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वैभव हुआ इश्क में फना, शव यमुना में मिला

Tue, 07 Mar 2017 01:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Tue, 07 Mar 2017 01:21 AM IST
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Fanaa is splendor in love, body found in river
file photo - फोटो : अमर उजाला
लखनऊ का वैभव इश्क में फना हो गया। सोमवार को उसका शव यमुना में मिल गया। उसके साथ जान देने के लिए कूदी सिमरन (परिवर्तित नाम) बच गई। उसकी हालत अब ठीक है लेकिन आंसुओं की लड़ी रात तक नहीं रुकी थी। घटना की सूचना पाते ही दोनों के घर वाले लखनऊ से इलाहाबाद पहुंच गए। घरवालों को शायद दोनों के संबंधों की जानकारी थी, इसीलिए सिमरन की शादी तय कर दी थी। 10 मार्च को उसकी सगाई थी लेकिन उससे पहले ही दोनों ने दुनिया से दूर चले जाने का निर्णय ले लिया था।
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सिमरन और वैभव दो अलग-अलग जातियों से हैं। सिमरन यादव बिरादरी की तो वैभव अनुसूचित जाति परिवार से था। यही बात उनकी प्रेम कहानी में सबसे बड़ी बाधा बनी। दोनों रहते तो लखनऊ में थे लेकिन एक दूसरे से सामना तब हुआ जब वे बीएड करने के लिए एक ही कॉलेज में पहुंचे। जल्द ही दोनों की दोस्ती हुई। दोस्ती प्यार में बदल गई। दोनों का साथ रहना जब ज्यादा होने लगा तो घर वालों को इसकी भनक लग गई। घरवाले इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं थे। शायद इसी का परिणाम था कि सिमरन की आनन-फानन में शादी तय कर दी गई। 10 मार्च को सगाई की डेट भी घोषित कर दी गई। इसके बाद वैभव और सिमरन ने आत्मघाती निर्णय ले लिया।
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कॉलेज का टूर जाने वाला था। दोनों उसी का सहारा लेकर घर से निकले। वहीं से दोनों चार मार्च को इलाहाबाद पहुंचे। एक दिन वे कहां रहे, इस बारे में किसी को नहीं पता। पांच मार्च की रात एक दूसरे का हाथ पकड़कर वे यमुना में कूद गए। यह देख राहगीरों ने शोर मचाया तो गोताखोर और मल्लाह पानी में कूदे। सिमरन को बचा लिया गया लेकिन वैभव का शव सोमवार दिन में यमुना में मिल गया। दोनों के घर वालों ने इस मामले में रहस्यमय चुप्पी ओढ़ रखी है। इंस्पेक्टर कीडगंज संतोष त्यागी ने बताया कि दोनों ही बड़े परिवारों के हैं। सिमरन के पिता ठेकेदार हैं तो वैभव के पिता उत्तर प्रदेश शासन में अधिकारी रह चुके हैं।
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सिमरन के साथ वैभव को भी बचा लिया जाता लेकिन वह नए पुल के नीचे एक गहरे गड्ढे में चला गया था। जल पुलिस प्रभारी कड़ेदीन यादव ने बताया कि गोताखोरों को उसका शव ढूंढने में पांच घंटे लग गए। उस गड्ढे में जाना गोताखोरों की जान जोखिम में डालने जैसा होता है लेकिन गोताखोरों ने शव को आखिर ढूंढ निकाला।
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