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बंद रहे निजी अस्पताल, अधिकतर मेडिकल स्टोर
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 15 Jan 2017 01:59 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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डॉ. एके बंसल की हत्या के विरोध में सिटीजन फोरम के आहवान पर शनिवार को इलाहाबाद बंद का मिला-जुला असर रहा। शहर के निजी अस्पतालों की इमरजेंसी समेत सारी सेवाएं ठप रहीं। अधिकतर अस्पतालों पर ताले लटके रहे। ज्यादातर मेडिकल स्टोर भी बंद रहे। निजी प्रैक्टिसनर्स ने इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन के हाल में एकत्र होकर घटना पर आक्रोश जताया। सुभाष चौराहे पर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा। घटना के तीसरे रोज भी रात तक पुलिस डॉक्टर के कातिलों के बारे में खास सुराग नहीं जुटा सकी थी।
डॉ.एके बंसल की हत्या के विरोध में निजी डॉक्टरों की हड़ताल से मरीज दूसरे दिन भी परेशान रहे। ज्यादातर मरीज निजी अस्पतालों में जाने की बजाय बेली, कॉल्विन और स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय पहुंचे। इसके चलते इन तीनों अस्पतालों में ज्यादा भीड़ रही। प्रांतीय चिकित्सा सेवा (पीएमएस) संवर्ग के सदस्य हड़ताल में शामिल नहीं हुए। इसलिए सरकारी अस्पतालों में मरीजों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।
पीएमएस संवर्ग के डॉक्टरों ने हाथों में काली पट्टी बांधकर घटना का विरोध किया और हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग की। निजी अस्पतालों में केवल पहले से भर्ती मरीजों का उपचार हुआ। ओपीडी, इमरजेंसी सेवाएं पूरी तरह से शनिवार को भी ठप रहीं। इससे निजी अस्पतालों मेें सन्नाटा पसरा रहा। उधर, एसटीएफ के एसएसपी अमित पाठक के नेतृत्व में एसटीएफ और क्राइम ब्रांच की टीमें अस्पताल से लेकर डॉक्टर के निवास तक छानबीन में लगी रहीं। कुछ लोगों को उठाकर पूछताछ की और मोबाइल सर्विलांस पर लगाए लेकिन कोई खास जानकारी नहीं मिल सकी है।
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डॉ.बंसल की हत्या के विरोध में निजी डॉक्टरों ने सिविल लाइंस स्थित सुभाष चौराहे से जुलूस निकालकर हत्यारों की शीघ्र गिरफ्तारी और सीबीआई की जांच की मांग की। चेतावनी दी कि कातिल पकड़े नहीं गए तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। डॉक्टरों ने सभा करके डॉ. बंसल के परिवार के सदस्यों की सुरक्षा की मांग की।
इलाहाबाद सिटीजन फोरम के आह्वान पर इलाहाबाद बंद का मिला-जुला असर रहा। इलाहाबाद डेंटल एसोसिएशन के सदस्यों ने जहां क्लीनिक बंद रखी वहीं, प्रयाग केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन (रिटेल) के कारोबारियों ने मेडिकल स्टोर बंद रखे। थोक व्यापारियों ने आंदोलन का समर्थन किया, लेकिन थोक दुकानें खुलीं रखीं।
मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों ने भी स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय परिसर में प्रदर्शन कर डॉ. बंसल के हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग की। जूनियर डॉक्टरों ने कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए। कहा कि मौजूदा हालात में हर शख्स खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।
डॉ.बंसल हत्याकांड की जांच में जुटी टीमों ने उनके प्रापर्टी से जुड़े विवादों को खंगाला है। उनमें प्रमुख विवाद है सीतापुर का मामला जहां करोड़ों रुपये कीमत की एक जमीन का मसला और महर्षि विश्वविद्यालय का मामला बेहद गर्माया था। घटना से एक दिन पहले ही डॉ.बंसल ने लखनऊ जाकर दूसरे पक्ष के लोगों के साथ पंचायत की थी मगर मामला बना नहीं।
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डॉ.एके बंसल की हत्या के विरोध में निजी डॉक्टरों की हड़ताल से मरीज दूसरे दिन भी परेशान रहे। ज्यादातर मरीज निजी अस्पतालों में जाने की बजाय बेली, कॉल्विन और स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय पहुंचे। इसके चलते इन तीनों अस्पतालों में ज्यादा भीड़ रही। प्रांतीय चिकित्सा सेवा (पीएमएस) संवर्ग के सदस्य हड़ताल में शामिल नहीं हुए। इसलिए सरकारी अस्पतालों में मरीजों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।
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पीएमएस संवर्ग के डॉक्टरों ने हाथों में काली पट्टी बांधकर घटना का विरोध किया और हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग की। निजी अस्पतालों में केवल पहले से भर्ती मरीजों का उपचार हुआ। ओपीडी, इमरजेंसी सेवाएं पूरी तरह से शनिवार को भी ठप रहीं। इससे निजी अस्पतालों मेें सन्नाटा पसरा रहा। उधर, एसटीएफ के एसएसपी अमित पाठक के नेतृत्व में एसटीएफ और क्राइम ब्रांच की टीमें अस्पताल से लेकर डॉक्टर के निवास तक छानबीन में लगी रहीं। कुछ लोगों को उठाकर पूछताछ की और मोबाइल सर्विलांस पर लगाए लेकिन कोई खास जानकारी नहीं मिल सकी है।
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डॉ.बंसल की हत्या के विरोध में निजी डॉक्टरों ने सिविल लाइंस स्थित सुभाष चौराहे से जुलूस निकालकर हत्यारों की शीघ्र गिरफ्तारी और सीबीआई की जांच की मांग की। चेतावनी दी कि कातिल पकड़े नहीं गए तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। डॉक्टरों ने सभा करके डॉ. बंसल के परिवार के सदस्यों की सुरक्षा की मांग की।
इलाहाबाद सिटीजन फोरम के आह्वान पर इलाहाबाद बंद का मिला-जुला असर रहा। इलाहाबाद डेंटल एसोसिएशन के सदस्यों ने जहां क्लीनिक बंद रखी वहीं, प्रयाग केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन (रिटेल) के कारोबारियों ने मेडिकल स्टोर बंद रखे। थोक व्यापारियों ने आंदोलन का समर्थन किया, लेकिन थोक दुकानें खुलीं रखीं।
मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों ने भी स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय परिसर में प्रदर्शन कर डॉ. बंसल के हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग की। जूनियर डॉक्टरों ने कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए। कहा कि मौजूदा हालात में हर शख्स खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।
डॉ.बंसल हत्याकांड की जांच में जुटी टीमों ने उनके प्रापर्टी से जुड़े विवादों को खंगाला है। उनमें प्रमुख विवाद है सीतापुर का मामला जहां करोड़ों रुपये कीमत की एक जमीन का मसला और महर्षि विश्वविद्यालय का मामला बेहद गर्माया था। घटना से एक दिन पहले ही डॉ.बंसल ने लखनऊ जाकर दूसरे पक्ष के लोगों के साथ पंचायत की थी मगर मामला बना नहीं।