई कि पांच बीघा खेत में महज बीस बोरी गेहूं की पैदावार हुई। घरवालों के मुताबिक उसने साहूकारों से डेढ़ लाख रुपया कर्ज ले रखा था। इसके अलावा 70 हजार रुपये बिजली का बिल भी बकाया था। फसल की मड़ाई के बाद से राजनारायण को गहरा आघात लगा।
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उसे उम्मीद थी कि गेहूं की इतनी पैदावार हो जाएगी कि फ सल बेचकर कर्ज चुका सकेगा लेकिन फसल बर्बाद हो गई और उम्मीदें टूट गईं। राजनारायण पर पत्नी विमला, दो बेटों रणधीर, महेंद्र और उनके परिवार के अन्य सदस्यों की जिम्मेदारी थी। दोनों बेटे खेती में पिता का सहयोग करते थे। राजनारायण की पत्नी विमला को दमा की बीमारी है। उसके इलाज में काफी रुपया खर्च हो जाता था।
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इन झंझावतों से परेशान राजनारायण गुमसुम सा रहने लगा था। शुक्रवार दोपहर में वह खाना खाने के बाद लेटा हुआ था। अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी तो घरवाले उसे लेकर एसआरएन अस्पताल भागे, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बडे़ बेटे रणधीर का कहना है कि वह दूर बैठा देख रहा था कि उसके पिता ने कुछ खाकर पानी से उसे निगल लिया और उसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। उसे संदेह है कि पिता ने कोई जहरीला पदार्थ निगला था। बड़े बेटे की इस आशंका पर किसान के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।