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जमाकर्ताओं का करोड़ों रुपये समेटकर कंपनी फरार

Sun, 25 Feb 2018 01:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sun, 25 Feb 2018 01:45 AM IST
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The depositor's crores of rupees worth the company are absconding.
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पांच साल में रकम दोगुना करने का झांसा देकर कंपनी उपभोक्ताओं का करोड़ों रुपये समेटकर फरार हो गई। जालसाजी की शुरुआत 2010 में हुई और पांच सालों तक सैकड़ों लोगों के लाखों रुपये कंपनी ने जमा किए। जब 2016 में पैसा देने का वक्त आया तो कंपनी सिविल लाइंस के अपने दफ्तर पर ताला बंद कर भाग गई। हैरत तो यह है कि दो साल से लाखों गंवा चुके पीड़ित रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए दौड़ते रहे। अब जाकर पीएनबी घोटाला जब सुर्खियां बना तो शासन के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज की गई है।
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त्रिवेणी प्रसाद पुत्र लालमणि मिश्र हंडिया के पैगहा गांव के रहने वाले हैं। उनका आरोप है कि स्काई लार्क लैंड डेवलपर्स एंड इंफ्रास्ट्रक्चर, स्काई लार्क इंफ्राकॉन इंडिया लिमिटेड, कुलाक मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड आदि एक ही कंपनी के अलग-अलग नाम हैं। इसका मुख्यालय दिल्ली में है। जून 2010 में इस कंपनी ने सिविल लाइंस स्थित टीबी सप्रू मार्ग पर कार्यालय खोला। आरोप है कि कंपनी की ओर से यह कहकर लोगों से धन जमा कराया जाता था कि पांच साल तीन महीने में रकम दोगुनी हो जाएगी। इसके अलावा आरडी के नाम पर भी लोगों से एक से 15 साल तक की योजना के नाम पर रुपये जमा कराए गए। त्रिवेणी ने बताया कि एक परिचित के माध्यम से वह 2011 में कंपनी से जुड़े और सैकड़ों लोगों से विभिन्न अवधि की योजनाओं में करीब 60 लाख रुपये जमा कराए। हंडिया के ही गुलाबधर पांडेय, सुधीर कुमार श्रीवास्तव और अश्वनी कुमार पांडेय का भी आरोप हे कि उन्होंने भी त्रिवेणी की तरह कई लोगों से लाखों रुपये कंपनी में जमा करा दिए। आरोप है कि दिसंबर 2016 में परिपक्वता के बाद जब वह रुपये वापस मांगने पहुंचे तो पता चला कि कंपनी रुपये समेटकर फरार हो गई है। कार्यालय में ताला लटकता मिला।
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भुक्तभोगियों का आरोप है कि वह मामले की शिकायत लेकर तमाम अफसरों की चौखट तक गए लेकिन सुनवाई नहीं हुई। एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय भटकाया जाता रहा। महीनों भटकने के बाद उन्होंने लखनऊ पहुंचकर भाजपा पदाधिकारियों से शिकायत की। विधायकों ने जिम्मेदारों तक बात पहुंचाई तो शासनसे दबाव पड़ा। एसएसपी आकाश कुलहरि के निर्देश के बाद सिविल लाइंस पुलिस ने शुक्रवार को मामला दर्ज किया।
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भुक्तभोगियों ने पुलिस को तहरीर देकर कंपनी के नौ लोगों पर रिपोर्ट दर्ज कराई है। इनमें कंपनी से जुड़े दुर्गा प्रसाद यादव, जयहिंद कुमार, आनंद कुमार गुप्ता, महेंद्र कुमार विश्वकर्मा, अनिल कुमार जैन, प्रदीप कुमार सिंह, मंगला प्रसाद विश्वकर्मा, महेंद्र कुमार यादव और रमाशंकर यादव शामिल हैं। इनमें से तीन आरोपी वाराणसी के रहने वाले हैं जबकि अन्य आरोपियों का पता अज्ञात है। मामले में इंस्पेक्टर सिविल लाइंस का कहना है कि मामला पुराना है। एसएसपी के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। जांच की जा रही है। 
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