{"_id":"586179ad4f1c1b8940eec1bb","slug":"the-young-man-lives-plagued-by-unemployment-and-strife","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेरोजगारी और कलह से त्रस्त युवक ने दी जान","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
बेरोजगारी और कलह से त्रस्त युवक ने दी जान
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 27 Dec 2016 02:04 AM IST
विज्ञापन
फाइनेंसर सुसाइड
- फोटो : bureau
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शहर के अल्लापुर इलाके में रहने वाले पोस्टमास्टर के 30 वर्षीय पुत्र नरेंद्र कुमार शुक्ला ने बेरोजगारी और घरेलू कलह से निराश होकर आत्महत्या कर ली। उसने सोमवार सुबह जहर खा लिया। अस्पताल ले जाने पर कुछ समय बाद उसकी सांस थम गई। उसकी मौत से परिवार के लोगों को आघात पहुंचा है।
मूल रूप से यमुनापार में कोरांव निवासी रमेशचंद्र शुक्ला पोस्टमास्टर हैं। उनका परिवार शहर के अल्लापुर में रहता है। उनके तीन बेटों और एक बेटी में सबसे छोटे नरेंद्र शुक्ला (30) ने सोमवार सुबह घर में जहर निगल लिया। हालत बिगड़ने पर उसे करीब पौने ग्यारह बजे एसआरएन अस्पताल ले जाया गया। वहां इलाज के दौरान कुछ देर बाद नरेंद्र ने दम तोड़ दिया। उसकी मौत ने माता-पिता के साथ ही पत्नी अंजना को गहरा सदमा दिया। नरेंद्र का ब्याह पांच साल पहले किया गया था।
उसकी एक बेटी भी है। परिजनों से बातचीत में पता चला कि वह नौकरी के लिए परेशान था। दो-तीन जगह नौकरी की लेकिन टिक नहीं सका। ऐसे में उसके लिए पत्नी-बेटी के साथ गुजारा कर पाना मुश्किल हो रहा था। यही घरेलू कलह की वजह बन गई थी। अनुमान है कि नरेंद्र ने इसी कारण मौत गले लगाने का फैसला कर लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
मूल रूप से यमुनापार में कोरांव निवासी रमेशचंद्र शुक्ला पोस्टमास्टर हैं। उनका परिवार शहर के अल्लापुर में रहता है। उनके तीन बेटों और एक बेटी में सबसे छोटे नरेंद्र शुक्ला (30) ने सोमवार सुबह घर में जहर निगल लिया। हालत बिगड़ने पर उसे करीब पौने ग्यारह बजे एसआरएन अस्पताल ले जाया गया। वहां इलाज के दौरान कुछ देर बाद नरेंद्र ने दम तोड़ दिया। उसकी मौत ने माता-पिता के साथ ही पत्नी अंजना को गहरा सदमा दिया। नरेंद्र का ब्याह पांच साल पहले किया गया था।
विज्ञापन
उसकी एक बेटी भी है। परिजनों से बातचीत में पता चला कि वह नौकरी के लिए परेशान था। दो-तीन जगह नौकरी की लेकिन टिक नहीं सका। ऐसे में उसके लिए पत्नी-बेटी के साथ गुजारा कर पाना मुश्किल हो रहा था। यही घरेलू कलह की वजह बन गई थी। अनुमान है कि नरेंद्र ने इसी कारण मौत गले लगाने का फैसला कर लिया।
विज्ञापन