दानपात्रों में पहुंच गया काला धन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दानपात्रों में आने वाले चढ़ावे का पूरा हिसाब-किताब वहां का प्रबंधन रखता है। चढ़ावे की यह रकम रोज नहीं निकाली जाती, बल्कि सप्ताह, 15 दिन या फिर एक माह में दानपात्र खाली किया होता है। इसके बाद रकम की गिनती कर प्रबंधन उसे धार्मिक संस्था के नाम से खुले बैंक खाते में जमा करता है। आठ नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच सौ और हजार के नोट बंद करने का फरमान जारी किया तो घरों में काली कमाई रखने वालों में हड़कंप मच गया।
बाद में वित्त मंत्रालय ने यह भी घोषणा की कि धार्मिक स्थलों पर रखे दानपात्र में आठ नवंबर तक चढ़ावे के रूप में एकत्र पांच सौ और हजार के नोट को प्रबंधन द्वारा संस्था के बैंक खातों में जमा करने पर किसी तरह की पूछताछ नहीं होगी। इसी का फायदा उठाकर काली कमाई करने वाले कई लोगों ने शहर के बड़े धार्मिक स्थलों का रुख किया है और पिछले दो-तीन दिन में वहां से पांच सौ और हजार के 12 करोड़ रुपये से अधिक देकर छोटे नोट और सिक्के ले लिए। कर एवं वित्त सलाहकार डॉ.पवन जायसवाल का कहना है कि यह संभव है। अगर ऐसा हो रहा है तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं है।
‘धार्मिक स्थलों का भी आयकर निर्धारण होता है लेकिन उसके नाम की संस्था का आयकर में धारा 12अ के तहत रजिस्ट्रेशन होने के कारण आय पर टैक्स में छूट का प्रावधान है।’ डॉ.निधि पी सिंह, कर अधिवक्ता एवं कर सलाहकार
‘मथुरा समेत कई शहरों से इस तरह के मामले सामने आए हैं, लेकिन शहर की किसी भी धार्मिक संस्था ने अभी तक मोटी रकम बैंक खाते में नहीं जमा की है। ऐसे में धार्मिक स्थलों से काली कमाई बदलने के मामले में कुछ भी नहीं कहा जा सकता।’ अरविंद कुमार गुप्ता, सहायक महाप्रबंधक, एसबीआई त्रिवेणी शाखा