पुलिस कस्टडी से फरार अपराधी साथी समेत बंदी
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एसटीएफ फील्ड यूनिट इलाहाबाद के उपनिरीक्षक अतुल सिंह को शुक्रवार शाम मुखबिर से सूचना मिली कि शातिर अपराधी अब्दुल कयूम उर्फ बब्बू करेहा, उर्फ बब्बू पंडित उर्फ हसन अपने एक साथी संग बाइक पर सिविल लाइंस की तरफ आने वाला है। एसटीएफ ने खबर मिलते ही हिंदू हॉस्टल चौराहे के पास घेराबंदी की। दो लोग यामहा बाइक पर उधर आए तो मुखबिर के इशारे पर एसटीएफ ने घेरकर दोनों को पकड़ लिया। तलाशी में उनके कब्जे से एक पिस्टल, तमंचा, कारतूस, मैग्जीन, दो मोबाइल फोन और 13 सौ रुपये नगद बरामद हुए।
गिरफ्तार अपराधियों में बब्बू करेहा और उसका साथी औद्योगिक क्षेत्र में रामपुर गांव का नियाजी अहमद सिद्दीकी है। अब्दुल कयूम उर्फ बब्बू करेहा ने 1975 से अपराध शुरू किया तो लगातार लूट, हत्या, अपहरण, फिरौती, डकैती, नकली नोटों का धंधा करता रहा। वर्ष 2004 में उसने उड़ीसा के सुंदरगढ़ में लोहा कारोबारी को अगवाकर तीन करोड़ रुपये फिरौती वसूली थी। तब वह साथियों समेत पकड़ा गया, लेकिन अगले साल पत्नी के निधन पर वह पेरोल पर छूटकर आया तो फरार हो गया था। दो साल पहले उसे नकली नोटों के साथ घूरपुर पुलिस ने पकड़ा था, लेकिन वह कोर्ट में पेशी के दौरान कस्टडी से फरार हो गया था, क्योंकि उसे दस साल की सजा हो गई थी।
फरारी के दौरान उसने रीवा के अतरौला में हीरा कारोबारी को गोली मारकर लूटा, मगर साथी असलम समेत वहीं पकड़ा गया। साल भर रीवा जेल में रहने के बाद वह बीमारी के बहाने अस्पताल में भर्ती होकर फरार हो गया। अब वह रीवा में लूट के अलावा इलाहाबाद में एक महिला और जेल में बंद अपने एक दुश्मन की हत्या की फिराक में था जो जल्द ही जेल से छूटने वाला है।