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बेरहमी से दो कत्ल मगर पड़ोसियों को भनक नहीं

Fri, 18 Aug 2017 01:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Fri, 18 Aug 2017 01:41 AM IST
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Two murderers ruthlessly but neighbors do not know
इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
बीडीसी सदस्य संतोषी देवी पटेल और उनके पति जीतेंद्र पटेल को घर के पीछे खुले में सोते समय बेरहमी से कत्ल कर दिया गया लेकिन रात के सन्नाटे में भी किसी को उनकी चीख नहीं सुनाई दी। पुलिस को भी यह बात अजीब लग रही है। आसपास कई घर हैं मगर पड़ोसियों का कहना है कि उन्हें न तो चीख सुनाई दी न तो भनक लगी। पड़ोस में रहने वाले राजू सरोज ने कहा कि कब कत्ल हो गया, किसी को पता नहीं चला जबकि कुछ और लोग घर के बाहर सोए थे। पुलिस मान रही है कि सिर पर रम्भा से घातक वार की वजह से संतोषी और जीतेंद्र की चीख भी नहीं निकल सकी। बेहोश होने के बाद लगातार कई वार से उनकी मौत हो गई।
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घटनास्थल पर पुलिस के साथ ही क्राइम ब्रांच ने भी छानबीन की। पुलिस का दावा है कि यह सुनियोजित कत्ल की वारदात है। दंपति घर में ताला लगाकर बाहर चारपायी पर सोए थे। उनके दोनों मोबाइल बरामद हुए हैं। घर में ताला भी यथावत लगा था। ऐसे में साफ है कि इस घटना के पीछे कत्ल ही इरादा था। गांव वालों से बात की गई लेकिन फिलहाल कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है। दो-तीन संदिग्ध लोग नजर में हैं। संतोषी देवी बीडीसी सदस्य थीं इसलिए तमाम लोगों से उनका मिलना-जुलना था। कहीं किसी से उनका विवाद तो नहीं था? इस बारे में भी जांच की जा रही है।
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उनके मोबाइल की कॉल डिटेल भी हासिल की जाएगी। संपत्ति का या कोई और मसला सामने नहीं आया है। ग्राम प्रधान मोहम्मद फारूख ने कहा कि उनका जीतेंद्र से मिलना-जुलना नहीं था लेकिन लोगों ने बताया है कि वह सीधे स्वभाव का था। मां-बाप की मौत से दोनों बेटे नीरज और धीरज सदमे में डूबे हैं। वैसे भी अभी वे नाबालिग हैं इसलिए उनसे कोई खास जानकारी मिलने की उम्मीद भी नहीं है। जीतेंद्र के बड़े भाई बनवारी भी किसी से रंजिश नहीं बता सके हैं। उनकी तहरीर पर अज्ञात कातिलों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
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माता-पिता के कत्ल की खबर पाकर जीआईसी के हॉस्टल से आया बड़ा बेटा नीरज शव देखकर बदहवास हो गया। वह मां के शव से लिपटकर देर तक रोता रहा। उसके विलाप ने हर किसी को दुखी कर दिया। गांव की महिलाएं भी रोने लगीं। कातिलों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए नीरज ने शव उठाने से रोका तो पुलिसवाले उसे समझाने का प्रयास करने लगे। एसएसपी आनंद कुलकर्णी और दूसरे अफसर भी लोगों को समझाने में जुट गए। इसी बीच पुलिस अफसर बेटे नीरज को बुलाकर घर के भीतर ले गए तो पुलिस ने आनन-फानन में शवों को चादर समेत उठाकर एंबुलेंस में रख दिया। खुद एसएसपी और क्राइम ब्रांच के लोग शवों को फौरन हटाने में जुट गए थे। इसी दौरान एसडीएम सोरांव की ग्रामीणों से झड़प हो गई थी। लोगों में आक्रोश के चलते एसडीएम को वहां से हटना पड़ गया।

दंपति की हत्या से उनके दो बेटे नीरज और धीरज मुसीबत में आ गए। कक्षा नौ का छात्र नीरज 16 साल है जबकि उससे छोटा धीरज अभी 10 ही वर्ष का है। वे दोनों शवों के पास बैठकर रोते रहे। रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने मौके पर आए सोरांव विधायक जमुना प्रसाद सरोज और पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि बेटों को सरकार से 20 लाख रुपये मुआवजा, 10 बीघा जमीन का पट्टा, बड़े बेटे नीरज के 18 साल का होने पर सरकारी नौकरी तथा शस्त्र लाइसेंस दिलाया जाए। इस मांग पर ग्रामीणों और अफसरों तथा नेताओं के बीच झड़प की स्थिति बन गई। शव जबरन उठाए जाने पर महिलाएं प्रशासन मुर्दाबाद के नारे लगाने लगीं तो अपना दल (एस) के जिलाध्यक्ष जवाहर पटेल तथा बसपा के जोनल कोआर्डिनेटर अजय पासी ने भी ग्रामीणों का पक्ष लेते हुए मुआवजा पर सहमति जताई।


अपना दल (एस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष सिंह शाम को पोस्टमार्टम हाऊस पहुंचे और परिजनों से मिलकर उन्हें सांत्वना दी। वहां डीएम संजय कुमार और एसएसपी आनंद कुलकर्णी भी आ गए। दोनों अधिकारियों से कहा गया कि सोरांव इलाके में पहले भी पटेल बिरादरी के लोगों के कत्ल की कई घटनाएं हो चुकी हैं। मगर न तो सही जांच की गई और न गिरफ्तारी। पन्नालाल पटेल समेत दूसरे हत्याकांड की नए सिरे से जांच और अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। डीएम ने पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिलाने और बेटों की सुरक्षा में सिपाहियों की तैनाती पर सहमति जाहिर की। 
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