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सीबीआई जांच के बाद आरपीएफ इंस्पेक्टर सस्पेंड
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 31 Aug 2018 02:05 AM IST
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औचक निरीक्षण का हवाला देकर फर्जी सीआईडी इंस्पेक्टर दुकानदारों से दो हजार रुपये तक ऐंठ रहा था।
- फोटो : Demo Pic
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आखिरकार आरपीएफ इंस्पेक्टर संजय पांडेय पर निलंबन की गाज गिर ही गई। आय से अधिक संपत्ति मामले में सीबीआई द्वारा जांच करने के बाद रेलवे बोर्ड के डीजी आरपीएफ धर्मेंद्र कुमार ने उन्हें निलंबित करने का निर्देश बृहस्पतिवार को दिया। अब निलंबन के बाद संजय को झांसी भेजा जा रहा है। इस दौरान वहीं पर उनकी नियमित रूप से हाजिरी होगी। ताकि इलाहाबाद में चल रही जांच के दौरान वह किसी तरह का व्यवधान उत्पन्न न कर सकें। फिलहाल, अभी सीबीआई ने जांच रिपोर्ट नहीं सौंपी है।
दरअसल, सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच को आरपीएफ इंस्पेक्टर संजय पांडेय द्वारा दस वर्षों के दौरान आय के स्त्रोत से कहीं अधिक व्यय किए जाने की शिकायत मिली थी। इसके बाद सीबीआई ने मंगलवार 28 अगस्त को इंस्पेक्टर के इलाहाबाद, गोंडा व लखनऊ में कुल पांच ठिकानों पर छापामारी कर उसकी चल-अचल संपत्ति से संबंधित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए। इस मामले की तफ्तीश सीबीआई की एंटी करप्शन के डीएसपी पीके श्रीवास्तव कर रहे हैं। इसके अलावा सीबीआई ने मंगलवार को ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया था। आरोपी इंस्पेक्टर के पास आय के ज्ञात श्रोतों से 86, 01, 844 रुपये की अतिरिक्त संपत्ति का खुलासा सीबीआई ने किया।
बृहस्पतिवार को बोर्ड के डीजी आरपीएफ ने संजय पांडेय को सस्पेंड करने का निर्देश दिया। हालांकि, अभी उनका लिखित आदेश अफसरों को नहीं मिला है। इस बारे में एनसीआर के प्रमुख मुख्य सुरक्षा आयुक्त सुनील कुमार सिंह का कहना है कि डीजी के निर्देश पर संजय को सस्पेंड किया गया है। उन्हें झांसी भेजा जा रहा है। निलंबन की अवधि में झांसी में ही संजय को रोज दफ्तर जाकर अपनी हाजिरी देनी होगी। उन्होंने कहा कि अभी सीबीआई की जांच रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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आरपीएफ इंस्पेक्टर संजय पांडेय की इलाहाबाद, गोंडा, लखनऊ आदि स्थानों पर आय से ज्यादा संपत्ति की शिकायत किसी आरपीएफ कर्मी द्वारा ही किए जाने की चर्चा मुख्यालय में है। कुछ वरिष्ठ अफसरों को शिकायत कर्ता का नाम भी मालूम है, लेकिन सीबीआई तक मामला पहुंच जाने की वजह से तमाम अफसरों ने चुप्पी साध रखी है। बताया जा रहा है कि एक सेवानिवृत्त सीनियर अफसर ने ही कुछ सहयोगियों की मदद से संजय पांडेय की आय से अधिक संपत्ति होने की शिकायत सीबीआई में की थी। इसमें जंक्शन पर तैनात रहे एक इंस्पेक्टर का भी उन्होंने सहयोग लिया था।
आरपीएफ में वर्ष 2006 में इंस्पेक्टर बनने के बाद से संजय पांडेय पिछले 12 साल से एनसीआर में ही तैनात है। इन 12 वर्षों में से छह वर्ष का संजय का कार्यकाल इलाहाबाद का ही रहा। इस दौरान आरपीएफ इंस्पेक्टर की तमाम शिकायतें वरिष्ठ अफसरों को मिली। तमाम शिकायतों के बाद भी संजय को जोन से नहीं हटाया गया।
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दरअसल, सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच को आरपीएफ इंस्पेक्टर संजय पांडेय द्वारा दस वर्षों के दौरान आय के स्त्रोत से कहीं अधिक व्यय किए जाने की शिकायत मिली थी। इसके बाद सीबीआई ने मंगलवार 28 अगस्त को इंस्पेक्टर के इलाहाबाद, गोंडा व लखनऊ में कुल पांच ठिकानों पर छापामारी कर उसकी चल-अचल संपत्ति से संबंधित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए। इस मामले की तफ्तीश सीबीआई की एंटी करप्शन के डीएसपी पीके श्रीवास्तव कर रहे हैं। इसके अलावा सीबीआई ने मंगलवार को ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया था। आरोपी इंस्पेक्टर के पास आय के ज्ञात श्रोतों से 86, 01, 844 रुपये की अतिरिक्त संपत्ति का खुलासा सीबीआई ने किया।
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बृहस्पतिवार को बोर्ड के डीजी आरपीएफ ने संजय पांडेय को सस्पेंड करने का निर्देश दिया। हालांकि, अभी उनका लिखित आदेश अफसरों को नहीं मिला है। इस बारे में एनसीआर के प्रमुख मुख्य सुरक्षा आयुक्त सुनील कुमार सिंह का कहना है कि डीजी के निर्देश पर संजय को सस्पेंड किया गया है। उन्हें झांसी भेजा जा रहा है। निलंबन की अवधि में झांसी में ही संजय को रोज दफ्तर जाकर अपनी हाजिरी देनी होगी। उन्होंने कहा कि अभी सीबीआई की जांच रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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आरपीएफ इंस्पेक्टर संजय पांडेय की इलाहाबाद, गोंडा, लखनऊ आदि स्थानों पर आय से ज्यादा संपत्ति की शिकायत किसी आरपीएफ कर्मी द्वारा ही किए जाने की चर्चा मुख्यालय में है। कुछ वरिष्ठ अफसरों को शिकायत कर्ता का नाम भी मालूम है, लेकिन सीबीआई तक मामला पहुंच जाने की वजह से तमाम अफसरों ने चुप्पी साध रखी है। बताया जा रहा है कि एक सेवानिवृत्त सीनियर अफसर ने ही कुछ सहयोगियों की मदद से संजय पांडेय की आय से अधिक संपत्ति होने की शिकायत सीबीआई में की थी। इसमें जंक्शन पर तैनात रहे एक इंस्पेक्टर का भी उन्होंने सहयोग लिया था।
आरपीएफ में वर्ष 2006 में इंस्पेक्टर बनने के बाद से संजय पांडेय पिछले 12 साल से एनसीआर में ही तैनात है। इन 12 वर्षों में से छह वर्ष का संजय का कार्यकाल इलाहाबाद का ही रहा। इस दौरान आरपीएफ इंस्पेक्टर की तमाम शिकायतें वरिष्ठ अफसरों को मिली। तमाम शिकायतों के बाद भी संजय को जोन से नहीं हटाया गया।