तारीख पे तारीख : थक गईं अदालतेें, अब ठंडे बस्ते में पत्रावलियां करेंगी मुल्जिमों का इंतजार
यह मामला थाना कोतवाली क्षेत्र का है। अभियुक्त संजय घोष पर आपराधिक न्यास भंग का मुकदमा वर्ष 1984 में दर्ज हुआ। यह मामला सात साल की कैद और जुर्माने से दंडनीय है। इस मामले में कई तारीखें लगीं, जमानती और गैर जमानती वारंट जारी हुए लेकिन मुल्जिम फरार ही रहा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इलाहाबाद जिला अदालत में 40 साल से लंबित आपराधिक मामलों में अदालतेें तारीख पे तारीख देते थक गईं। अब मामले की पत्रावलियां ठंडे बस्ते में मुल्जिमों का इंतजार करेंगी। इन वर्षों में तारीखें बहुत लगीं पर पुलिस मुद्दई, मुल्जिम और गवाहों को पेश नहीं कर सकी। मजबूरन, अदालत को कार्यवाही को स्थगित करनी पड़ी। कोर्ट ने पत्रावलियोंं को दफ्तर में सुरक्षित रखने का आदेश दे दिया। अब इन फाइलों पर तब तक तारीखें नहीं लगेंगी जब तक मुल्जिम मिल नहीं जाते। फिलहाल, फरार मुल्जिमों के खिलाफ कोर्ट ने स्थायी वारंट जारी कर दिया है।
मामला- एक
राज्य बनाम संजय घोष
यह मामला थाना कोतवाली क्षेत्र का है। अभियुक्त संजय घोष पर आपराधिक न्यास भंग का मुकदमा वर्ष 1984 में दर्ज हुआ। यह मामला सात साल की कैद और जुर्माने से दंडनीय है। इस मामले में कई तारीखें लगीं, जमानती और गैर जमानती वारंट जारी हुए लेकिन मुल्जिम फरार ही रहा। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि दिए गए पते पर संजय घोष नाम का कोई व्यक्ति रहता ही नहीं। कोर्ट ने गवाहों और सुबूतों को तलब किया तो पुलिस उन्हें भी पेश करने में नाकाम रही। लिहाजा, कोर्ट ने पत्रावलियों को दाखिल दफ्तर करने का आदेश दे दिया।
मामला -दो
राज्य बनाम शारदा प्रसाद उर्फ शारदा नाई
आयुध अधिनियम के तहत थाना कोतवाली में यह मामला भी वर्ष 1984 में कायम हुआ था। आरोपी शारदा प्रसाद उर्फ शारदा नाई फरार चल रहा है। अदालत ने गैर जमानती वारंट जारी कर उसे पेश करने का आदेश दिया था, जिस पर पुलिस ने कोर्ट को बताया कि जिस घर में आरोपी रहता था उसे 15 साल पहले मुकेश चंद्र पांडेय ने खरीद लिया है। इसके बाद आरोपी का कोई अता-पता नहीं है। इस मामले में भी पुलिस अपने गवाह और साक्ष्य पेश नहीं कर सकी। लिहाजा, ठंडे बस्ते में चला गया।
मामला-तीन
राज्य बनाम राशिद आदि
वर्ष 1995 में दर्ज यह मामला विधि विरुद्ध जमाव का है। कोतवाली पुलिस ने राशीद के अलावा उमेश चंद्र केसरवानी को आरोपी बनाया था। फरार चल रहे उमेश के खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट पर पुलिस ने कोर्ट को बताया कि मकान नंबर 69 राम भवन पर उमेश चंद्र नाम का कोई व्यक्ति रहता ही नहीं। इसके बाद अदालत ने गवाह और सुबूत तलब किए तो पुलिस उन्हें भी पेश नहीं कर पाई। अदालत ने आरोपी के खिलाफ स्थायी वारंट जारी कर पत्रावली पर कार्यवाही स्थगित कर दी।
मामला-चार
राज्य बनाम बब्लू केसरवानी
वर्ष 1997 में आरोपी बब्लू केसरवानी के खिलाफ नशीली दवाओं की तस्करी का मामला कोतवाली पुलिस ने दर्ज किया था। यह अपराध एक से 20 वर्ष के कारावास से दंडनीय है। 27 साल पहले दर्ज इस मामले में फरार चल रहे अभियुक्त के बारे में पुलिस ने अदालत को बताया कि दस्तावेजों में दर्ज पते पर कोई राजीव चौरसिया रहते हैं। यह उनका पैतृक आवास है। आरोपी बब्लू का इस पते से कोई वास्ता नहीं है। लिहाजा उसके मिलने की संभावना न के बराबर है। इस मामले में भी कोर्ट ने पुलिस से गवाह सुबूत तलब किया, लेकिन वह भी पेश नहीं किए जा सके।