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सीबीआई जांच से हर तरफ मची हलचल

Sun, 24 Jan 2016 01:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो/इलाहाबाद Updated Sun, 24 Jan 2016 01:13 AM IST
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Each side of CBI resembled stir

इलाहाबाद। बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड में सीबीआई जांच के आदेश से अतीक अहमद खेमे में खलबली मची है। अतीक भले ही इस जांच का स्वागत की बात कहते हुए बेफिक्री जता रहे हों लेकिन सच तो यह है कि  उनके करीबियों में खासी हलचल मची है। शनिवार को भी पूरे शहर से ज्यादा शहर पश्चिमी इलाके में अतीक और राजू पाल समर्थकों में हत्याकांड में सीबीआई जांच को लेकर चर्चा होती रही। दरअसल, यह भी संभावना है कि सीबीआई अगर इस कांड की गहराई से तहकीकात करती है तो कुछ नाम हट जाएं और कुछ नए लोगों की भूमिका सामने आए। यही नहीं, अब तक पुलिस और सीआईडी की जांच रिपोर्ट खारिज करते आए हत्या के आरोपियों को ठोस साक्ष्य जुटाए जाने का भी डर सता रहा है।

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ग्यारह साल पुराने बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड में पुलिस और सीआईडी की चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामला ठंडा पड़ा था मगर अब शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से 25 जनवरी 2005 को हुए इस सनसनीखेज वारदात की सीबीआई (केंद्रीय जांच ब्यूरो) से जांच कराने का आदेश जारी होने से फिर मामला चर्चा में आ गया है। शनिवार को अमर उजाला में इस बारे में प्रमुखता से खबरें छपने के बाद पूरे शहर में इस घटना पर लोग बात करते मिले। करबला चकिया में पूर्व सांसद अतीक अहमद और नीवां में दिवगंत राजू पाल की पत्नी बसपा विधायक पूजा पाल के भी कार्यालय पर जुटे लोग इसी बारे में चर्चा करते रहे कि अब सीबीआई जांच शुरू होने पर क्या होगा। 

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अतीक ने तो अमर उजाला से बातचीत में शुक्रवार को ही कह दिया कि उन्हें तो जांच से फायदा होगा क्योंकि वह बेकसूर हैं। उन्होंने सीबीआई जांच का स्वागत किया लेकिन उनके कार्यालय और चकिया इलाके में लोगों में चल रही बातचीत में आशंका भी झलकती दिखी। आशंका यह कि भले ही ग्यारह साल हो गए, ज्यादातर सुबूत खत्म और नष्ट कर दिए गए, कुछ गवाह भी होस्टाइल हो गए लेकिन सीबीआई की छानबीन में अगर नए ढंग से ठोस सुबूत जुटा लिए गए तो? कहीं ऐसा न हो कि साजिश के तार नए सिरे से जोड़कर सीबीआई बेफिक्री जटा रहे आरोपियों को सजा दिलाने में कामयाब हो जाए। 

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दरअसल, पुलिस विभाग में ही चर्चा रही है कि घटना के बाद मौके से पुलिस को एके-47 समेत तमाम प्रतिबंधित बोर के कारतूसों के खोखे मिले थे मगर भारी दबाव में उन खोखों को गायब कर राइफल और बंदूक के ही कुछ खोखे जमा किए गए। राजू पाल की पत्नी पूजा पाल तो यह भी कहती हैं कि पुलिस ने गोलियों की बौछार में क्षतिग्रस्त स्कार्पियो और क्वालिस में हुए सुराखों को भी डैमेज किया ताकि फोरेंसिक तथा बैलेस्टिक जांच में भी कुछ नहीं आ पाए। गवाहों को अगवा कर धमकाया गया। 


मुख्य गवाह उमेश पाल को धूमनगंज से गाड़ी में अगवाकर अतीक के कार्यालय में ले जाकर धमकाया गया था कि वह अपना बयान बदल दें। उधर, पुलिस अफसरों का अनुमान है कि  सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस कांड की जांच के लिए अगले हफ्ते तक सीबीआई टीम इलाहाबाद आ सकती है।


इलाहाबाद। जनवरी 2005 में बसपा विधायक राजू पाल की जीटी रोड पर सनसनीखेज ढंग से हत्या के वक्त यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। आरोप लगा कि सत्ताधारी दल का सांसद होने की वजह से ही सांसद अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ को इस हत्याकांड में नामजद होने के बावजूद कई दिन बाद गिरफ्तार किया गया, वो भी गिरफ्तारी की बजाय सुनियोजित सरेंडर ही था। 


बसपा सप्रीमो मायावती ने भी कहा था कि वह सत्ता में आने पर राजू पाल कत्ल केस के आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगी। मई 2007 में हुए विधानसभा चुनाव में यूपी में बसपा की सरकार काबिज हुई और दिवगंत राजू पाल की पत्नी पूजा पाल भी शहर पश्चिमी से अशरफ को हराककर बसपा विधायक चुनी गईं। नतीजे आने के साथ ही अतीक और अशरफ के साथ ही उनके ज्यादातर करीबी फरार हो गए। 


अगले रोज से ऑपरेशन अतीक भी शुरुू हो गया जो अगले पांच साल तक चलता रहा। अतीक के निवास के साथ ही उनके खास करीबियों की धरपकड़ के लिए छापेमारी होने लगी। संपत्तियां कुर्क कर ली गईं। अवैध निर्माण ढहा दिए गए। करेली में अलीना सिटी पर भी पुलिस-प्रशासन ने बुल्डोजर चला दिया। अतीक और अशरफ को मोस्ट वांटेड इनामिया भगोड़ा अपराधी घोषित कर पुलिस तलाश में भटकती रही। अशरफ के कई हुलिए में स्केच जारी हुए। ऑपरेशन अतीक पूरे यूपी में चर्चा में बना रहा।

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