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मोटू नहीं, पतले और लंबे शूटरों पर है पूरा ध्यान
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 19 Jan 2017 01:46 AM IST
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बदमाश
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डॉ. एके बंसल हत्याकांड के छह रोज गुजरने के बाद भी पुलिस शूटरों की तलाश में ही इलाहाबाद और आसपास के जिलों में भटक रही है। बदमाशों के हुलिए की ज्यादा जानकारी तो है नहीं। केवल इतना मालूम है कि शूटर और उसका साथी कद में लंबे थे और मोटे-तगड़े भी नहीं थे। इसी वजह से पुलिस इलाहाबाद समेत पूर्वांचल के कद में लंबे अपराधियों पर ध्यान दे रही हैं। मुखबिरों से भी कहा गया है कि वे मोटू नहीं, पतले और लंबे अपराधियों के बारे में ही पता लगाएं।
हत्याकांड के बाद सीसीटीवी फुटेज तथा चश्मदीदों के बयान से शूटरों के बारे में मिली जानकारी से हुलिए के बारे में कुछ भी साफ नहीं हो सका है। महज इतना पता है कि गोलियां मारकर भागे शूटर लंबे थे। एक करीब छह फुट का और दूसरा उससे कुछ इंच कम। एक ने सिर पर मफलर बांध रखा था और दूसरे ने गर्म टोपी पहनी थी। एक के शरीर पर काली पतली जैकेट थी। इतनी सी जानकारी पर एसटीएफ, क्राइम ब्रांच और पुलिस की कई टीम शूटरों की तलाश में लगी हैं।
बुधवार दोपहर एसटीएफ के एक अफसर को किसी दूसरे जिले से फोन आया। फोन करने वाला किसी संदिग्ध शूटर के बारे में बता रहा था। मगर कद काठी पूछने पर जब अफसर को पता चला कि जिस शूटर के बारे में फोन करने वाला बता रहा है वो खासा तंदरुस्त है तो उन्होंने दो टूक कह दिया-मोटा और तंदरुस्त नहीं, लंबे और पतले शरीर वाले शूटरों का पता लगाओ। गदऊ पासी समेत भारी शरीर वाले कई अपराधी इलाहाबाद में हैं मगर शूटरों की कद-काठी में फिट नहीं बैठते हैं।
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एसटीएफ और क्राइम ब्रांच की निगाह शूटरों की तलाश में पूर्वांचल के भदोही, जौनपुर, मिर्जापुर, वाराणसी, बलिया, गाजीपुर तथा बिहार के सीमावर्ती जिलों के शूटरों पर टिकी है तो इसकी दो बड़ी वजह है। पहली वजह है, एक शूटर के सिर पर पगड़ी की तरह मफलर या गमछा बंधा होना। एसटीएफ के बीच आम राय है कि सिर पर गमछे या मफलर को पगड़ी की तरह बांधने का प्रचलन पूर्वांचल के जिलों में ज्यादा है। इलाहाबाद में यूं गमछा सिर पर बांधने का चलन बेहद कम है। इसलिए अंदेशा है कि शूटर पूर्वांचल के हो सकते हैं। दूसरी वजह ये है कि ऐेसे शार्प शूटरों की तादाद पूर्वांचल में अधिक है।
इलाहाबाद में भी पिछले कुछ अरसे के दौरान कत्ल की बड़ी घटनाओं में पूर्वांचल के वाराणसी, गाजीपुर, मिर्जापुर के शूटरों को सुपारी देने का खुलासा हो चुका है। पिछले साल जून में हुए नैनी जेल गेट दोहरे हत्याकांड में भी वाराणसी के शूटरों का हाथ था। रईस बनारसी समेत कई अपराधी इलाहाबाद में फरारी काटने के दौरान वारदात करते रहे हैं। ऐसे में जांच टीम इस घटना में भी पूर्वांचल के शूटरों को भी टटोल रही है लेकिन साथ ही लोकल दो-तीन शूटरों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। एसटीएफ और क्राइम ब्रांच वाराणसी से भी इस बारे में मदद ली जा रही है। वाराणसी एसटीएफ ने ऐसे कई अपराधियों को उठाकर उनकी फोटो यहां एसटीएफ को भेजी है।
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हत्याकांड के बाद सीसीटीवी फुटेज तथा चश्मदीदों के बयान से शूटरों के बारे में मिली जानकारी से हुलिए के बारे में कुछ भी साफ नहीं हो सका है। महज इतना पता है कि गोलियां मारकर भागे शूटर लंबे थे। एक करीब छह फुट का और दूसरा उससे कुछ इंच कम। एक ने सिर पर मफलर बांध रखा था और दूसरे ने गर्म टोपी पहनी थी। एक के शरीर पर काली पतली जैकेट थी। इतनी सी जानकारी पर एसटीएफ, क्राइम ब्रांच और पुलिस की कई टीम शूटरों की तलाश में लगी हैं।
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बुधवार दोपहर एसटीएफ के एक अफसर को किसी दूसरे जिले से फोन आया। फोन करने वाला किसी संदिग्ध शूटर के बारे में बता रहा था। मगर कद काठी पूछने पर जब अफसर को पता चला कि जिस शूटर के बारे में फोन करने वाला बता रहा है वो खासा तंदरुस्त है तो उन्होंने दो टूक कह दिया-मोटा और तंदरुस्त नहीं, लंबे और पतले शरीर वाले शूटरों का पता लगाओ। गदऊ पासी समेत भारी शरीर वाले कई अपराधी इलाहाबाद में हैं मगर शूटरों की कद-काठी में फिट नहीं बैठते हैं।
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एसटीएफ और क्राइम ब्रांच की निगाह शूटरों की तलाश में पूर्वांचल के भदोही, जौनपुर, मिर्जापुर, वाराणसी, बलिया, गाजीपुर तथा बिहार के सीमावर्ती जिलों के शूटरों पर टिकी है तो इसकी दो बड़ी वजह है। पहली वजह है, एक शूटर के सिर पर पगड़ी की तरह मफलर या गमछा बंधा होना। एसटीएफ के बीच आम राय है कि सिर पर गमछे या मफलर को पगड़ी की तरह बांधने का प्रचलन पूर्वांचल के जिलों में ज्यादा है। इलाहाबाद में यूं गमछा सिर पर बांधने का चलन बेहद कम है। इसलिए अंदेशा है कि शूटर पूर्वांचल के हो सकते हैं। दूसरी वजह ये है कि ऐेसे शार्प शूटरों की तादाद पूर्वांचल में अधिक है।
इलाहाबाद में भी पिछले कुछ अरसे के दौरान कत्ल की बड़ी घटनाओं में पूर्वांचल के वाराणसी, गाजीपुर, मिर्जापुर के शूटरों को सुपारी देने का खुलासा हो चुका है। पिछले साल जून में हुए नैनी जेल गेट दोहरे हत्याकांड में भी वाराणसी के शूटरों का हाथ था। रईस बनारसी समेत कई अपराधी इलाहाबाद में फरारी काटने के दौरान वारदात करते रहे हैं। ऐसे में जांच टीम इस घटना में भी पूर्वांचल के शूटरों को भी टटोल रही है लेकिन साथ ही लोकल दो-तीन शूटरों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। एसटीएफ और क्राइम ब्रांच वाराणसी से भी इस बारे में मदद ली जा रही है। वाराणसी एसटीएफ ने ऐसे कई अपराधियों को उठाकर उनकी फोटो यहां एसटीएफ को भेजी है।