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Prayagraj News: तबलीगी जमात से लौटे युवकों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द
Wed, 23 Sep 2026 02:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Wed, 23 Sep 2026 02:38 AM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जौनपुर जिले के शाहगंज थाने में दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन मरकज से लौटे दो युवकों फैजान और एक अन्य के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले की पूरी कार्यवाही को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी की एकल पीठ ने याचिकाकर्ताओं की याचिका को स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट में लंबित मामले में दर्ज चार्जशीट और संज्ञान आदेश को खारिज कर दिया।
शाहगंज थाने के तत्कालीन प्रभारी ने वर्ष 2020 में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि दोनों आरोपी दिल्ली में आयोजित तबलीगी जमात से लौटने के बाद अपने घर में छिपकर रह रहे हैं। इससे कोरोना महामारी फैलने की आशंका है। पुलिस ने सरकारी आदेश के उल्लंघन, बीमारी फैलाने वाली लापरवाही और हत्या के प्रयास व अन्य आरोप में मामला दर्ज कर जांच के बाद चार्जशीट दाखिल कर दी गई थी।
ट्रायल कोर्ट ने आरोप पत्र का संज्ञान लेकर समन जारी किया था। याची ने मुकदमे की पूरी कार्यवाही रद्द करने की मांग में हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याची अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ताओं का कोरोना टेस्ट कराया गया था जिसकी रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। इसके बावजूद पुलिस ने केवल आशंका और अनुमान के आधार पर जल्दबाजी में चार्जशीट दाखिल कर दी और ट्रायल कोर्ट ने संज्ञान भी ले लिया।
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हाईकोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि मामला केवल इस आशंका पर दर्ज किया गया था कि आरोपी कोरोना संक्रमित हो सकते हैं, जबकि उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई। अदालत ने माना कि यह मामला दुर्भावनापूर्ण इरादे और केवल अनुमानों के आधार पर दर्ज किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध भजन लाल और प्रशांत भारती मामलों के नजीर का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में कार्यवाही जारी रखना अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। इसी के साथ कोर्ट ने पूरी कार्यवाही रद्द कर दी।
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शाहगंज थाने के तत्कालीन प्रभारी ने वर्ष 2020 में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि दोनों आरोपी दिल्ली में आयोजित तबलीगी जमात से लौटने के बाद अपने घर में छिपकर रह रहे हैं। इससे कोरोना महामारी फैलने की आशंका है। पुलिस ने सरकारी आदेश के उल्लंघन, बीमारी फैलाने वाली लापरवाही और हत्या के प्रयास व अन्य आरोप में मामला दर्ज कर जांच के बाद चार्जशीट दाखिल कर दी गई थी।
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ट्रायल कोर्ट ने आरोप पत्र का संज्ञान लेकर समन जारी किया था। याची ने मुकदमे की पूरी कार्यवाही रद्द करने की मांग में हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याची अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ताओं का कोरोना टेस्ट कराया गया था जिसकी रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। इसके बावजूद पुलिस ने केवल आशंका और अनुमान के आधार पर जल्दबाजी में चार्जशीट दाखिल कर दी और ट्रायल कोर्ट ने संज्ञान भी ले लिया।
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हाईकोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि मामला केवल इस आशंका पर दर्ज किया गया था कि आरोपी कोरोना संक्रमित हो सकते हैं, जबकि उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई। अदालत ने माना कि यह मामला दुर्भावनापूर्ण इरादे और केवल अनुमानों के आधार पर दर्ज किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध भजन लाल और प्रशांत भारती मामलों के नजीर का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में कार्यवाही जारी रखना अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। इसी के साथ कोर्ट ने पूरी कार्यवाही रद्द कर दी।