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डेढ़ साल की मासूम को कुएं में फेंक मार डाला
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 31 Jul 2015 02:01 AM IST
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मेजा(इलाहाबाद)। यमुनापार के मेजा इलाके में नौ दिन पहले घर के सामने चारपाई पर सोते में लापता डेढ़ माह की बच्ची का शव बृहस्पतिवार को पुराने कुएं में मिलने से कोहराम मच गया। अंदेशा है कि बच्ची को बिस्तर से उठाकर किसी ने घर से काफी दूर झाड़ियों के बीच स्थित कुएं में फेंक दिया था। खबर पाकर मौके पर पहुंची मेजा पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेजा और जांच शुरू की। अभी कातिल का सुराग नहीं मिला है।
मेजा में बकचूंदा गांव निवासी रामफल का ब्याह करीब तीन साल पहले पूनम के साथ किया गया था। रामफल बंगलूरू में नौकरी करता है। डेढ़ साल पहले उसकी पत्नी पूनम ने बच्ची को जन्म दिया था, जिसका नाम पिंकी रखा गया। बेटी के साथ पूनम यहीं ससुराल में रहती थी। 21 जुलाई की रात वह घर के बाहर चारपाई पर बच्ची के साथ लेटी थी तभी अंदर कमरे में रखे मोबाइल की घंटी बजी। वह मोबाइल पर बात करने चली गई। फोन पति रामफल का था। बमुश्किल दो मिनट बाद पूनम बाहर लौटी तो चारपाई पर बच्ची नहीं थी। पूनम ने आसपास खोजा, कई घरों में जाकर पूछा लेकिन पिंकी नहीं मिली। सुबह पूरा गांव खोजने में जुटा मगर कुछ पता नहीं चल सका। दो दिन बाद बंगलूरू से रामफल भी आ गया। उसने मेजा थाने में बच्ची के गुम होने की सूचना दर्ज कराई। पिंकी का लापता होना रहस्यमय बना था। पूनम हर वक्त बेटी के मिलने का इंतजार करती रहती।
बृहस्पतिवार सुबह किसी ने रामफल के घर से करीब दो सौ मीटर दूर स्थित पुराने कुएं में बदबू की वजह से झांका तो शव उतराता नजर आया। वहां भीड़ लग गई। कुआं झाड़ियों और सरपत से घिरा है। खबर पाकर सिरसा चौकी प्रभारी अजय विक्रम सिंह पहुंच गए। शव को बाहर निकाला गया तो रामफल और पूनम रोने-कलपने लगा। वह लापता पिंकी की लाश थी। शव देख हर कोई स्तब्ध रह गया। बच्ची को आखिर किसने और क्यों मार डाला। यह पूनम और रामफल भी नहीं बता पा रहे हैं। उनका कहना है कि किसी से उनकी खुन्नस या रंजिश नहीं है। पूनम ने बताया कि दो दिन पहले उसके खेत में जिंदा मुर्गा दफन मिला था। ऐसे में यह भी शक है कि किसी ने बच्ची को बलि के चक्कर में तो नहीं मारा। पुलिस छानबीन कर रही है।
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मेजा में बकचूंदा गांव निवासी रामफल का ब्याह करीब तीन साल पहले पूनम के साथ किया गया था। रामफल बंगलूरू में नौकरी करता है। डेढ़ साल पहले उसकी पत्नी पूनम ने बच्ची को जन्म दिया था, जिसका नाम पिंकी रखा गया। बेटी के साथ पूनम यहीं ससुराल में रहती थी। 21 जुलाई की रात वह घर के बाहर चारपाई पर बच्ची के साथ लेटी थी तभी अंदर कमरे में रखे मोबाइल की घंटी बजी। वह मोबाइल पर बात करने चली गई। फोन पति रामफल का था। बमुश्किल दो मिनट बाद पूनम बाहर लौटी तो चारपाई पर बच्ची नहीं थी। पूनम ने आसपास खोजा, कई घरों में जाकर पूछा लेकिन पिंकी नहीं मिली। सुबह पूरा गांव खोजने में जुटा मगर कुछ पता नहीं चल सका। दो दिन बाद बंगलूरू से रामफल भी आ गया। उसने मेजा थाने में बच्ची के गुम होने की सूचना दर्ज कराई। पिंकी का लापता होना रहस्यमय बना था। पूनम हर वक्त बेटी के मिलने का इंतजार करती रहती।
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बृहस्पतिवार सुबह किसी ने रामफल के घर से करीब दो सौ मीटर दूर स्थित पुराने कुएं में बदबू की वजह से झांका तो शव उतराता नजर आया। वहां भीड़ लग गई। कुआं झाड़ियों और सरपत से घिरा है। खबर पाकर सिरसा चौकी प्रभारी अजय विक्रम सिंह पहुंच गए। शव को बाहर निकाला गया तो रामफल और पूनम रोने-कलपने लगा। वह लापता पिंकी की लाश थी। शव देख हर कोई स्तब्ध रह गया। बच्ची को आखिर किसने और क्यों मार डाला। यह पूनम और रामफल भी नहीं बता पा रहे हैं। उनका कहना है कि किसी से उनकी खुन्नस या रंजिश नहीं है। पूनम ने बताया कि दो दिन पहले उसके खेत में जिंदा मुर्गा दफन मिला था। ऐसे में यह भी शक है कि किसी ने बच्ची को बलि के चक्कर में तो नहीं मारा। पुलिस छानबीन कर रही है।
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