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भूख से तड़पकर राम ने तोड़ दिया दम
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 08 Aug 2016 01:50 AM IST
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भूख से तड़पकर मौत
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
राम किशोर, उसकी पत्नी और दो बच्चे तीन दिनों तक भूख तक से तड़पते और लड़ते रहे लेकिन राम इस जंग में हार गया और आखिरकार दम तोड़ दिया। अफसरों को इसकी भनक लगी तो आनन-फानन में रात के वक्त राशन से भरा एक बोरा घर में रख दिया गया। परिवार के पास राम का अंतिम संस्कार करने के लिए पैसा नहीं था, सो उसे घर के सामने ही दफना दिया। भूख से मौत का यह मामला सोरांव तहसील के भोपतपुर गांव है लेकिन हमेशा की तरह इस बार भी अफसर मानने को तैयार नहीं कि राम की मौत भूख से हुई। उनका दावा है कि मौत की वजह बीमारी है।
राम किशोर (65), उसकी पत्नी बरन देवी, पुत्र किशन (26) और पुत्री निशा (12) भोपतपुर गांव में दो कमरों के मकान में रहते हैं। पक्के मकान में रहने वाले इस परिवार को भीख मांगकर अपना पेट पालना पड़ रहा है। उनके पास न जमीन है और न ही आय का कोई जरिया। कई साल पहले डेढ़ बीघा जमीन थी लेकिन तंगहाली में औने-पौने दाम पर जमीन बेच दी और जो रकम मिली उससे दो कमरे का मकान बनवा लिया। मकान के आधे हिस्से पर किसी ने कब्जा कर लिया।
राम किशोर के पास आय का कोई जरिया नहीं था। पूरा परिवार भीख मांगकर पेट पालने लगा। राम की पत्नी बरन देवी ने बताया कि तीन दिन से भीख नहीं मिली थी। घर में अन्न का एक दाना नहीं था। पूरा परिवार भूख से लड़ रहा था। राम किशोर की हालत ज्यादा बिगड़ गई और शनिवार देर रात राम ने दम तोड़ दिया। परिवार के पास इतना पैसा भी नहीं था कि उसका अंतिम संस्कार कर सके, सो शव को घर के सामने ही दफना दिया गया। बरन देवी का कहना है कि परिवार के पास कोई राशन कार्ड नहीं है और न ही कभी किसी सरकारी योजना का लाभ मिला है। पति की मौत के बाद देर रात कुछ लोग आए और घर में एक बोरा राशन रखकर चले गए।
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‘राम किशोर की मौत की सूचना मिली थी। इसकी जांच कराई गई। मौत भूख से नहीं, बल्कि बीमारी की वजह से हुई है।’ बृजेंद्र कुमार द्विवेदी, एसडीएम सोरांव
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राम किशोर (65), उसकी पत्नी बरन देवी, पुत्र किशन (26) और पुत्री निशा (12) भोपतपुर गांव में दो कमरों के मकान में रहते हैं। पक्के मकान में रहने वाले इस परिवार को भीख मांगकर अपना पेट पालना पड़ रहा है। उनके पास न जमीन है और न ही आय का कोई जरिया। कई साल पहले डेढ़ बीघा जमीन थी लेकिन तंगहाली में औने-पौने दाम पर जमीन बेच दी और जो रकम मिली उससे दो कमरे का मकान बनवा लिया। मकान के आधे हिस्से पर किसी ने कब्जा कर लिया।
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राम किशोर के पास आय का कोई जरिया नहीं था। पूरा परिवार भीख मांगकर पेट पालने लगा। राम की पत्नी बरन देवी ने बताया कि तीन दिन से भीख नहीं मिली थी। घर में अन्न का एक दाना नहीं था। पूरा परिवार भूख से लड़ रहा था। राम किशोर की हालत ज्यादा बिगड़ गई और शनिवार देर रात राम ने दम तोड़ दिया। परिवार के पास इतना पैसा भी नहीं था कि उसका अंतिम संस्कार कर सके, सो शव को घर के सामने ही दफना दिया गया। बरन देवी का कहना है कि परिवार के पास कोई राशन कार्ड नहीं है और न ही कभी किसी सरकारी योजना का लाभ मिला है। पति की मौत के बाद देर रात कुछ लोग आए और घर में एक बोरा राशन रखकर चले गए।
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‘राम किशोर की मौत की सूचना मिली थी। इसकी जांच कराई गई। मौत भूख से नहीं, बल्कि बीमारी की वजह से हुई है।’ बृजेंद्र कुमार द्विवेदी, एसडीएम सोरांव