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Dala Chhath 2025 : शोभन योग में नहाय खाय से होगी छठ पर्व की शुरुआत, विशेष संयोग में मनाया जाएगा महापर्व

Fri, 24 Oct 2025 07:27 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 24 Oct 2025 07:27 PM IST
सार

लोक आस्था का महापर्व छठ इस बार विशेष योग में मनाया जाएगा। 27 अक्तूबर को रवि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इसके पहले 25 अक्तूबर से शोभन योग में नहाय-खाय के साथ इसका आरंभ होगा।

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Dala Chhath 2025: Chhath festival will begin with Nahai Khay in Shobhan Yoga
Chhath Puja 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लोक आस्था का महापर्व छठ इस बार विशेष योग में मनाया जाएगा। 27 अक्तूबर को रवि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इसके पहले 25 अक्तूबर से शोभन योग में नहाय-खाय के साथ इसका आरंभ होगा। 28 अक्तूबर को मित्र योग में उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ महापर्व का समापन होगा।

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ज्योतिषाचार्य डाॅ. अमिताभ गौड़ बताते हैं कि चार दिवसीय महापर्व 25 अक्तूबर को नहाय-खाय के साथ शुरू होगा। इस दिन जब सूर्योदय होगा तब चतुर्थी तिथि और शोभन योग के संयोग से यह अत्यंत शुभ रहेगा।

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पहले दिन घर की सफाई कर स्नानादि करें। लहसुन-प्याज समेत तामसिक भोज्य पदार्थों का त्याग कर दिन में एक बार भात व लौकी की सब्जी ग्रहण कर जमीन पर शयन करने का प्रावधान है। दूसरे दिन 26 अक्तूबर को कार्तिक शुक्ल पंचमी तिथि पर खरना रहेगा।

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व्रती महिलाएं दिनभर उपवास करेंगी और सायंकाल दूध-चावल से प्रसाद बनाकर पूजा करती हैं। पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण कर अगले दिन निर्जल उपवास का संकल्प लिया जाता है। खरना को ‘संध्या पूजा’ भी कहा जाता है।

तीसरे दिन 27 अक्तूबर को कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि के दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। इस दौरान दिनभर पूजा-पाठ के बाद शाम को ढलते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इस दिन मूल और पूर्वाषाढ़ नक्षत्र के साथ सुकर्मा और धृति योग का शुभ संयोग बन रहा है।

ज्योतिष शास्त्र में यह योग दुर्लभ और अत्यंत शुभ माना जाता है। 28 अक्तूबर को अरुणोदय काल में उगते सूरज को अर्घ्य देंगी। इस दिन धृति और मित्र योग का संयोग रहेगा। अर्घ्य देने के बाद महिलाएं पारायण कर व्रत पूर्ण करेंगी।डाॅ. गौड़ ने कहा कि यह पर्व व्रतियों को चतुर्दिक सुख देने वाला माना जाता है। भगवान भास्कर समस्त व्रत संतान सुख प्राप्ति के लिए होते हैं। इसमें प्रत्यक्ष सूर्य देव का पूजन-वंदन किया जाता है लेकिन डाला छठ पर भगवान भास्कर की दोनों पत्नियों उषा-प्रत्युषा व छठी मइया की भी पूजा होती है।

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