Mahakubh : महाकुंभ में डाटा एनालिटिक सिस्टम से अभेद बनेगा सुरक्षा तंत्र, प्रभावी रणनीति बनाने में मिलेगी मदद
महाकुम्भ मेला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) राजेश कुमार द्विवेदी ने बताया कि इस संबंध में कार्य शुरू हो गया है। इसके तहत सर्विलांस के लिए एक विशिष्ट टीम का गठन होगा। यह सिस्टम को लागू करने, प्रत्येक पुलिसकर्मियों व सुरक्षा स्टाफ को ट्रेंड करने में मददगार होगी।
विस्तार
महाकुम्भ में सुरक्षा तंत्र को अभेद बनाने के लिए एडवांस्ड एआई डाटा ड्रिवन- एनालिटिक्स सॉल्यूशन सिस्टम को लागू किया जाएगा। इससे सुरक्षा के दृष्टिगत घटनास्थल व चिह्नित क्षेत्रों के रियलटाइम डाटा का विश्लेषण कर प्रभावी रणनीति बनाने में मदद मिलेगी।
महाकुम्भ मेला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) राजेश कुमार द्विवेदी ने बताया कि इस संबंध में कार्य शुरू हो गया है। इसके तहत सर्विलांस के लिए एक विशिष्ट टीम का गठन होगा। यह सिस्टम को लागू करने, प्रत्येक पुलिसकर्मियों व सुरक्षा स्टाफ को ट्रेंड करने में मददगार होगी। यह सिस्टम महाकुम्भ पुलिस ऐप के बाद सुरक्षा व स्मार्ट पुलिसिंग की ओर बढ़ रही यूपी पुलिस की एक और बड़ी उपलब्धि होगी।
अफसरों का मानना है कि प्रभावी भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा के लिए गहन विश्लेषण की आवश्यकता होगी। इसी को देखते हुए मेला के लिए गठित विशिष्ट टीम वृहद पैमाने पर एकत्र किए गए डाटा बैंक पर एआई व मेटा डाटा आधारित एनालिटिक्स सॉल्यूशन सिस्टम का निर्माण व संचालन करेगी।
इन खूबियों से लैस होगा सिस्टम
इसका उद्देश्य अंतर-एजेंसी समन्वय को बढ़ाना, समय पर संभावित खतरे का पता लगाना तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कार्रवाई योग्य खुफिया जानकारी उत्पन्न करना है।
साइबर अपराध से बचाएंगे डिजिटल वॉरियर्स
महाकुंभ में श्रद्धालुओं को साइबर अपराध से बचाने के लिए डिजिटल वॉरियर्स तैनात किए जाएंगे। यह फेक न्यूज के खिलाफ अभियान चलाने के साथ साइबर अपराध के प्रति जागरूकता व पुलिस के सराहनीय कार्यों को सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफाॅर्म पर प्रसारित करेंगे।
इसके लिए सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर्स एवं कॉलेज के छात्रों को जोड़ा गया है। 2018 में व्हाट्सएप पर सक्रिय समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों को डिजिटल वालंटियर के रूप में जोड़ा गया था। इसके बाद 2023 में यूपी पुलिस के समस्त पुलिसकर्मियों को जोड़कर ‘व्हाट्सएप कम्युनिटी ग्रुप’ भी बनाए गए।
वर्तमान में लगभग 10 लाख व्यक्ति डिजिटल वालंटियर के रूप में एवं लगभग 02 लाख पुलिसकर्मी कम्यूनिटी ग्रुप के माध्यम से आपस में जुड़े हुए हैं। डिजिटल वालंटियरों गांव, मोहल्ले और स्थानीय कस्बे के वह लोग हैं जो साइबर अपराध, फेक न्यूज के खिलाफ जागरूकता फैलाने को लेकर संकल्पित हैं।
इसके सार्थक परिणाम को देखते हुए डीजीपी प्रशांत कुमार ने सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स एवं कॉलेज/विश्वविद्यालय के छात्रों को भी डिजिटल वारियर्स बनाए जाने के निर्देश प्रदेश के समस्त विभागाध्यक्ष और कार्यालयाध्यक्ष को दिए हैं । इन डिजिटल वॉरियर एवं स्कूल के छात्रों को फेक न्यूज़ एवं साइबर क्राइम की पहचान करने और इसके दुष्प्रभावों के प्रति प्रशिक्षित करने के लिए विश्वविद्यालयों/डिग्री कॉलेजों, स्कूलों में अथवा पुलिस लाइन्स में कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।
चार श्रेणियों में चयन
1- फेक न्यूज के खंडन एवं साइबर अपराध के प्रति सचेत करने
2- साइबर अपराध के प्रति जागरूकता
3- साइबर ट्रेनर
4- पुलिस के अभियानों/सराहनीय कार्यों का प्रचार-प्रसार साइबर
स्कूल-कॉलेजों में बनेंगे साइबर क्लब
जनपदीय पुलिस अधिकारी सभी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालय प्रबंधन से आग्रह करके ‘साइबर क्लब’ स्थापित करवाएंगे। एक शिक्षक को इसका नोडल अधिकारी नामित करवाया जाएगा। साइबर क्लब के माध्यम से कार्यशालाएं और रचनात्मक सत्र जैसे पोस्टर बनाना, स्लोगन/लघु कहानियां लिखना, सोशल मीडिया के लिए क्रिएटिव एवं वीडियो कंटेंट बनाना इत्यादि गतिविधियां कराई जाएंगी।