फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Police have been sold so I am giving life

पुलिस बिक चुकी है इसलिए दे रहा हूं मैं जान

Wed, 13 Apr 2016 01:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Wed, 13 Apr 2016 01:21 AM IST
विज्ञापन
Police have been sold so I am giving life
गंगा - फोटो : अमर उजाला
पुलिस के उत्पीड़न के चलते एक युवक को अपनी जान गंवानी पड़ी है। नैनी के विश्व बैंक कॉलोनी में फांसी लगाने वाले युवक शमीम अहमद ने सुसाइड नोट में लिखा है कि वह पुलिस की प्रताड़ना की वजह से आत्महत्या कर रहा है जबकि वह यूं मरना नहीं चाहता था। मारपीट की एक घटना में उसे फर्जी रूप से नामजद किया गया पर पुलिस ने उसकी सफाई सुनने की बजाय गलत धंधे कर मोटा पैसा पहुंचाने वाले अपराधियों का साथ दिया। उसे थाने में भी धमकाया गया। सुसाइड नोट में सीओ पर भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने भी उसकी बेगुनाही को दरकिनार कर दिया। युवक के पिता ने भी प्रदेश के मुख्य सचिव को प्रार्थनापत्र भेजकर अपने जवान बेटे की मौत के लिए सीधे तौर पर पुलिस को दोषी ठहराया है।
विज्ञापन


नैनी में कांशीराम कॉलोनी के पास विश्व बैंक कॉलोनी में रहने वाले शकील अहमद के तीन बेटों में शमीम अहमद उर्फ शम्मी (24) दूसरे नंबर पर था। बीएससी और आईटीआई करने के बाद उसने शहर के इंदिरा भवन में मोबाइल शॉप खोली थी। होली यानी 23 मार्च का दिन इस परिवार के लिए काला साबित हुआ। शम्मी अपने परिजनों के साथ घर में था। सभी टीवी पर मैच देख रहे थे। तभी अरैल से दो लड़कों ने आकर कांशीराम कॉलोनी में मारपीट की। तमाम लोगों ने लाठी-डंडे ले कर उन दोनों को खदेड़ लिया। दोनों लड़के तो भाग गए लेकिन गलतफहमी में लोगों ने पान खाकर लौट रहे विश्व बैंक कॉलोनी के रामचंद्र रावत से मारपीट कर ली। कॉलोनी के लोग रावत को बचाने को जुटे तो शमीम भी अपने पिता शकील के साथ पहुंच गया।
विज्ञापन


भीड़ लगी तो काशीराम कॉलोनी के लोग लौट गए। मगर उसी दिन शमीम और उसके पड़ोसी नौशाद के खिलाफ ही मारपीट तथा एससी-एसटी का केस लिखा दिया गया। दूसरे रोज शमीम भी पिता के साथ थाने गया लेकिन आरोप है कि पुलिसवालों ने उसे बुरा-भला कहा और जलील किया। यही नहीं, शमीम के खिलाफ मुकदमा लिखाने वाले लोगों ने थाने आकर उसे पुलिसवालों के सामने धमकाया। उसे थाने से भगा दिया गया। शनिवार को सीओ करछना ब्रजनंदन राय ने शमीम को पिता शकील समेत अपने कार्यालय में बुलाया। आरोप है कि सीओ ने उनसे सादे कागज पर दस्तखत करा लिया। बेगुनाही की बात भी नहीं सुनी। दूसरे दिन यानी रविवार को परिवार के लोग रिश्तेदार की शादी में चले गए। शम्मी घर में अकेले था। शाम को कई बार फोन करने पर भी जब उसने कॉल नहीं रिसीव की तो पिता ने पड़ोसी को घर भेजा।
विज्ञापन
विज्ञापन


खिड़की से झांकने पर शम्मी घर में फंदे पर लटका दिखा। दरवाजा खोलकर उसे किसी तरह फंदे से उतार अस्पताल ले जाया गया लेकिन उसकी जान नहीं बची। मंगलवार को शम्मी के बिस्तर को साफ करते समय मां को उसमें दो पन्ने मिले जो असल में शमीम अहमद का सुसाइड नोट था। उसमें शम्मी ने लिखा था कि वह पुलिस से परेशान होकर आत्महत्या कर रहा है क्योंकि पुलिस अपराधियों के हाथों बिक चुकी है। उसकी कोई नहीं सुन रहा है। ऐसे में उसे जान देना पड़ रहा है। पिता शकील ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर गुहार लगाई है कि सच्चाई का पता लगाकर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इस बाबत सीओ करछना ने कहा कि उन्होंने शमीम को बुलाकर बयान लिया था लेकिन अब इस घटना के बाद बिना जांच के वह कुछ नहीं कह सकते हैं।

शम्मी के सुसाइड नोट को पढ़ने पर कलेजा कांप सा उठता है। उसने खुद सुसाइड नोट में हेडिंग दी है-मुझे माफ कर देना! आगे उसने लिखा है-मेरे प्यारे दोस्तों और मेरे रिश्तेदारों आप सभी का मैं गुनहगार हूं जो आज मैं अल्लाह से मिली बेशकीमती जिंदगी खत्म करने जा रहा हूं। पिछले कुछ दिनों में जो कुछ भी हुआ है उससे मैं और मेरा परिवार परेशान है। मैं हमेशा सोचता रहा हूं कि इंसान को ईमानदारी से जीना चाहिए लेकिन इस भ्रष्ट पुलिस सिस्टम से हार गया। 23 मार्च को हुए झगडे़ में मुझे और नौशाद भाई को मुख्य आरोपी बना दिया गया लेकिन पुलिस ने हमारी एक भी न सुनी। लोग टीएसएल कंपनी में चोरी करते हैं तथा उनसे पुलिस को भी मोटी रकम मिलती है। पुलिस चोरी में पूरा सहयोग करती है।

पुलिस एडीए में खुलेआम बीसों जगह कच्ची शराब बिकवाती है। मैं मुख्यमंत्री से पूछना चाहता हूं कि यदि आपके सामने आपके पिता को कोई मारे तो आप क्या करेंगे। पहले मेरे पिता फिर रामचंद्र रावत को 100-150 लोगों ने गालियां देते हुए पीटा। मैं अपने पिता जी को बचाने के लिए गया। बाद में मुझे सीओ करछना के यहां बुलाया गया।  मैंने उन्हें पूरी बात बताई तो वह कहने लगे कि चलो मैं मानता हूं कि तुमने कुछ नहीं किया पर मैं ये आरोप किसके सर पर मढूं। मैं समझ गया कि बड़े अधिकारी सिर्फ खानापूरी कर रहे हैं। पुलिस को उन चोरों से पैसा मिलता है। चोरों के सरदार चंदू ने तो पूरा का पूरा थाना खरीद रखा है। पुलिस उनसे पैसा लेकर हमें फंसाने की कोशिश कर रही है। पापा, मम्मी, दीदी और भाइयों मैं जा रहा हूं। हो सके तो मुझे माफ कर देना। अम्मी मैं तुम्हारा गुनहगार हूं जो तुम्हें छोड़कर जा रहा हूं। आपका प्यारा-शमीम 


‘अगर शमीम ने वास्तव में फर्जी केस में फंसाए जाने पर पुलिस से परेशान होकर आत्महत्या की है तो यह बेहद गंभीर मसला है। इस प्रकरण की किसी सक्षम अधिकारी से जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।’
0जेके शाही, डीआईजी इलाहाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed