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Prayagraj : हेलिकॉप्टर क्रैश में शहीद सैनिक को अंतिम विदाई देने उमड़ी भीड़, रसूलाबाद घाट पर हुआ अंतिम संस्कार

Tue, 07 Jan 2025 05:58 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 07 Jan 2025 05:58 PM IST
सार

गुजरात के पोरबंदर पोर्ट पर हेलीकॉप्टर क्रैश में शहीद हुए प्रयागराज में रहने वाले कमांडेंट सौरभ यादव (42) का शव मंगलवार को सेना के वाहन से गांव पहुंचा तो शहीद के अंतिम दर्शन के लिए भीड़ उमड़ गई।

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Crowd gathered to bid last farewell to the soldier martyred in helicopter crash, last rites took place at Rasu
शहीद के अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

पोरबंदर में हेलिकॉप्टर क्रैश में शहीद हुए इंडियन कोस्टगार्ड के कमांडेंट सौरभ यादव (42) का पार्थिव शरीर मंगलवार को तिरंगे में लपेटकर प्रयागराज लाया गया। कोस्टगार्ड की नौ सदस्यीय टीम फ्लाइट से पार्थिव शरीर लेकर धूमनगंज स्थित उनके घर पहुंचीं। यहां सपूत को श्रद्धांजलि देने लोगों की भीड़ उमड़ी। सेना व एयरफोर्स के अफसर-जवान भी पहुंचे। शहीद की अंतिम यात्रा निकली तो हर आंख नम हो गई।

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पार्थिव शरीर लेकर दोपहर करीब 1:30 बजे कोस्टगार्ड की टीम बमरौली एयरपोर्ट पहुंची। जिस ताबूत में पार्थिव शरीर रखकर लाया गया, उस पर तिरंगा लपेटा गया था। यहां से फूलों से सजे सेना के वाहन में रखकर दोपहर 2:15 मिनट पर पार्थिव शरीर घर लाया गया।
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यहां सबसे पहले कोस्टगार्ड, सेना, एयरफोर्स के अफसरों व जवानों ने राजकीय सम्मान के साथ उन्हें सलामी दी। साथ ही पुष्प चक्र अर्पित किए। इसके बाद परिजनों व मौके पर बड़ी संख्या में जमा लोगाें ने पुष्पांजलि अर्पित की। दोपहर 3:30 बजे के करीब शहीद की अंतिम यात्रा निकाली गई। परिजनों के साथ सैन्य अफसराें व जवानों ने भी पार्थिव शरीर को कंधा दिया।
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यहां से दोबारा पार्थिव शरीर सैन्य वाहन में रखा गया और फिर रसूलाबाद घाट पर ले जाया गया। वहां राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। छोटे भाई अंकुश ने मुखाग्नि दी। घाट पर पुलिस की ओर से भी शहीद को पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।

सौरभ तुम्हारा ये बलिदान, नहीं भूलेगा हिंदुस्तान...

शहीद का पार्थिव शरीर अंतिम यात्रा के लिए ले जाते वक्त भारत माता के जयकारे गूंजे। साथ ही कमांडेंट सौरभ अमर रहें, सौरभ तुम्हारा ये बलिदान, नहीं भूलेगा हिंदुस्तान के भी नारे लगाए गए। लोगों ने शहीद को नमन करने के साथ ही सलामी दी। इससे पहले घर से अंतिम संस्कार के लिए रसूलाबाद घाट ले जाने को निकलने से पहले कोस्ट गार्ड के अफसर अमित कुमार ने शहीद की पत्नी वासिता को उनकी कैप भी सौंपी।

कोई मेरे पापा को उठा दो...

पापा जागो न, कोई मेरे पापा को उठा दो, पापा क्यों नहीं उठ रहे...शहीद की छह साल की बेटी टीका की चीत्कार सुनकर मौके पर मौजूद लोगों के कलेजे कांप गए। परिजन बार-बार उसे चुप कराने की कोशिश करते। लेकिन, उसकी हालत देख खुद उनकी भी आंखें भर आ रही थीं। तीन साल के बेटे बाली को तो अहसास भी नहीं था कि अब वह पापा को कभी नहीं देख पाएगा। पत्नी वासिता एक टक तिरंगे में लिपटे पति के पार्थिव शरीर को निहारती रहीं। भाई अंकुश पहले तो खुद सभी को समझाता रहा कि कोई आंसू नहीं बहाएगा। लेकिन, जब अंतिम विदाई देने का वक्त आया तो वह भी अपने आंसू रोक नहीं पाया। पिता ज्ञान सिंह व मां सावित्री भी बेसुध रहे।

आगे पुलिस, पीछे सेना के वाहन ने किया एस्कॉर्ट

पार्थिव शरीर बमरौली एयरपोर्ट से घर और फिर वहां से रसूलाबाद घाट ले जाने के दौरान आगे पुलिस, जबकि पीछे सेना के वाहन ने एस्कॉर्ट किया। इस दौरान कोस्टगार्ड, सेना व एयरफोर्स के जवान-अफसर रास्ते भर भारत माता के जयकारे लगाते रहे। एक खास बात यह रही कि अंतिम यात्रा पर निकले शहर के सपूत को राहगीरों ने भी श्रद्धांजलि दी। शहीद का पार्थिव शरीर लेकर सैन्य वाहन जहां-जहां से गुजरा, रास्तों के किनारे खड़े लोगों ने सिर झुकाकर उन्हें सलामी दी।

मेयर पहुंचे पर नहीं आए विधायक, अफसर

शहीद को सलामी देने स्थानीय लोगों व रिश्तेदारों के अलावा मेयर गणेश केशरवानी भी पहुंचे। उन्होंने परिजनों को ढांढस बंधाया और कहा कि कमांडेंट सौरभ ने देश की सेवा करते हुए अपना बलिदान दिया, जिसे कभी नहीं भुलाया जा सकेगा। चौंकाने वाली बात यह रही कि मेयर के अलावा कोई विधायक, अफसर वहां नहीं पहुंचा।

जाते वक्त बोले थे, जल्द आऊंगा

मामा गजेंद्र यादव ने बताया कि सौरभ आखिरी बार नवंबर में घर आए थे। भाई की शादी में शामिल होने के लिए वह पहुंचे थे। दो दिसंबर को वापस गए। जाते वक्त कहा था कि जल्द ही फिर आऊंगा लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। शहीद को श्रद्धांजलि देने उनके कौशाम्बी के अलीगंज, कोखराज स्थित पैतृक गांव से भी रिश्तेदार व बड़ी संख्या में ग्रामीण भी पहुंचे।

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